राजस्थान में 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित: 14 जिलों में 6 महीने तक मिलेगी राहत

अगर आपकी तहसील इस बार कम बारिश से जूझ रही है, तो सबसे बड़ी खबर यही है कि राजस्थान 80 तहसील सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद अब उन इलाकों में छह महीने तक सूखा राहत से जुड़े प्रावधान लागू रहेंगे। राज्य सरकार ने रविवार को अधिसूचना जारी की, और सोमवार सुबह से ही इस फैसले की चर्चा पूरे प्रदेश में है, क्योंकि इसका असर लाखों किसान परिवारों और पशुपालकों पर सीधे पड़ेगा।

राजस्थान 80 तहसील सूखाग्रस्त: छह महीने तक क्या बदलेगा

सूखाग्रस्त घोषित होने का मतलब सिर्फ सूची में नाम आना नहीं है। अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से अगले छह महीने तक संबंधित प्रावधान लागू रहेंगे। पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में छह महीने तक राजस्व वसूली पर रोक लगा दी गई है, साथ ही चारा डिपो खोलने और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह बात साफ रखनी चाहिए कि राजस्व वसूली पर रोक का मतलब कर्ज माफी नहीं है। दैनिक नवज्योति के अनुसार, 1952 के अधिनियम के तहत अधिसूचित क्षेत्रों में निर्धारित शर्तों पर कुछ वसूली कार्रवाइयों पर रोक लागू हो सकती है, लेकिन यह राहत सभी ऋणों पर अपने आप लागू नहीं होगी। किसान को तहसील कार्यालय से यह जरूर पूछना चाहिए कि उसके मामले में कौन सी कार्रवाई रुकेगी। फसल नुकसान पर पात्र किसानों को राज्य आपदा मोचन निधि के नियमों से कृषि आदान-अनुदान भी मिल सकता है, जिसके लिए गिरदावरी रिपोर्ट और नुकसान का आकलन जरूरी होगा।

राजस्थान 80 तहसील सूखाग्रस्त: किन जिलों की कितनी तहसीलें

सबसे ज्यादा प्रभावित पश्चिमी राजस्थान है। जोधपुर की 12, जालोर और बाड़मेर की 10-10, बालोतरा की 9 और पाली की 8 तहसीलें सूची में हैं।

जिला तहसीलें
जोधपुर 12
जालोर 10
बाड़मेर 10
बालोतरा 9
पाली 8
डूंगरपुर, जैसलमेर, फलोदी 7-7
बांसवाड़ा 3
ब्यावर, चूरू, बीकानेर 2-2
नागौर, सिरोही 1-1

पत्रिका के अनुसार, दो अधिसूचनाओं में कुल 80 तहसील क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें 53 गंभीर स्थिति में हैं। गंभीर श्रेणी में गढ़ी, अरथूना, गडरा रोड, चौहटन, गुढ़ामालानी, पचपदरा, आसपुर, सागवाड़ा, फतेहगढ़, सम, आहोर, सांचोर, ओसियां, बाप, सुमेरपुर और शिवगंज जैसी तहसीलें शामिल हैं।

बारिश कितनी कम हुई: आंकड़े बताते हैं संकट की गहराई

इस फैसले के पीछे मानसून की बेरुखी है। पाली में सामान्य से 58 प्रतिशत, जैसलमेर में 54 प्रतिशत और जालोर में 50 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बांसवाड़ा में 39 प्रतिशत, सिरोही में 36 प्रतिशत, बालोतरा में 28 प्रतिशत, जोधपुर में 27 प्रतिशत और डूंगरपुर में 24 प्रतिशत की कमी रही।

कम बारिश का असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहा। नमी की कमी से खरीफ की फसलें प्रभावित हुई हैं, और कई इलाकों में किसानों को उत्पादन में गिरावट का डर है। चारागाहों में चारा नहीं है और जलस्रोतों में पानी की कमी है, इसलिए पशुपालकों की मुश्किल भी बढ़ी है। सरकार ने भूजल, सतही जल और फसल नुकसान का आकलन करके यह निर्णय लिया है।

यह फैसला कैसे बना: रविवार की अधिसूचना और संशोधित सूची

पहली सूची में कई प्रभावित तहसीलें छूट गई थीं, और बाद में संशोधित आदेश से अतिरिक्त तहसीलें जोड़ी गईं। बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उमेदाराम बेनीवाल के अनुसार, बाड़मेर और बालोतरा की 20 तहसीलों में से पहले 12 को अकाल प्रभावित घोषित किया गया था, फिर संशोधित सूची में 7 और तहसीलें जोड़ी गईं। उन्होंने कहा कि नोखड़ा तहसील अब भी सूची से बाहर है।

अक्टूबर में किरोड़ी मीणा के सर्वे वाले बयान के बाद अब कानूनी राहत का चरण शुरू हुआ है, इसलिए यह पुरानी खबर का दोहराव नहीं है।

सियासी प्रतिक्रिया: स्वागत भी, देरी का आरोप भी

मुख्य सचेतक और जालोर विधायक जोगेश्वर गर्ग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताया और कहा कि सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए यह निर्णय लिया है। किसान ऑनलाइन पोर्टल से अपनी गिरदावरी रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी फैसले का स्वागत किया और इसे खरीफ 2026 में वर्षा की कमी को देखते हुए किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया। दूसरी तरफ, सांसद बेनीवाल ने कहा कि केवल सूची में शामिल करना काफी नहीं है, धरातल पर तत्काल राहत पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने संशोधित आदेश को जनता की जीत बताया, लेकिन कहा कि सरकार पहले ही काफी देरी कर चुकी है। दोनों ने पशु शिविर और टैंकरों से पानी की आपूर्ति जल्द शुरू करने की मांग की।

राजस्थान 80 तहसील सूखाग्रस्त होने के बाद किसान क्या करें

पहला काम अपनी तहसील का नाम सूची में जांचना है। अगर आपकी तहसील सूची में है, तो पटवारी से गिरदावरी रिपोर्ट की स्थिति पूछें, क्योंकि फसल नुकसान के आकलन में यही रिपोर्ट आधार बनेगी। दूसरा काम जिला प्रशासन से यह पूछना है कि आपके इलाके में चारा डिपो कहां खुलेगा। तीसरा काम अफवाहों से बचना है, क्योंकि राजस्व वसूली पर रोक, कृषि आदान-अनुदान और चारा-पानी की व्यवस्था अलग-अलग प्रावधान हैं। रबी सीजन में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी पर सब्सिडी से जुड़ी राहत भी पहले ही सामने आ चुकी है, इसलिए बुवाई की योजना पानी की उपलब्धता के हिसाब से बनाएं।

आगे मौसम से कितनी उम्मीद: 29-30 अक्टूबर पर नजर

मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार 26 अक्टूबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा और किसी जिले के लिए विशेष अलर्ट नहीं है। हालांकि, 27 अक्टूबर की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से 29 और 30 अक्टूबर को जयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर और उदयपुर संभागों में कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना है, और पूर्वी राजस्थान में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं चल सकती हैं। यह बारिश सूखे को खत्म नहीं करेगी, लेकिन एक छोटी राहत जरूर दे सकती है। राजस्थान के मौसम का ताजा पूर्वानुमान भी यही संकेत देता है। इस फैसले की मूल जानकारी ईटीवी भारत की रिपोर्ट में उपलब्ध है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: कितनी तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित हुई हैं?

उत्तर: 14 जिलों की 80 तहसीलों को गंभीर और मध्यम सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जिनमें 53 गंभीर स्थिति में हैं।

प्रश्न: किसानों को क्या राहत मिलेगी?

उत्तर: छह महीने तक राजस्व वसूली पर रोक, चारा डिपो और पेयजल आपूर्ति लागू रहेंगे; पात्र किसानों को आपदा निधि से आदान-अनुदान मिल सकता है।

प्रश्न: क्या सूची में नाम आते ही कर्ज माफ हो जाता है?

उत्तर: नहीं, यह रोक कर्ज माफी नहीं है और सभी ऋणों पर अपने आप लागू नहीं होगी।

प्रश्न: किसान जानकारी कहां से लें?

उत्तर: सूची में नाम जांचें, पटवारी से गिरदावरी पूछें और चारा डिपो के लिए जिला प्रशासन से संपर्क करें।

फैसला कागज पर बड़ी राहत है, लेकिन असली परीक्षा जमीन पर होगी — चारा डिपो, टैंकर और गिरदावरी आकलन की पारदर्शिता ही तय करेगी कि फायदा सच में किसान तक पहुंचता है या नहीं।

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