रबी सीजन में राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत: नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव पर 50% सब्सिडी, पैसा सीधे खाते में आएगा

आधी लागत सरकार देगी, पैसा सीधे खाते में आएगा

रबी सीजन की बुवाई के बीच राजस्थान के किसानों के लिए सीधे जेब से जुड़ी खबर सामने आई है। राजस्थान नैनो यूरिया सब्सिडी के तहत गेहूं, सरसों, चना जैसी रबी फसलों पर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव पर कुल खर्च का आधा हिस्सा सरकार देगी, और यह रकम डीबीटी से सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।

25 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था राजस्थान सरकार की बजट घोषणा 2026-27 के तहत चलाई जा रही है। इसका मकसद रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करना और मिट्टी की सेहत बनाए रखना है। पत्तियों पर सीधे छिड़काव से पौधा पोषण जल्दी ग्रहण कर लेता है।

राजस्थान नैनो यूरिया सब्सिडी में कितनी मदद मिलेगी

कृषि अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर के अनुसार दोनों तरह की नैनो खाद के लिए अलग-अलग दरें तय हैं। नैनो यूरिया पर प्रति हेक्टेयर कुल 2,000 रुपये के खर्च में से 1,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। नैनो डीएपी पर प्रति हेक्टेयर कुल 2,900 रुपये के खर्च में से 1,450 रुपये की मदद मिलेगी। बाकी आधा हिस्सा किसान को खुद उठाना होगा।

नैनो खाद प्रति हेक्टेयर कुल खर्च सरकारी सब्सिडी किसान का हिस्सा
नैनो यूरिया 2,000 रुपये 1,000 रुपये 1,000 रुपये
नैनो डीएपी 2,900 रुपये 1,450 रुपये 1,450 रुपये
एक बार छिड़काव प्रति हेक्टेयर 2.5 बोतल दर के अनुसार —

एक और जरूरी आंकड़ा यह है कि प्रति हेक्टेयर एक बार के छिड़काव के लिए 2.5 बोतल नैनो खाद का प्रावधान बताया गया है। हालांकि किसान को अपनी फसल की स्थिति के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि हर खेत की मिट्टी और फसल की अवस्था अलग होती है।

राजस्थान नैनो यूरिया सब्सिडी किन फसलों पर लागू होगी

इस योजना में रबी सीजन की मुख्य फसलें शामिल हैं — गेहूं, जौ, सरसों, चना और जीरा। ये वही फसलें हैं, जिनकी बुवाई राजस्थान के ज्यादातर जिलों में बड़े पैमाने पर होती है और जिन पर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक टिकी है।

छोटे किसानों को भी बाहर नहीं रखा गया है। एक किसान कम से कम 0.4 हेक्टेयर और अधिकतम 10 हेक्टेयर तक के खेत में छिड़काव के लिए मदद ले सकता है। अक्सर शिकायत रहती है कि योजनाओं का फायदा सिर्फ बड़े किसानों को मिलता है, लेकिन यहां न्यूनतम सीमा सिर्फ 0.4 हेक्टेयर है। हालांकि लाभ उन्हीं को मिलेगा, जो योजना के तय नियमों के दायरे में आते हैं।

छिड़काव कैसे होगा, किसान के पास क्या विकल्प हैं

छिड़काव के तरीके को लेकर किसान को पूरी आजादी दी गई है। वह अपनी सुविधा और खेत की स्थिति के अनुसार बैटरी से चलने वाली मशीन, पीठ पर टांगने वाले स्प्रे पंप, ट्रैक्टर से जुड़ी मशीन या ड्रोन से छिड़काव करा सकता है। छोटे खेतों के लिए पीठ वाला पंप काफी है, जबकि बड़े खेतों में ट्रैक्टर या ड्रोन से काम तेज और एकसमान होता है, और फसल को रौंदा भी नहीं जाता।

छिड़काव कृषि विभाग की देखरेख में होगा, ताकि सही मात्रा में और सही समय पर काम हो। इसके बाद अधिकारी खेत की जांच करेंगे, और जांच पूरी होने के बाद ही पात्र किसानों के खातों में सब्सिडी भेजी जाएगी। इसलिए छिड़काव की तारीख और इस्तेमाल की गई खाद की जानकारी संभालकर रखें।

गांवों में दस किसानों का समूह क्यों बनाया जा रहा है

योजना को जमीन पर उतारने के लिए गांवों में कम से कम दस किसानों का एक समूह बनाया जाएगा। इस समूह के खेतों में छिड़काव कराया जाएगा, ताकि किसान इसका तरीका खुद देख और समझ सकें। जब एक ही गांव के दस किसान एक साथ यह तरीका अपनाते हैं, तो आसपास के किसान भी भरोसा करके आगे आते हैं।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत इस अभियान को क्लस्टर व्यवस्था के आधार पर चलाया जा रहा है। सामने आए आंकड़ों के अनुसार संबंधित जिले में नैनो यूरिया के लिए 680 हेक्टेयर और नैनो डीएपी के लिए 476 हेक्टेयर क्षेत्र में छिड़काव का लक्ष्य रखा गया है। समूह का एक और फायदा यह है कि मशीन और ड्रोन का खर्च भी बंट जाता है — दस किसान मिलकर एक ही दिन में कई खेतों का छिड़काव करा सकते हैं, जिससे समय की बचत होती है और विभाग के कर्मचारियों के लिए भी एक ही जगह कई किसानों को तकनीक समझाना आसान हो जाता है।

लाभ लेने के लिए क्या करना होगा

सब्सिडी पाने के लिए किसान को सबसे पहले अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि पर्यवेक्षक से संपर्क करना होगा। वहीं से पता चलेगा कि उसका गांव या खेत योजना के दायरे में आता है या नहीं, और उसके क्षेत्र में समूह कब बनाया जा रहा है। बैंक खाता और खेत से जुड़ी जानकारी सही रखना भी जरूरी है, ताकि डीबीटी से पैसा मिलने में कोई रुकावट न आए।

जो किसान रबी सीजन की खाद व्यवस्था पर नजर रख रहे हैं, उनके लिए यह खबर इसलिए भी अहम है, क्योंकि इस सीजन में खाद की उपलब्धता और कीमत दोनों चर्चा में रहे हैं। नैनो खाद पारंपरिक बोरी वाली खाद का पूरी तरह विकल्प नहीं है, लेकिन सही समय पर पूरक पोषण के तौर पर फसल को अच्छा सहारा दे सकता है। इसी तरह फसल सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी एक साथ रखनी चाहिए, ताकि मौसम की मार से भी बचाव हो सके।

इस्तेमाल से पहले ये सावधानियां जरूर रखें

नैनो खाद आधुनिक तकनीक है, लेकिन इसे बिना सलाह के इस्तेमाल करना सही नहीं होगा। पहले अपनी फसल की अवस्था देखिए — किस फसल को किस अवस्था में कितना पोषण चाहिए, यह कृषि विशेषज्ञ ही बता सकता है। दूसरे, तेज धूप या तेज हवा में छिड़काव करने से दवा उड़ जाती है, इसलिए सुबह या शाम का समय बेहतर माना जाता है। तीसरे, मिट्टी जांच की प्रक्रिया से यह तय कीजिए कि खेत को असल में किस पोषण की जरूरत है। आखिर में, पहले कृषि पर्यवेक्षक से अपने गांव और खेत की पात्रता पूछिए, फिर समूह में शामिल होकर सही तरीके से छिड़काव कराइए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान नैनो यूरिया सब्सिडी में प्रति हेक्टेयर कितनी मदद मिलेगी?
नैनो यूरिया पर 1,000 रुपये और नैनो डीएपी पर 1,450 रुपये प्रति हेक्टेयर सब्सिडी मिलेगी, जो कुल खर्च का 50 प्रतिशत है।

इस योजना में कौन-सी फसलें शामिल हैं?
गेहूं, जौ, सरसों, चना और जीरा जैसी रबी फसलें शामिल हैं।

एक किसान कितने क्षेत्र के लिए मदद ले सकता है?
0.4 हेक्टेयर से 10 हेक्टेयर तक के खेत में छिड़काव के लिए मदद मिल सकती है।

सब्सिडी का पैसा कैसे मिलेगा?
छिड़काव और जांच के बाद सब्सिडी डीबीटी से सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।

स्रोत: एबीपी लाइव और गांव जंक्शन, 25 अक्टूबर 2026; आंकड़े कृषि अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर के हवाले से। मूल खबर।

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