पश्चिमी राजस्थान के किसानों और पशुपालकों के लिए बुधवार को राहत भरी खबर आई। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर में साफ शब्दों में कहा कि राजस्थान सूखा राहत का काम सर्वे पूरा होते ही शुरू कर दिया जाएगा। यानी जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, वहां का आकलन होते ही अकाल घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और उसके बाद प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचेगी।
मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राजस्थान सूखा राहत को लेकर राज्य की सियासत गरमाई हुई है। विपक्ष लगातार सरकार पर तत्काल राहत देने का दबाव बना रहा है। ऐसे में सरकार की ओर से पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया गया है कि सर्वे की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और आगे क्या होगा।
सर्वे पूरा होते ही शुरू होंगे राहत कार्य: किरोड़ी मीणा ने क्या कहा
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने 21 अक्टूबर को जयपुर स्थित भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रदेश के 8 से 10 जिलों में इस बार बारिश कम हुई है। इन जिलों के कलेक्टर और अधिकारी लगातार स्थिति की जानकारी जुटा रहे हैं। राजस्व विभाग सर्वे की प्रक्रिया पूरी कर रहा है और सर्वे में समय लगता है।
मीणा ने जोर देकर कहा कि सर्वे पूरा होने और अकाल घोषित किए जाने के बाद राजस्थान सूखा राहत कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। उनके मुताबिक सरकार के पास अधिकारियों से सूचनाएं लगातार आ रही हैं। सर्वे का काम जल्दी पूरा होते ही प्रभावित किसानों और पशुपालकों तक राहत पहुंचना शुरू हो जाएगा।
मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गहलोत को इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सरकार सर्वे और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कदम उठाएगी, क्योंकि सर्वे रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आती है।
राजस्थान सूखा राहत सर्वे: किन जिलों में सूखे की आशंका सबसे ज्यादा
सूखे की सबसे ज्यादा मार पश्चिमी राजस्थान पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अक्टूबर की शुरुआत में जो आंकड़े रखे थे, उनके मुताबिक स्थिति इस प्रकार है:
| जिला | सूखे जैसे हालात वाले गांव (दावा) |
|---|---|
| जोधपुर | करीब 2,000 गांव |
| बाड़मेर | 2,460 गांव |
| बालोतरा | 1,216 गांव |
| जैसलमेर | 961 गांव |
कृषि मंत्री के मुताबिक कुल 8 से 10 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश सामान्य से कम हुई है। इन जिलों में फसलों के साथ-साथ पशुओं के लिए चारे, ग्रामीण इलाकों में पेयजल और किसानों की आजीविका पर भी असर पड़ने की चिंता है। कृषि और राजस्व विभाग का सर्वे इन्हीं इलाकों में चल रहा है, और रिपोर्ट आने के बाद ही प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
अकाल घोषित होने की प्रक्रिया: सर्वे से राहत तक
राजस्थान में अकाल घोषित करना राजस्थान सूखा राहत की एक तयशुदा प्रशासनिक प्रक्रिया है। सरकार सर्वे के आधार पर ही यह फैसला लेती है, इसलिए मंत्री बार-बार सर्वे पूरा होने की बात दोहरा रहे हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर इस क्रम में आगे बढ़ती है:
- फील्ड सर्वे और गिरदावरी: कलेक्टर और राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर फसल, बारिश और पानी की स्थिति का आकलन करती हैं।
- रिपोर्ट और समीक्षा: सर्वे रिपोर्ट सरकार के पास पहुंचती है और प्रभावित क्षेत्रों की सूची तैयार होती है।
- अकाल की घोषणा: तय मानदंडों के आधार पर सरकार प्रभावित इलाकों को अकालग्रस्त घोषित करती है।
- राहत कार्यों की शुरुआत: घोषणा के बाद राहत कार्य शुरू होते हैं।
अकाल घोषित होने के बाद आमतौर पर जो राहत कार्य शुरू किए जाते हैं, उनमें ये शामिल होते हैं:
- पशुओं के लिए चारा डिपो और पशु राहत शिविर
- पेयजल की विशेष व्यवस्था, टैंकरों से पानी की आपूर्ति
- ग्रामीण इलाकों में रोजगार के काम
- फसल नुकसान पर मुआवजे की प्रक्रिया
- प्रभावित किसानों को अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ
गहलोत की मांगें और सरकार का जवाब
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो दिन पहले भाजपा सरकार पर सूखे की गंभीरता नहीं समझने का आरोप लगाया था। उन्होंने बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर का उल्लेख करते हुए स्थिति को चिंताजनक बताया और जल्द गिरदावरी कराने की मांग की।
गहलोत की मांगों में प्रभावित क्षेत्रों को अकालग्रस्त घोषित करना, राजस्थान सूखा राहत कार्य तुरंत शुरू करना, पशुओं के लिए चारा डिपो खोलना, पेयजल की व्यवस्था करना, पशु राहत शिविर शुरू करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना शामिल है। उन्होंने राज्य सरकार से राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार की मदद लेने की अपील भी की थी।
इस पर कृषि मंत्री किरोड़ी मीणा का कहना है कि सरकार प्रक्रिया के हिसाब से चल रही है। उनका तर्क है कि बिना सर्वे के अकाल घोषित नहीं किया जा सकता, और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही प्रभावित क्षेत्रों में आगे की कार्रवाई तय होगी। राजस्थान सूखा संकट पर इससे पहले भी विपक्ष सरकार पर हमलावर रहा है।
राजस्थान सूखा राहत से किसानों-पशुपालकों को क्या मिलेगा
अगर आप पश्चिमी राजस्थान के किसान या पशुपालक हैं, तो इस बयान का सीधा मतलब यह है कि राजस्थान सूखा राहत का रास्ता अब सर्वे रिपोर्ट पर टिका है। सर्वे पूरा होते ही अकाल की घोषणा होगी और उसके बाद चारा डिपो, पशु शिविर, पेयजल व्यवस्था और रोजगार जैसे राहत कार्य शुरू होंगे।
इस बीच पेयजल संकट को लेकर जलदाय विभाग पहले ही कंटिजेंसी प्लान पर काम कर रहा है, जिससे सूखे के दौरान पानी की कमी से निपटने की तैयारी की जा रही है। कमजोर मानसून का असर रबी बुवाई पर भी पड़ रहा है, इसलिए किसानों को बुवाई के फैसले मौसम की ताजा जानकारी के हिसाब से लेने की सलाह दी जा रही है।
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र में चल रहे सर्वे में अपनी फसल और नुकसान की सही जानकारी दें, ताकि रिपोर्ट में वास्तविक स्थिति दर्ज हो सके। पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पंचायत से चारा डिपो और पशु राहत शिविरों की जानकारी लेते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: राजस्थान में अकाल कब घोषित होगा? उत्तर: कृषि मंत्री के मुताबिक राजस्व विभाग का सर्वे पूरा होते ही अकाल घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और राजस्थान सूखा राहत कार्य शुरू होंगे। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की सूची तय होगी।
प्रश्न: अकाल घोषित होने पर किसानों को क्या राहत मिलती है? उत्तर: अकाल घोषणा के बाद चारा डिपो, पशु राहत शिविर, पेयजल की विशेष व्यवस्था, ग्रामीण रोजगार के काम और फसल नुकसान पर मुआवजे की प्रक्रिया जैसे राहत कार्य शुरू होते हैं।
प्रश्न: किन जिलों में सूखे का सर्वे चल रहा है? उत्तर: कृषि मंत्री के अनुसार 8 से 10 जिलों में बारिश कम हुई है, जिनमें पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर जैसे जिले प्रमुख हैं।
प्रश्न: सूखे में पशुपालक कहां मदद मांगें? उत्तर: पशुपालक अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय, पंचायत या जिला प्रशासन से चारा डिपो और पशु राहत शिविरों की जानकारी ले सकते हैं। अकाल घोषणा के बाद राजस्थान सूखा राहत के तहत ये सुविधाएं शुरू की जाएंगी।