राजस्थान फसल बीमा 345 करोड़ जारी: 9 जिलों के किसानों को दिवाली राहत

राजस्थान फसल बीमा 345 करोड़ की खबर महीनों से दावे का इंतजार कर रहे किसानों के लिए सीधी राहत लेकर आई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लंबित करीब 345 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान राज्य सरकार ने कराया है। इसका फायदा नौ जिलों के पात्र किसानों को मिलेगा, जिनकी फसल सूखे, आपदा या प्रतिकूल मौसम से खराब हुई थी। दिवाली पर आई यह राहत अगली फसल की तैयारी और घर के खर्च दोनों में सहारा बनेगी।

सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिमी राजस्थान को गया है, जहां रबी 2025-26 में सूखे ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। अकेले बीकानेर को 116 करोड़ रुपये मिले हैं — कुल राशि का करीब एक-तिहाई। बाड़मेर को 53.60 करोड़, जोधपुर को 48 करोड़, जालोर को 43.58 करोड़, पाली को 31 करोड़ और चूरू को 25.85 करोड़ रुपये मिले हैं। इन छह जिलों का जोड़ करीब 318 करोड़ रुपये है। शिकायत निपटारे से जालोर-डूंगरपुर को 17.60 करोड़ और जयपुर की दूदू तहसील को 9.50 करोड़ रुपये मिले हैं।

राजस्थान फसल बीमा 345 करोड़: जिलेवार कितनी राशि

नीचे कृषि विभाग के बताए आंकड़े हैं। सिरोही भी नौ लाभान्वित जिलों में है, पर उसका अलग आंकड़ा रिपोर्टों में नहीं है।

जिला / क्षेत्र राशि (करोड़ रुपये) किस दावे का भुगतान
बीकानेर 116 रबी 2025-26, सूखा
बाड़मेर 53.60 रबी 2025-26, सूखा
जोधपुर 48 रबी 2025-26, सूखा
जालोर 43.58 रबी 2025-26, सूखा
पाली 31 रबी 2025-26, सूखा
चूरू 25.85 रबी 2025-26, सूखा
जालोर 10.64 खरीफ 2024, शिकायत निपटारा
डूंगरपुर 6.96 खरीफ 2025, शिकायत निपटारा
जयपुर (दूदू) 9.50 उच्चतर औसत उपज आधार

दावे इतने समय तक अटके क्यों रहे

इन दावों के अटकने की वजह कागजों की पुरानी अड़चन थी। कई दावे बीमा कंपनियों की आपत्तियों से रुके थे। आपत्ति का मतलब यह नहीं था कि दावा गलत था, बल्कि कंपनी और विभाग के बीच आंकड़ों या प्रक्रिया पर मतभेद था। ऐसे में किसान बीच में फंस जाता है — न पैसा मिलता है, न पता चलता है कि मामला कहां अटका है।

इस अड़चन को राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति की बैठक में सुलझाया गया, जिसने बीमा कंपनियों की आपत्तियों को अस्वीकार करते हुए भुगतान के निर्देश दिए। इसी फैसले से जालोर के खरीफ 2024 के 10.64 करोड़ और डूंगरपुर के खरीफ 2025 के 6.96 करोड़ रुपये खातों में जमा कराए गए। दूदू तहसील में फसल कटाई प्रयोग पूरे नहीं हो पाए थे, इसलिए वहां उच्चतर औसत उपज के आधार पर 9.50 करोड़ रुपये दिए गए।

इस भुगतान के पीछे किसकी भूमिका रही

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के मार्गदर्शन में लंबित दावों का निपटारा हुआ है। विभाग ने बीमा कंपनियों और केंद्र के अधिकारियों से समन्वय कर बाधाएं दूर कीं। पत्रिका के अनुसार, पंचायतीराज चुनाव के शुरुआती दौर की समीक्षा में यह मामला मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री तक पहुंचा था।

पश्चिमी राजस्थान के 318 करोड़ रुपये एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी और रिलायंस जनरल इंश्योरेंस के माध्यम से पहुंचाए गए हैं। कृषि मंत्री ने कहा है कि समय पर आर्थिक सहायता देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी पात्र किसान को योजना से वंचित नहीं रहना चाहिए।

रबी 2025-26 में पश्चिमी राजस्थान में हुआ क्या था

रबी 2025-26 में पश्चिमी राजस्थान में बारिश की कमी ने फसलों को सीधा नुकसान पहुंचाया। सूखे का असर खेत तक सीमित नहीं रहता — बीज, खाद और सिंचाई पर खर्चा भी डूब जाता है, और अगली बुवाई के लिए पूंजी नहीं बचती। इसलिए फसल बीमा का भुगतान सिर्फ मुआवजा नहीं, अगली फसल के लिए कार्यशील पूंजी भी है।

इसी संदर्भ में राज्य की 80 तहसीलों को हाल ही में सूखाग्रस्त घोषित किया गया था — पूरी खबर यहां पढ़ें — और सूखा राहत सर्वे पर कृषि मंत्री का बयान यहां पढ़ें। बीमा योजना में शामिल किसानों के लिए यह भुगतान उस राहत का अगला चरण है।

आपका दावा अटका हो तो अब क्या करें

सबसे पहले अपना बैंक खाता जांचें — भुगतान सीधे खाते में हो रहा है। राशि न पहुंची हो तो पता करें कि दावा किस चरण में अटका है। कृषि विभाग के कार्यालय या बीमा कंपनी के जिला प्रतिनिधि से पॉलिसी और दावे की स्थिति पूछें। फसल बीमा की रसीद, बैंक विवरण और जमीन के कागज तैयार रखें, ताकि जांच में समय न लगे।

अगर आपका दावा पहले किसी आपत्ति से रुका था, तो शिकायत निराकरण समिति का हालिया फैसला आपके मामले पर भी लागू हो सकता है। योजना की जानकारी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर भी देखी जा सकती है। ध्यान रखें: बीमा का पैसा किसी बिचौलिए से नहीं मिलता — भुगतान के नाम पर रकम मांगने वाले को मना करें और विभाग को सूचित करें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की योजना है, जिसका मकसद प्राकृतिक आपदा, सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि या कीट-रोग से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। किसान मामूली प्रीमियम देकर अपनी फसल का बीमा कराता है, और नुकसान होने पर बीमा कंपनी तय प्रक्रिया से दावे का भुगतान करती है। राजस्थान में इस योजना का दायरा बड़ा है — हाल ही में इसके क्रियान्वयन में राज्य को देश में चौथा स्थान भी मिला था।

दावा तभी बनता है जब किसान ने समय पर बीमा कराया हो और नुकसान की सूचना तय प्रक्रिया से दी गई हो। दूदू का मामला बताता है कि फसल कटाई प्रयोग पूरे न होने पर भी वैकल्पिक आधार पर भुगतान का रास्ता निकल सकता है।

राजस्थान फसल बीमा 345 करोड़: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान फसल बीमा 345 करोड़ का भुगतान किन जिलों को मिलेगा?
जयपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, पाली, सिरोही, चूरू, जालोर और डूंगरपुर — इन नौ जिलों के पात्र बीमित किसानों को इसका लाभ मिलेगा।

सबसे ज्यादा राशि किस जिले को मिली है?
बीकानेर को सबसे ज्यादा 116 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बाद बाड़मेर को 53.60 करोड़ और जोधपुर को 48 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया है।

मेरा दावा पहले अटका हुआ था, क्या वह भी अब मिलेगा?
शिकायत निराकरण समिति के फैसले के बाद ऐसे कई दावों का भुगतान हुआ है। अपने दावे की स्थिति कृषि विभाग या बीमा कंपनी से जरूर जांचें।

राशि खाते में न पहुंचे तो क्या करें?
खाता नियमित रूप से जांचते रहें। राशि न मिलने पर कृषि विभाग के कार्यालय या बीमा कंपनी के जिला प्रतिनिधि से अपनी पॉलिसी और दावे की स्थिति पूछें।

कुल मिलाकर, राजस्थान फसल बीमा 345 करोड़ की यह राहत सूखे और प्रतिकूल मौसम में फसल गंवाने वाले किसानों तक पहुंच रही है। अगर आप इन नौ जिलों में रहते हैं और आपकी फसल बीमित थी, तो अपना खाता जांचना आज का सबसे जरूरी काम है।

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