प्रागपुरा में डोडा चूरा तस्करी का भंडाफोड़: 16.7 किलो मादक पदार्थ और 1.12 लाख नकद बरामद, आरोपी गिरफ्तार
प्रागपुरा डोडा चूरा तस्करी के इस मामले ने कोटपुतली-बहरोड़ जिले में नशे के नेटवर्क की जड़ें खोल दी हैं। प्लास्टिक के एक कट्टे में छिपाकर रखा गया 16 किलो 712 ग्राम डोडा चूरा और उसके पास से मिली 1 लाख 12 हजार 160 रुपये की नकदी यह साफ बताती है कि यह कोई मामूली भंडारण नहीं था — यह बिक्री का पूरा खाता चल रहा था। पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को की गई कार्रवाई में थालोडो की ढाणी निवासी धनसीराम जाट (32) को गिरफ्तार किया है। मामले में थाना प्रागपुरा में मुकदमा संख्या 458/2026 दर्ज कर NDPS एक्ट की धारा 8/15 के तहत जांच शुरू हो गई है।
प्रागपुरा डोडा चूरा तस्करी: कैसे बिछा पुलिस का जाल
यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह के निर्देशों पर हुई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोटपूतली नाजिम अली खान और विराटनगर वृत्ताधिकारी एम.एन. भरत के सुपरविजन में थाना प्रभारी भजनाराम के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। इसमें प्रागपुरा थाना पुलिस के साथ ANTF की टीम भी शामिल थी, क्योंकि डोडा चूरा जैसे मादक पदार्थों के मामले सीधे तस्करी नेटवर्क से जुड़ते हैं।
संयुक्त टीम ने धनसीराम जाट की तलाशी ली तो प्लास्टिक के कट्टे से 16 किलो 712 ग्राम डोडा चूरा बरामद हुआ। इसके अलावा 1,12,160 रुपये नकद भी जब्त किए गए, जिसे पुलिस ने डोडा चूरा की बिक्री से आई रकम बताया है। यानी आरोपी के पास सिर्फ माल नहीं, बल्कि उसके खरीदारों और पैसों के पूरे रिकॉर्ड तक पुलिस पहुंच चुकी है।
दो एजेंसियों का एक साथ मैदान में उतरना बताता है कि पुलिस इस प्रकरण को सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखना चाहती।
कौन है गिरफ्तार आरोपी धनसीराम जाट
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी धनसीराम जाट (32) पुत्र धुडाराम जाट, निवासी थालोडो की ढाणी, तन बड़नगर, थाना प्रागपुरा का रहने वाला है।
| मुख्य आंकड़ा | जानकारी |
|---|---|
| कार्रवाई की तारीख | 14 अक्टूबर 2026 |
| बरामद डोडा चूरा | 16 किलो 712 ग्राम |
| जब्त नकद राशि | 1,12,160 रुपये |
| गिरफ्तार आरोपी | धनसीराम जाट (32), निवासी थालोडो की ढाणी, तन बड़नगर |
| मुकदमा संख्या | 458/2026, थाना प्रागपुरा |
| लगाई गई धाराएं | NDPS एक्ट की धारा 8/15 |
| संयुक्त टीम | प्रागपुरा थाना पुलिस + ANTF |
| सुपरविजन | ASP कोटपूतली नाजिम अली खान, CO विराटनगर एम.एन. भरत |
डोडा चूरा आखिर होता क्या है?
डोडा चूरा अफीम के पौधे की भूसी यानी वह अवशेष है जो अफीम निकालने के बाद पौधे के छिलके और डंठलों के रूप में बचता है। देखने में यह मामूली भूसी लगता है, लेकिन इसमें अफीम के अल्कलॉइड मौजूद रहते हैं, जिस वजह से इसे नशे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में अफीम की लाइसेंस वाली खेती होती है, और वहीं से इसका अवैध भटकाव तस्करी की सप्लाई चेन में पहुंचता है।
गांवों में इसे कभी “छोटा नशा” समझने की भूल होती है, जबकि कानून की नजर में यह पूरी तरह प्रतिबंधित मादक पदार्थ है।
NDPS 8/15: डोडा चूरा तस्करी में कितनी सजा
NDPS एक्ट की धारा 8 मादक पदार्थों के उत्पादन, निर्माण, कब्जे, बिक्री, खरीद, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाती है — कानून के बिना इनमें से कोई भी काम करना अपराध है। धारा 15 विशेष रूप से अफीम के पौधे की भूसी (poppy straw) यानी डोडा चूरा से जुड़ी है।
सजा की मात्रा बरामद माल की मात्रा पर निर्भर करती है:
- छोटी मात्रा: 6 महीने तक की कैद या जुर्माना, या दोनों
- व्यावसायिक मात्रा: 10 से 20 साल तक की कठोर कैद और भारी जुर्माना
- बीच की मात्रा: 10 साल तक की कैद और जुर्माना
इस मामले में 16.7 किलो डोडा चूरा बरामद हुआ है — मात्रा के हिसाब से यह कौन सी श्रेणी में आएगा, यह जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट तय करेगी। लेकिन इतना तय है कि नकदी की बरामदगी के साथ यह मामला “वाणिज्यिक इरादे” की दिशा में मजबूत होता दिख रहा है।
ANTF क्या है और क्यों उतारी जाती है मैदान में?
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) राजस्थान पुलिस की वह विशेष इकाई है जो नशा तस्करी के संगठित नेटवर्क को तोड़ने के लिए बनाई गई है। स्थानीय थाने आमतौर पर बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित रहते हैं, जबकि ANTF का काम है सप्लाई चेन को ऊपर तक खंगालना — माल कहां से आया, पैसे कहां गए, कौन-कौन जुड़ा है।
नकद 1.12 लाख रुपये की बरामदगी बताती है कि यह किसी बड़ी कड़ी का हिस्सा हो सकता है।
राजस्थान में हाल के महीनों में ANTF की सक्रियता बढ़ी है — ऑपरेशन मारामन जैसी कार्रवाइयों में फरार इनामी तस्करों को दबोचा गया है, जिनके बारे में आप यहां विस्तार से पढ़ सकते हैं। भीलवाड़ा में CID क्राइम ब्रांच ने चित्तौड़गढ़ हाईवे से अफीम तस्कर को पकड़ा था (पूरी खबर), और कोटा में तो खुद एक पुलिस कांस्टेबल नकदी के साथ तस्करी में लिप्त पाया गया था (यहां पढ़ें)।
आगे की जांच: सप्लाई चेन तक पहुंचेगी पुलिस
पुलिस अब दो सवालों पर काम कर रही है: 16.7 किलो डोडा चूरा धनसीराम तक पहुंचा कहां से, और 1.12 लाख रुपये किन खरीदारों से आए। फोन रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और पूछताछ से कड़ी के अगले नाम सामने आ सकते हैं। आरोपी न्यायिक प्रक्रिया में है और पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
नशा तस्करी की जानकारी या शिकायत के लिए नागरिक राजस्थान पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क विवरण पा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: प्रागपुरा डोडा चूरा तस्करी मामले में कितना माल बरामद हुआ?
उत्तर: प्रागपुरा थाना पुलिस और ANTF की संयुक्त कार्रवाई में 16 किलो 712 ग्राम डोडा चूरा बरामद हुआ है। इसके साथ 1,12,160 रुपये नकद भी जब्त किए गए, जिन्हें बिक्री की रकम बताया गया है।
प्रश्न 2: आरोपी के खिलाफ कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
उत्तर: थाना प्रागपुरा में मुकदमा संख्या 458/2026 दर्ज कर NDPS एक्ट की धारा 8/15 के तहत कार्रवाई की गई है। धारा 15 अफीम की भूसी (डोडा चूरा) से संबंधित अपराधों के लिए है।
प्रश्न 3: डोडा चूरा रखना क्या अपराध है?
उत्तर: हां। बिना लाइसेंस के डोडा चूरा रखना, बेचना या परिवहन करना NDPS एक्ट के तहत अपराध है। मात्रा के आधार पर 6 महीने से 20 साल तक की सजा हो सकती है।
प्रश्न 4: ANTF क्या करती है?
उत्तर: एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स राजस्थान पुलिस की विशेष इकाई है जो नशा तस्करी के संगठित नेटवर्क की जांच करती है — सप्लाई चेन, पैसे के रास्ते और जुड़े लोगों तक पहुंचती है।