अवैध बजरी खनन पर सख्ती: राजस्थान सरकार ने 6 टास्क फोर्स गठित कीं, जोजरी-बांडी-लूनी पर नजर

राजस्थान में अवैध बजरी खनन पर अब सीधी और सख्त निगरानी होगी। राज्य सरकार ने जोजरी, बांडी और लूनी नदी के बहाव वाले क्षेत्रों में बजरी के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए 6 अलग-अलग टास्क फोर्स गठित की हैं। यह फैसला 5 नवंबर को सामने आया; सरकार ने अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस की नीति साफ कर दी है।

अवैध बजरी खनन पर 6 टास्क फोर्स: कहाँ-कहाँ तैनात होंगी टीमें

सरकार ने सिरोही, सोजत सिटी, जालौर, बाड़मेर, जोधपुर और गोटन में अलग-अलग 6 टास्क फोर्स बनाई हैं। हर टीम को अपना एक तय क्षेत्र सौंपा गया है, जहां वह खनन पट्टाधारकों की नियमित जांच करेगी और उल्लंघन मिलने पर मौके पर कार्रवाई करेगी।

टास्क फोर्स का क्षेत्र निगरानी का दायरा
सिरोही जोजरी-बांडी-लूनी बहाव क्षेत्र के पट्टे
सोजत सिटी नदी क्षेत्र में बजरी खनन और परिवहन
जालौर पर्यावरण क्लीयरेंस और खनन गहराई की जांच
बाड़मेर नदी किनारों से दूरी और भंडारण पर नजर
जोधपुर जोजरी नदी क्षेत्र में अवैध गतिविधियां
गोटन पट्टाधारकों की नियमित जांच और रिपोर्ट

हर टास्क फोर्स का प्रभारी सहायक खनि अभियंता स्तर का अधिकारी होगा। उसके साथ एक भूवैज्ञानिक, एक खनि कार्यदेशक और एक सर्वेयर भी टीम में शामिल रहेंगे। इन सभी टास्क फोर्स के बीच तालमेल के लिए मुख्यालय में अतिरिक्त निदेशक (सतर्कता) को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

अवैध बजरी खनन रोकने के लिए पट्टाधारकों पर क्या-क्या पाबंदियां लागू होंगी

टास्क फोर्स सिर्फ गश्त नहीं करेंगी, उनके पास जांच के साफ-साफ बिंदु हैं। पहला बिंदु है पर्यावरण क्लीयरेंस — टीम यह देखेगी कि पट्टाधारक के पास जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी है या नहीं और शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं। दूसरा बिंदु है खनन की गहराई — नदी क्षेत्र में अधिकतम 3 मीटर तक ही खनन हो सकता है, इससे ज्यादा पर कार्रवाई होगी।

तीसरा बिंदु नदी के किनारों से दूरी का है। नियमों के अनुसार नदी के किनारों से तय दूरी छोड़कर ही खनन करना होता है। चौथा बिंदु पानी की सतह से जुड़ा है। पानी की सतह से नीचे बजरी का खनन किया जा रहा है या नहीं, इसकी भी नियमित जांच होगी और टीमों को अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को देनी होगी।

अवैध बजरी खनन पर जीरो टॉलरेंस: सरकार ने क्या कहा

अतिरिक्त मुख्य सचिव (खान एवं पेट्रोलियम) अपर्णा अरोड़ा ने बताया कि सरकार अवैध खनन के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने टास्क फोर्स को निर्देश दिए हैं कि निगरानी व्यवस्था मजबूत रखें, अवैध गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखें और उल्लंघन मिलने पर बिना लापरवाही के कार्रवाई करें। उन्होंने साफ किया कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जोजरी नदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में अवैध खनन के पट्टों पर सरकार को फटकार लग चुकी है, इसलिए नई टास्क फोर्स को अदालत के निर्देशों की पालना से भी जोड़ा गया है।

अवैध बजरी खनन पर अदालतों के निर्देश

टास्क फोर्स को हाईलेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी, सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित कराने को कहा गया है। अवैध खनन पर कार्रवाई के लिए भारत सरकार की ‘एनफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइंस फॉर सैंड माइनिंग-2020’ के अनुसार काम करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

कानूनी आधार की बात करें तो टास्क फोर्स को खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 23बी और राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम-2017 के तहत कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। यानी अब जांच करने वाली टीम के पास सिर्फ रिपोर्ट लिखने का काम नहीं होगा, वह कानून के तहत सीधी कार्रवाई भी कर सकेगी।

अवैध बजरी खनन से नदियों को क्या नुकसान

नदी के बहाव वाले इलाके में तय सीमा से ज्यादा गहरा खनन नदी की धारा को बदल देता है। किनारों के पास खनन से कटाव बढ़ता है और बाढ़ के समय पानी गांवों की तरफ मुड़ सकता है। पानी की सतह से नीचे खनन करने पर भूजल स्तर भी नीचे जाता है, जिससे आसपास के गांवों में कुओं और हैंडपंपों का पानी कम हो जाता है। भीलवाड़ा में पुलिस ने अवैध खनन की रोकथाम में अब तक 845 एफआईआर दर्ज की हैं, जो बताता है कि यह समस्या सिर्फ एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है।

अवैध बजरी खनन: आम लोगों के लिए क्या बदलेगा

टास्क फोर्स के गठन के बाद नदी क्षेत्रों में खनन की जांच अब कभी-कभार होने वाली कार्रवाई नहीं रहेगी, बल्कि नियमित निगरानी का हिस्सा बन जाएगी। टीमों को रिपोर्ट देनी होगी, इसलिए हर क्षेत्र की स्थिति का रिकॉर्ड मुख्यालय तक पहुंचेगा। आम लोगों के लिए इसका सीधा मतलब है कि नदियों के किनारों पर होने वाले अवैध खनन की शिकायत पर अब कार्रवाई की एक तय व्यवस्था होगी, और वैध पट्टाधारकों को भी 3 मीटर की गहराई, किनारों से दूरी और पानी की सतह से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान में अवैध बजरी खनन पर कितनी टास्क फोर्स गठित की गई हैं?

6 टास्क फोर्स गठित की हैं — सिरोही, सोजत सिटी, जालौर, बाड़मेर, जोधपुर और गोटन में तैनात हैं।

अवैध बजरी खनन पर टास्क फोर्स किन नदियों पर नजर रखेगी?

टास्क फोर्स जोजरी, बांडी और लूनी नदी के बहाव वाले क्षेत्रों में बजरी के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर निगरानी रखेगी।

बजरी खनन में अधिकतम कितनी गहराई तक खनन किया जा सकता है?

नियमों के अनुसार नदी क्षेत्र में अधिकतम 3 मीटर तक ही खनन किया जा सकता है। इससे ज्यादा गहराई पर कार्रवाई होगी।

अवैध बजरी खनन पर किस कानून के तहत कार्रवाई होगी?

खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 23बी और राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम-2017 के तहत कार्रवाई होगी। साथ ही भारत सरकार की सैंड माइनिंग गाइडलाइन-2020 का भी पालन होगा।

यह सख्ती सिर्फ एक घोषणा नहीं है — इसके पीछे 6 टीमों की तैनाती, जांच के साफ बिंदु और अदालतों के निर्देशों की पालना का पूरा ढांचा है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि नियमित जांच से नदी क्षेत्रों में अवैध खनन पर कितना असर पड़ता है।

जोजरी नदी पर पहले भी अदालत की सख्ती सामने आ चुकी है — इस बारे में हमारी पिछली खबर जोजरी नदी पर सुप्रीम कोर्ट की CBI चेतावनी पढ़ें। नदी प्रदूषण पर विस्तार से जानने के लिए जोजरी नदी प्रदूषण मामला भी देखें। अवैध खनन की ताजा खबरों के लिए बजरी खनन से जुड़ी खबरें देखें। स्रोत: ईटीवी भारत राजस्थान

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