दिल्ली रैली से दूरी पड़ी भारी: राजस्थान युवा कांग्रेस के 43 पदाधिकारी निलंबित, 12 जिलाध्यक्ष भी बाहर

राजस्थान युवा कांग्रेस में बुधवार शाम को हुई एक बड़ी कार्रवाई ने संगठन के भीतर हलचल मचा दी है। युवा कांग्रेस 43 निलंबित पदाधिकारियों पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए संगठन ने साफ कर दिया है कि दिल्ली में हुई बड़ी रैली से दूरी बनाना अब हल्के में नहीं लिया जाएगा। निलंबित किए गए 43 नेताओं में 12 जिलाध्यक्ष और 31 प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी शामिल हैं। खास बात यह है कि बीकानेर जिले के ग्रामीण और शहर, दोनों जिलाध्यक्षों पर एक साथ गाज गिरी है, जिससे यह कार्रवाई और भी चर्चा में आ गई है।

युवा कांग्रेस 43 निलंबित: आदेश में क्या-क्या लिखा है

निलंबन का आदेश 5 नवंबर को जारी हुआ। आदेश पर भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान प्रभारी विकास चिकारा तथा सचिव व सह-प्रभारी ज्ञानेश शुक्ला के हस्ताक्षर हैं। आदेश में कहा गया है कि दिल्ली में आयोजित रामलीला मार्च में इन पदाधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया है। इसी आधार पर भारतीय युवा कांग्रेस के नेतृत्व ने सभी को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक पद से निलंबित करने का फैसला किया है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो कार्रवाई का दायरा काफी बड़ा है। कुल 43 में 12 जिलाध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, 10 महासचिव और 20 प्रदेश सचिव शामिल हैं। निलंबित नेता युवा कांग्रेस की 26 संगठनात्मक जिला इकाइयों से जुड़े हैं। सबसे ज्यादा चार पदाधिकारी जोधपुर ग्रामीण से हैं। जालोर, ब्यावर और बारां से तीन-तीन पर कार्रवाई हुई है, यानी इन तीनों जिलों में जिलाध्यक्ष के साथ दो-दो प्रदेश पदाधिकारी भी निलंबित हुए हैं।

विवरण संख्या
कुल निलंबित पदाधिकारी 43
जिलाध्यक्ष 12
प्रदेश पदाधिकारी 31
प्रदेश सचिव 20
महासचिव 10
उपाध्यक्ष 1
प्रभावित जिला इकाइयां 26

प्रदेश प्रभारी विकास चिकारा के अनुसार, राष्ट्रीय नेतृत्व ने रैली में शामिल होने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने भी जयपुर में बैठक कर पदाधिकारियों को दिल्ली पहुंचने के लिए कहा था। इसके बावजूद संबंधित पदाधिकारी रैली में शामिल नहीं हुए और कोई उचित कारण भी नहीं बताया। इसी आधार पर राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।

युवा कांग्रेस 43 निलंबित: 12 जिलाध्यक्षों की पूरी सूची

जिलाध्यक्षों पर हुई कार्रवाई इस फैसले का सबसे अहम हिस्सा है, क्योंकि जिला इकाई संगठन की रीढ़ मानी जाती है। निलंबित 12 जिलाध्यक्षों के नाम और जिले इस प्रकार हैं: राजसमंद से चिराग पालीवाल, जालोर से विकास मंजू, बीकानेर से राजेश गोदारा, बारां से रामेश्वर बैरवा, बांसवाड़ा से पृथ्वीराज मालवीय, डूंगरपुर से अरविंद यादव, बीकानेर शहर से रामदयाल बेनीवाल, प्रतापगढ़ से मोहम्मद शकील, बालोतरा से सुरेश माली, डीग से हसन खान, चूरू से आसिफ खान और ब्यावर से प्रवीण सिखवाल।

इनमें बीकानेर का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है। एक ही जिले की ग्रामीण और शहर, दोनों इकाइयों के अध्यक्षों पर एक साथ कार्रवाई होने से संगठन में हलचल बढ़ गई है। उदयपुर संभाग के चार जिलों — राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ — के अध्यक्ष भी निलंबित हुए हैं। सात जिलों में जिलाध्यक्ष के साथ प्रदेश पदाधिकारी भी निलंबित हुए हैं।

जिलाध्यक्षों के अलावा जिन प्रदेश पदाधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश चंद मीणा, सद्दाम हुसैन, फैजान हसन कुरैशी, जफर हुसैन मीर, सलमा पिनारा, रामफूल धाकड़, गणेश देवासी, ठाकुर बिश्नोई, मंजुला देसाई, अर्जुन सिंह और दीपक मेघवाल सहित अन्य शामिल हैं।

दिल्ली रैली से गैरहाजिरी क्यों बनी बड़ी वजह

पूरे मामले की जड़ 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ रैली है। इस रैली में अधिक से अधिक संख्या में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी प्रदेश दौरे के दौरान नेताओं को रैली में भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

रैली से ठीक पहले जयपुर में भी तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। INDIA गठबंधन की 1 नवंबर रैली को लेकर जयपुर में हुई बैठक में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया था। ऐसे में जिन पदाधिकारियों को भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उनका दिल्ली न पहुंचना संगठन को नागवार गुजरा।

नई टीम के ऐलान के अगले ही दिन आया आदेश

इस कार्रवाई का समय भी उतना ही अहम है, जितनी खुद कार्रवाई। राजस्थान युवा कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और जिलाध्यक्षों के चुनाव पिछले महीने ही संपन्न हुए थे। 4 नवंबर को अभिषेक चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। निलंबन का आदेश नई टीम की घोषणा के अगले ही दिन आया है। ऐसे में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों पर हुई इस कार्रवाई से संगठन के भीतर हलचल मच गई है। पंचायत चुनावों के बीच संगठन की यह आंतरिक कार्रवाई राजस्थान में चल रहे पंचायत चुनावों की सरगर्मियों के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है।

संगठन पर क्या असर पड़ेगा और आगे क्या होगा

यह कार्रवाई सिर्फ निलंबन तक सीमित नहीं दिखती। आदेश में ‘अगले आदेश तक’ शब्दों का इस्तेमाल हुआ है, यानी निलंबित पदाधिकारियों का भविष्य अब संगठन की अगली समीक्षा पर टिका है। अगर कोई पदाधिकारी अपनी अनुपस्थिति का उचित कारण पेश करता है, तो उस पर अलग से विचार हो सकता है। लेकिन फिलहाल सभी 43 नेता अपने पदों से बाहर हैं। इस कार्रवाई से युवा कांग्रेस के भीतर साफ संदेश गया है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि निलंबित जिलों में संगठन का काम कौन संभालता है और क्या कुछ पदाधिकारियों को बहाल किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

स्रोत: पत्रिका की विस्तृत रिपोर्ट

राजस्थान युवा कांग्रेस के कितने पदाधिकारी निलंबित किए गए हैं?

कुल 43 पदाधिकारी — 12 जिलाध्यक्ष और 31 प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी, जिनमें एक उपाध्यक्ष, 10 महासचिव और 20 प्रदेश सचिव शामिल हैं।

निलंबन की वजह क्या है?

1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ रैली में अनुपस्थिति। संगठन का कहना है कि रैली में शामिल होने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, फिर भी ये पदाधिकारी नहीं पहुंचे और कोई उचित कारण भी नहीं बताया।

निलंबन का आदेश किसने जारी किया?

आदेश भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान प्रभारी विकास चिकारा तथा सचिव व सह-प्रभारी ज्ञानेश शुक्ला की ओर से जारी किया गया है।

क्या निलंबित पदाधिकारी वापस बहाल हो सकते हैं?

आदेश में ‘अगले आदेश तक’ निलंबन लिखा है, यानी यह स्थायी बर्खास्तगी नहीं है। उचित कारण पेश करने पर संगठन इस पर अलग से विचार कर सकता है।

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