सोचिए, कॉलेज के क्लासरूम से निकलकर कोई लड़का या लड़की दस्ताने पहनकर रिंग में उतरता है और तीन दिन तक अपने से बेहतर प्रतिद्वंद्वियों से लड़ता है। राजस्थान के महाविद्यालयीन खेल कैलेंडर की सबसे धांसू बॉक्सिंग प्रतियोगिता इस हफ्ते बिजयनगर में अपने अंजाम तक पहुंची — 39वीं अंतर-महाविद्यालयीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026-27 का तीन दिवसीय आयोजन 15 अक्टूबर को संपन्न हुआ, जिसमें 20 से ज्यादा भार वर्गों में स्वर्ण पदक जीते गए और दो नाम सबसे ऊपर चमके: लीना और गौरव। महिला वर्ग में सोफिया कॉलेज, अजमेर की लीना तथा पुरुष वर्ग में एसपीसी राजकीय महाविद्यालय, अजमेर के गौरव को सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का खिताब दिया गया।
यह प्रतियोगिता महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के तत्वावधान में श्री प्राज्ञ महाविद्यालय, विजयनगर में आयोजित हुई थी। महिला वर्ग की चैंपियनशिप सोफिया कॉलेज, अजमेर के नाम रही, जबकि पुरुष वर्ग में एसपीसी राजकीय महाविद्यालय, अजमेर ने दबदबा बनाया। आयोजन 13 अक्टूबर को शुरू हुआ था और समापन समारोह में विजेताओं के साथ तकनीकी पैनल और निर्णायक मंडल का भी सम्मान किया गया।
सबसे पहले वो नाम जिन्होंने चैंपियनशिप अपने नाम की
लीना (सोफिया कॉलेज, अजमेर) ने 45-48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता और पूरे आयोजन की सर्वश्रेष्ठ महिला बॉक्सर चुनी गईं। यह खिताब केवल एक मैच जीतने पर नहीं मिलता — पूरे तीन दिन की निरंतरता, तकनीकी कौशल और रिंग में संयम इस सम्मान का आधार होता है।
पुरुष वर्ग में गौरव (एसपीसी राजकीय महाविद्यालय, अजमेर) ने 50-55 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक के साथ सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का खिताब हासिल किया। दोनों बॉक्सर अब अपने-अपने महाविद्यालय की पहचान बन गए हैं, और इस प्रदर्शन के बाद राज्य स्तरीय चयन की दौड़ में मजबूत दावेदार हैं।
पदकवीरों की पूरी सूची: कौन-किस भार वर्ग में जीता
तीन दिनों में महिला और पुरुष वर्ग मिलाकर 21 भार वर्गों में स्वर्ण पदक बांटे गए। यहाँ मुकम्मल सूची:
| भार वर्ग | महिला वर्ग विजेता | पुरुष वर्ग विजेता |
|---|---|---|
| 45-48 / 47-50 किग्रा | लीना (सोफिया कॉलेज) | कुमार दर्शन (वीपीटीसी, भीलवाड़ा) |
| 48-51 / 50-55 किग्रा | रोशनी दिवानी (एसपीसी जी.सी.) | गौरव (एसपीसी जी.सी.) — सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर |
| 51-54 / 55-60 किग्रा | प्रियंशी (एमएलवी, भीलवाड़ा) | करण राज (एसपीसी जी.सी.) |
| 54-57 / 60-65 किग्रा | माही जांगिड़ (डीएवी) | गोविंद (एसपीसी जी.सी.) |
| 57-60 / 65-70 किग्रा | लक्ष्मी (सोफिया कॉलेज) | मुकुल (डीएवी) |
| 60-65 / 70-75 किग्रा | माविस अली (एसपीसी जी.सी.) | दिवेश दायमा (एसडीपीसी, केकड़ी) |
| 65-70 / 75-80 किग्रा | किरण (सोफिया कॉलेज) | अभिरवर्धन (डीएवी) |
| 70-75 / 80-85 किग्रा | कंगना (डीएवी) | अनीश मलिक (डीएवी) |
| 75-80 / 85-90 किग्रा | शैलजा मालव (सोफिया कॉलेज) | दीपांशु (डीएवी) |
| 80+ / 90+ किग्रा | तोषा (डीएवी) | भावेश (एसपीसी जी.सी.) |
इस सूची में एक बात साफ दिखती है — अजमेर के महाविद्यालयों (सोफिया कॉलेज, एसपीसी जी.सी., डीएवी) ने पदक तालिका पर कब्जा जमाया, जबकि भीलवाड़ा और केकड़ी के बॉक्सर्स ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
39वां संस्करण: विश्वविद्यालय स्तर की बॉक्सिंग कैसे काम करती है
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर हर साल अपने संबद्ध महाविद्यालयों के लिए अंतर-महाविद्यालयीय प्रतियोगिताएं कराता है। बॉक्सिंग की यह 39वीं प्रतियोगिता इसी श्रृंखला की कड़ी है। इसका मकसद सिर्फ चैंपियन चुनना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय टीम के लिए प्रतिभाओं की पहचान करना है — यहाँ के पदकवीर आगे विश्वविद्यालय टीम में जगह बनाकर अंतर-विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
तीन दिनों के आयोजन में लीग-कम-नॉकआउट पद्धति पर मुकाबले हुए। बॉक्सिंग में हर बाउट में जज तय मापदंडों — साफ-सुथरे पंच, रिंग नियंत्रण, आक्रमण और रक्षा के संतुलन — पर अंक देते हैं। यही वजह है कि निर्णायक मंडल की भूमिका इन प्रतियोगिताओं में सबसे अहम होती है।
उद्घाटन और समापन: क्या संदेश दिया गया
प्रतियोगिता का शुभारंभ 13 अक्टूबर को मुख्य अतिथि डॉ. नरेंद्र कुमार निर्वाण की उपस्थिति में हुआ। डॉ. निर्वाण बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष, राजस्थान बॉक्सिंग एसोसिएशन के महासचिव और राजस्थान ओलंपिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को निरंतर अभ्यास, कठिन परिश्रम, अनुशासन, आत्मविश्वास और समर्पण का संदेश दिया और खेल शपथ दिलवाई — जिसमें खिलाड़ियों ने ईमानदारी, अनुशासन और खेल नियमों के पालन का संकल्प लिया।
उद्घाटन में श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति के कोषाध्यक्ष अजीत लोढ़ा, महाविद्यालय के कार्याध्यक्ष ज्ञान चंद कोठारी, कोषाध्यक्ष अंकुश नाहर, प्राज्ञ पब्लिक स्कूल के सचिव नरेंद्र बड़ोला और पुखराज तातेड मौजूद रहे। समारोह में प्राज्ञ ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट के निदेशक डॉ. नवल सिंह जैन, प्राचार्या डॉ. दुर्गा कंवर मेवाड़ा और आयोजन सचिव सत्यजीत जेटली भी उपस्थित थे।
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के ऑब्जर्वर रामकुमार चौधरी तथा तकनीकी निर्णायकों — सुनील चौधरी, कपिल कुमार, जसवंत सिंह भाटी, अमिश वर्मा, आशीष निर्वाण, जितेंद्र कुमार और सुश्री प्रीति भाटी — को स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
यहाँ से आगे: इन बॉक्सर्स का रास्ता कहाँ जाता है
अंतर-महाविद्यालयीय चैंपियनशिप जीतना अंत नहीं, शुरुआत है। यहाँ के पदकवीर विश्वविद्यालय टीम में जगह बनाकर अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिता, फिर राजस्थान बॉक्सिंग एसोसिएशन की राज्य चैंपियनशिप और वहाँ से राष्ट्रीय मंच (नेशनल चैंपियनशिप, खेलो इंडिया) तक जा सकते हैं।
लीना और गौरव जैसे सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर खिताब विजेताओं पर अब कोचों और चयनकर्ताओं की नजर रहेगी। अजमेर संभाग वैसे भी राजस्थान में बॉक्सिंग का गढ़ माना जाता रहा है — सोफिया कॉलेज और एसपीसी जी.सी. जैसी संस्थाओं से निकलने वाले बॉक्सर पहले भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चमके हैं।
अगर आप या आपका बच्चा बॉक्सिंग शुरू करना चाहे
अपने जिले की बॉक्सिंग एसोसिएशन या नजदीकी खेल अकादमी से संपर्क करें; अधिकांश जिलों में युवा कार्यक्रम चलते हैं। हेडगार्ड, माउथगार्ड और क्वालिटी ग्लव्ज अनिवार्य हैं, और वजन प्रबंधन हमेशा कोच की निगरानी में करें। विश्वविद्यालय खेल कैलेंडर पढ़ाई के सत्र के हिसाब से बना होता है, इसलिए छात्र खिलाड़ी दोनों साथ संभाल सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q: 39वीं अंतर-महाविद्यालयीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप कब और कहाँ हुई? A: 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक श्री प्राज्ञ महाविद्यालय, विजयनगर (बिजयनगर) में, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के तत्वावधान में।
Q: महिला और पुरुष वर्ग में कौन चैंपियन बना? A: महिला वर्ग में सोफिया कॉलेज, अजमेर और पुरुष वर्ग में एसपीसी राजकीय महाविद्यालय, अजमेर ने चैंपियनशिप जीती।
Q: सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर का खिताब किसे मिला? A: महिला वर्ग में लीना (सोफिया कॉलेज, अजमेर) और पुरुष वर्ग में गौरव (एसपीसी जी.सी., अजमेर) को यह सम्मान मिला।
Q: कुल कितने भार वर्गों में मुकाबले हुए? A: महिला वर्ग में 10 और पुरुष वर्ग में 11 भार वर्गों में स्वर्ण पदक दिए गए।
बिजयनगर की यह चैंपियनशिप एक बार फिर साबित करती है कि राजस्थान के कॉलेजों में खेल प्रतिभा की कोई कमी नहीं — जरूरत है बस सही मंच और निरंतर मौके की।