राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत का यह मामला न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। जिस आधिकारिक वेबसाइट पर लोग अदालत के फैसलों को सबसे भरोसेमंद मानकर देखते हैं, उसी पर एक मादक पदार्थ तस्करी के आरोपी के तीन फर्जी जमानत आदेश अपलोड कर दिए गए। रजिस्ट्रेशन नंबरों की गड़बड़ी ने खेल की पोल खोल दी। अब जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में केस दर्ज है, हाईकोर्ट प्रशासन ने न्यायिक शाखा से रिपोर्ट मांगी है और आरोपी फरार है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि फर्जी आदेश एक नहीं, तीन-तीन तारीखों — 12, 15 और 26 अक्टूबर — पर वेबसाइट पर चढ़ाए गए। एक आदेश में तो यह लिखा था कि आरोपी की अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदल दिया गया है। यानी कागजों पर आरोपी आजाद हो चुका था, जबकि अदालत ने ऐसा कोई आदेश दिया ही नहीं था।
राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत: नंबरों की गड़बड़ी ने कैसे खोला राज
इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश एक साधारण सी संख्या से हुआ। हाईकोर्ट के एक कर्मचारी के मुताबिक मंगलवार शाम तक वर्ष 2026 में आपराधिक जमानत अर्जियों के रजिस्ट्रेशन नंबर सिर्फ 15,047 तक पहुंचे थे। लेकिन 26 अक्टूबर के कथित आदेश पर 15,786 नंबर दर्ज था, और 15 अक्टूबर वाले आदेश पर तो 18,756 नंबर लिखा था। यानी वे नंबर अभी जारी ही नहीं हुए थे, फिर भी आदेशों पर छपे हुए थे।
गहराई से जांच करने पर पता चला कि जिन याचिका संख्याओं का हवाला दिया गया था, वे संबंधित तारीखों पर अदालत में सूचीबद्ध ही नहीं थीं। जिस न्यायाधीश के नाम से 26 अक्टूबर का आदेश जारी दिखाया गया था, वे उस दिन किसी दूसरी खंडपीठ में सुनवाई कर रहे थे। रजिस्ट्रार कुलदीप राव को जानकारी मिलते ही उन्होंने प्रशासन को अलर्ट किया और मामला मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में पहुंचा।
कौन है आरोपी कुलविंद्र सिंह और क्या है NDPS मामला
आरोपी पंजाब के मोगा निवासी 53 वर्षीय कुलविंद्र सिंह पनेसर है। उसके खिलाफ श्रीगंगानगर जिले के राजियासर थाने में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8/18, 25 और 29 के तहत मामला दर्ज है। आरोप है कि उसके पास से 8 किलो 61 ग्राम अफीम बरामद हुई थी। गिरफ्तारी के बाद वह जेल में बंद था।
आरोपी को 6 मई को अंतरिम जमानत मिली थी। उसके वकील कैलाश खिलेरिया के मुताबिक 30 दिन की अंतरिम जमानत की अवधि खत्म होने के बाद आरोपी ने सरेंडर नहीं किया, इसलिए उन्होंने नियमित जमानत की अर्जी पर पैरवी नहीं की। वकील के अनुसार अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद से ही आरोपी फरार है। आरोपी का बेटा मनप्रीत सिंह कनाडा से आया था और एनओसी लेकर केस की फाइल वकील से ले गया था।
तीनों फर्जी आदेश: तारीख, याचिका संख्या और गड़बड़ी
राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत प्रकरण में सामने आए तीनों आदेशों का ब्योरा इस प्रकार है:
| तारीख | याचिका संख्या | आदेश में क्या लिखा था | पकड़ी गई गड़बड़ी |
|---|---|---|---|
| 12 अक्टूबर 2026 | 2755-2026 | जमानत से जुड़ा आदेश वेबसाइट पर मिला | मामला उस तारीख पर सूचीबद्ध ही नहीं था |
| 15 अक्टूबर 2026 | 18756-2026 | नियमित जमानत अर्जी ‘नॉट प्रेस्ड’ आधार पर निस्तारित बताई गई | रजिस्ट्रेशन नंबर 18,756, जबकि नंबर सिर्फ 15,047 तक पहुंचे थे |
| 26 अक्टूबर 2026 | 15786-2026 | अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदलने की बात | न्यायाधीश दूसरी खंडपीठ में थे; नंबर भी जारी नहीं हुआ था |
राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत: जांच में क्या सामने आया
बुधवार देर रात करीब दो बजे जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में केस दर्ज हुआ। शिकायत हाईकोर्ट के पंजीयक (न्यायिक कार्य) नरेन्द्र कुमार ने दर्ज कराई है। राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत मामले में आरोपी पर आपराधिक षड्यंत्र और उच्च न्यायालय के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से अनधिकृत छेड़छाड़ का आरोप है।
जोधपुर पुलिस कमिश्नर अंशुमान भौमिया के मुताबिक तीनों कथित आदेश अलग-अलग तारीखों पर वेबसाइट पर अपलोड किए गए। जांच विवेक विहार थाने के अधिकारी को सौंपी गई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि आदेश किसने अपलोड किए और इसमें हाईकोर्ट के किसी कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं है। जोधपुर स्थित उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ से संबंधित मूल पत्रावली भी गायब है, इसलिए कागजी रिकॉर्ड की गड़बड़ी भी जांच के दायरे में है।
राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत: क्या आरोपी जेल से बाहर आ चुका है?
इसका आधिकारिक जवाब अभी साफ नहीं है। आशंका है कि फर्जी आदेश के सहारे आरोपी सूरतगढ़ जेल से रिहा होकर बाहर आ चुका हो, या देश छोड़कर जा चुका हो। लेकिन पुलिस ने अभी न रिहाई की पुष्टि की है, न देश छोड़ने की। पुलिस के अनुसार आरोपी फरार है और तलाश जारी है।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है
राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर फर्जी आदेश अपलोड हो सकते हैं, तो आम आदमी किसी आदेश की असलियत कैसे जांचे? किसी भी जमानत या अदालती आदेश को अंतिम मानने से पहले संबंधित अदालत की रजिस्ट्री से सत्यापन कराएं, और वेबसाइट पर दिख रहे आदेश को कोर्ट की प्रमाणित प्रति से मिलाकर देखें। आधिकारिक जानकारी के लिए राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
अदालत के हालिया फैसलों में एसआई भर्ती 2016 मेरिट सूची और ओपन एयर कैंप फैसला भी चर्चा में रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत आदेश कैसे पकड़े गए?
रजिस्ट्रेशन नंबरों की गड़बड़ी से। मंगलवार शाम तक 2026 में जमानत अर्जियों के नंबर सिर्फ 15,047 तक पहुंचे थे, जबकि फर्जी आदेशों पर 15,786 और 18,756 नंबर थे। जिन न्यायाधीश के नाम से आदेश था, वे उस दिन दूसरी खंडपीठ में सुनवाई कर रहे थे।
आरोपी कुलविंद्र सिंह कौन है और किस मामले में बंद था?
वह पंजाब के मोगा का रहने वाला 53 वर्षीय व्यक्ति है। श्रीगंगानगर के राजियासर थाने में उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है, जिसमें 8 किलो 61 ग्राम अफीम बरामद होने का आरोप है।
क्या आरोपी जेल से बाहर आ गया है?
राजस्थान हाईकोर्ट फर्जी जमानत मामले में आरोपी के बाहर आने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आशंका है कि फर्जी आदेश के सहारे वह सूरतगढ़ जेल से बाहर आ गया हो, लेकिन पुलिस ने पुष्टि नहीं की है। आरोपी फरार है।
कोर्ट के किसी आदेश की असलियत कैसे जांचें?
अदालत की रजिस्ट्री से आदेश की प्रमाणित प्रति लेकर मिलान करें। सिर्फ वेबसाइट पर दिख रहे आदेश को अंतिम सच न मानें।