राजस्थान में पेयजल संकट: 30% तक घट सकता है पानी, 41 जिलों में कंटिजेंसी प्लान — कलक्टरों को ₹75 लाख का अधिकार

राजस्थान के लाखों घरों के लिए पानी का डर अब हकीकत बनने की कगार पर है — कमजोर मानसून के बाद मौजूदा जलस्रोतों से मिलने वाला पेयजल 30 प्रतिशत तक घट सकता है। इसी आशंका पर जलदाय विभाग ने राजस्थान पेयजल कंटिजेंसी प्लान तेज कर दिया है: हर जिले की अलग आपात योजना बनेगी, और कलक्टरों को अक्टूबर–दिसंबर तक ₹75 लाख तक के आपात पेयजल कार्यों का अधिकार मिला है।

यह सिर्फ चेतावनी नहीं, आने वाले संकट से निपटने का सरकार की ओर से औपचारिक खाका है। 41 में से 26 जिलों में इस बार बारिश सामान्य से कम रही — यानी प्रदेश के करीब 63 प्रतिशत हिस्से में जलसंकट की आशंका गहरा रही है। जलदाय विभाग के मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी के अनुसार सभी जिलों से जलस्रोतों की स्थिति की रिपोर्ट मंगाई जा रही है, जिसके आधार पर सबसे ज्यादा जोखिम वाले इलाके चिह्नित होंगे।

राजस्थान पेयजल कंटिजेंसी प्लान में कलक्टरों को ₹75 लाख का आपात अधिकार

इस योजना की सबसे अहम बात है जिला कलक्टरों को मिला आपात अधिकार। अब पेयजल संकट की स्थिति में कलक्टर ग्रामीण और शहरी — दोनों क्षेत्रों के लिए जरूरी कार्यों के प्रस्ताव सीधे संबंधित अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं को भेज सकेंगे। स्वीकृति आईएफएमएस 3.0 मॉड्यूल के जरिए ऑनलाइन जारी होगी, यानी फाइलों के चक्कर में समय बर्बाद नहीं होगा।

खराब पंप-मोटर बदलना, सूखे ट्यूबवेल की जगह नया जलस्रोत और पुरानी पाइपलाइनों की मरम्मत — इन जरूरी कामों को पहली प्राथमिकता मिलेगी। सभी 41 जिले पूरी सीमा इस्तेमाल करें तो तीन महीनों में कुल ₹30.75 करोड़ तक खर्च हो सकता है।

राजस्थान पेयजल कंटिजेंसी प्लान के पीछे के आंकड़े: 41 में से 26 जिले चिंता में

इस बार का मानसून प्रदेश के बड़े हिस्से को निराश कर गया। भारतीय मौसम विभाग की मानसून 2026 की फाइनल रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 12.6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई — 2015 के बाद का सबसे सूखा मानसून सीजन। अक्टूबर से दिसंबर तक भी मौसम के सूखा रहने का अनुमान है, यानी निकट भविष्य में राहत की उम्मीद कम है।

विवरण आंकड़ा
कम वर्षा वाले जिले 14
औसत से कम वर्षा वाले जिले 12
सामान्य वर्षा वाले जिले 15
पेयजल घटने की आशंका 30% तक
हर जिले में आपात कार्यों की सीमा (अक्टूबर–दिसंबर) ₹75 लाख
41 जिलों में कुल संभावित खर्च ₹30.75 करोड़

जिन 26 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही, वहां भूजल स्तर और सतही जलस्रोतों — दोनों पर दबाव बढ़ रहा है। यही वजह है कि सरकार ने संकट गहराने से पहले ही जिलेवार कंटिजेंसी प्लान बनाने का फैसला किया है।

प्लान में क्या होगा: ट्यूबवेल से लेकर टैंकर तक

राजस्थान पेयजल कंटिजेंसी प्लान में जलस्रोतों की मौजूदा स्थिति, भूजल की उपलब्धता, ट्यूबवेल और खुले कुओं की हालत, तथा वैकल्पिक जलस्रोतों की संभावनाओं का पूरा आकलन किया जा रहा है। जिलों से आने वाली रिपोर्ट के आधार पर वे इलाके चिह्नित किए जाएंगे, जहां जलापूर्ति बिगड़ने की आशंका सबसे ज्यादा है।

मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी के अनुसार नए ट्यूबवेल, पंप-मोटर बदलाव और पाइपलाइन मरम्मत के कार्य चिह्नित होंगे; कमी वाले क्षेत्रों में टैंकरों से जलापूर्ति के प्रस्ताव भी बन सकेंगे। पहले की तैयारियों में सरकार 650 टैंकर वाहनों और 3200 कर्मचारियों को गांव-गांव तैनात करने का फैसला ले चुकी है।

राहत की बात यह है कि कोटा, झालावाड़, डीग और बांसवाड़ा में स्थिति फिलहाल बेहतर बताई जा रही है। साथ ही सिंचाई के लिए पानी के आवंटन और नहरों के संचालन की नई व्यवस्था की भी योजना है, ताकि पेयजल और सिंचाई — दोनों जरूरतों में संतुलन बना रहे।

सियासत भी गरमाई: गहलोत की मांग और सरकार की तैयारी

कम बारिश और संभावित अकाल को लेकर प्रदेश की सियासत पहले से गरमाई हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 4 अक्टूबर को करीब 10 साल का सबसे बड़ा अकाल बताते हुए सरकार से कंटिंजेंसी प्लान बनाने की मांग की थी। 8 अक्टूबर को उन्होंने तुरंत सूखा घोषित करने और चारा डिपो व पशु शिविर खोलने की मांग उठाई, और जैसलमेर दौरे में चारे के दाम ₹25 किलो तक पहुंचने का मुद्दा उठाया था।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 30 सितंबर को बाड़मेर में अकाल राहत की घोषणाएं कर चुके हैं — अब राजस्थान पेयजल कंटिजेंसी प्लान उसी कड़ी की अगली बड़ी तैयारी है। सूखा संकट पर पहले की राहत तैयारियां यहां पढ़ें।

आपके घर के नल पर क्या असर पड़ेगा

भूजल गिरने वाले इलाकों में अगले महीनों में सप्लाई के घंटे घट सकते हैं या वैकल्पिक दिनों में पानी मिल सकता है। जयपुर में दिवाली के बाद बीसलपुर से सप्लाई कटौती की तैयारी पहले से है।

ऐसे में घर स्तर पर पानी की बचत सबसे बड़ा हथियार है — टपकते नलों की तुरंत मरम्मत करवाएं, RO के बेकार पानी को पौधों या सफाई में इस्तेमाल करें। अपने इलाके में पेयजल की शिकायत होने पर जलदाय विभाग या जिला प्रशासन को तुरंत सूचित करें; कलक्टरों को मिले आपात अधिकार का मतलब है कि अब कार्रवाई में पहले जैसी देरी नहीं होनी चाहिए। अधिकृत जानकारी के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: राजस्थान पेयजल कंटिजेंसी प्लान क्या है?
उत्तर: यह जलदाय विभाग की आपात योजना है — हर जिले के जलस्रोतों, भूजल और ट्यूबवेलों की स्थिति का आकलन करके संकट वाले इलाकों के लिए पहले से कार्ययोजना बनाई जाती है, जैसे नए ट्यूबवेल, पंप-मोटर बदलाव, पाइपलाइन मरम्मत और टैंकर व्यवस्था।

प्रश्न: कलक्टरों को ₹75 लाख का अधिकार कब तक के लिए है?
उत्तर: अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक के तीन महीनों के लिए। इस अवधि में हर जिले के कलक्टर ₹75 लाख तक के आपात पेयजल कार्यों के प्रस्ताव मंजूर करा सकते हैं।

प्रश्न: किन जिलों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है?
उत्तर: 41 में से 26 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही — 14 जिलों में कम और 12 में औसत से कम वर्षा हुई। कोटा, झालावाड़, डीग और बांसवाड़ा में स्थिति फिलहाल बेहतर है।

प्रश्न: क्या सच में पेयजल 30% तक घट जाएगा?
उत्तर: यह जलदाय विभाग का अनुमान है — कम बारिश के कारण आने वाले महीनों में मौजूदा जलस्रोतों से पेयजल की उपलब्धता 30 प्रतिशत तक घट सकती है। इसी आशंका से निपटने के लिए यह प्लान बनाया जा रहा है।

कुल मिलाकर राजस्थान पेयजल कंटिजेंसी प्लान दिखाता है कि सरकार इस बार पानी के संकट को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क है — कलक्टरों के आपात अधिकार और टैंकर-कर्मचारी तैनाती इसके संकेत हैं। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर अमल कितनी तेजी से होता है।

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