राजस्थान पैरा खिलाड़ी नकद पुरस्कार: खेल मंत्री राठौड़ ने 6 पदकवीरों से की मुलाकात, जल्द मिलेगी राशि

जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में शनिवार को एक मुलाकात हुई, जिसका सीधा फायदा राजस्थान के छह पैरा खिलाड़ियों की जेब और तैयारी पर पड़ने वाला है। युवा मामले एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने पैरा एशियन गेम्स-2026 के पदक विजेताओं से मिलकर भरोसा दिया है कि पैरा खिलाड़ी नकद पुरस्कार राजस्थान क्रीड़ा सहायता अनुदान नियमों के तहत जल्द दिया जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग, आधुनिक खेल उपकरण और बाकी जरूरी सुविधाओं में भी कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।

यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि इन खिलाड़ियों ने हाल ही में जापान के नागोया में हुए पैरा एशियन गेम्स में शूटिंग, बैडमिंटन और एथलेटिक्स में पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।

पैरा खिलाड़ी नकद पुरस्कार: क्या-क्या वादा किया गया

मंत्री की तरफ से इस मुलाकात में तीन बातें सबसे अहम रहीं। पहली, सभी पदक विजेताओं को राजस्थान क्रीड़ा सहायता अनुदान नियमों के तहत शीघ्र नकद पुरस्कार राशि दी जाएगी। दूसरी, भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। तीसरी, अत्याधुनिक खेल उपकरण और अन्य सभी आवश्यक सुविधाओं में किसी तरह की कमी नहीं रखी जाएगी।

इन तीनों बातों का मतलब साफ है। नकद पुरस्कार पिछले प्रदर्शन का सम्मान है, जबकि ट्रेनिंग और उपकरण अगले टूर्नामेंट की तैयारी की बुनियाद हैं। पैरा खेलों में उपकरण की कीमत अक्सर बहुत ज्यादा होती है, इसलिए यह भरोसा खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि आगे की तैयारी का सहारा है।

इस मौके पर क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता, सचिव राजकेश मीणा और खेल अधिकारी करण सिंह शेखावत समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे — यानी पुरस्कार की प्रक्रिया अब फाइलों में आगे बढ़ेगी।

कौन-कौन से 6 पदकवीर मिले मंत्री से

मंत्री ने सभी छह खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया। पदकों की सूची इस प्रकार है:

खिलाड़ी जिला खेल पदक
मोना अग्रवाल जयपुर पैरा शूटिंग 2 स्वर्ण
सृष्टि अरोड़ा अजमेर पैरा शूटिंग 1 कांस्य
कृष्णा नागर जयपुर पैरा बैडमिंटन 1 रजत, 1 कांस्य
महेन्द्र गुर्जर दूदू पैरा एथलेटिक्स (भाला फेंक) 1 रजत
प्रवीण शर्मा धौलपुर पैरा एथलेटिक्स (गोला फेंक) 1 कांस्य
बन्टी चूरू पैरा एथलेटिक्स (हाई जंप) 1 रजत

इन छह नामों में शूटिंग के दो, बैडमिंटन के एक और एथलेटिक्स के तीन खिलाड़ी शामिल हैं — यानी राजस्थान का पैरा खेल अब किसी एक खेल तक सीमित नहीं रहा।

मंत्री ने खिलाड़ियों से क्या कहा

खेल मंत्री ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि हर पदक के पीछे असाधारण अनुशासन, जुझारूपन और वर्षों की कड़ी मेहनत की कहानी है। उन्होंने कहा कि इन चैंपियनों ने भारत का मान बढ़ाया है और अनगिनत लोगों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया है।

यह बात सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं है। पैरा खिलाड़ियों का सफर आम खिलाड़ियों से कहीं ज्यादा कठिन होता है, इसलिए मंत्री का यह कहना कि राज्य हर कदम पर साथ खड़ा है, खिलाड़ियों को यह भरोसा देता है कि उनका संघर्ष देखा जा रहा है।

मोना अग्रवाल: किराए की राइफल से दो स्वर्ण तक

इस मुलाकात की सबसे चर्चित कहानी जयपुर की पैरा शूटर मोना अग्रवाल की है। पैरा एशियन गेम्स में उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता, जिसमें फाइनल में उनका स्कोर 250.0 रहा। इसके बाद 50 मीटर 3-पोजीशन स्पर्धा में भी उन्होंने स्वर्ण अपने नाम किया — और खास बात यह रही कि यह पदक उन्होंने किराए की राइफल के साथ जीता।

मोना की कहानी इसलिए भी प्रेरणा देती है क्योंकि 50 मीटर की स्पर्धा में हाथ आजमाने के तीन साल बाद भी उनके घर से सबसे नजदीकी शूटिंग रेंज करीब 30 किलोमीटर दूर थी। वह स्कूटी से रेंज तक जाती थीं और किराए की राइफल साथ ले जाती थीं। हफ्ते में तीन दिन इस स्पर्धा का अभ्यास करती थीं, साथ ही घर के पास वाली रेंज में 10 मीटर एयर राइफल की प्रैक्टिस भी जारी रखती थीं। अपनी 50 मीटर राइफल मिलने के कुछ महीने बाद ही उसमें तकनीकी खराबी आ गई, इसलिए एशियन पैरा गेम्स में भी उन्हें किराए की राइफल से ही उतरना पड़ा — और फिर भी स्वर्ण जीत लिया।

मोना पेरिस पैरालंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं। ऐसे में नकद पुरस्कार और आधुनिक उपकरण का वादा उनके जैसे खिलाड़ियों के लिए सीधा फर्क पैदा करेगा, क्योंकि अगली बार उन्हें किराए के उपकरण पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

बाकी पदकवीरों का सफर भी कम प्रेरक नहीं

अजमेर की सृष्टि अरोड़ा ने पैरा शूटिंग में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। धौलपुर के प्रवीण शर्मा ने गोला फेंक में कांस्य जीता और इस दौरान उन्होंने 13.86 मीटर की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंकी — यानी अपने ही पिछले रिकॉर्ड से आगे निकलकर पदक तक पहुंचे। जयपुर के कृष्णा नागर ने पैरा बैडमिंटन में रजत और कांस्य, दोनों पदक अपने नाम किए, जो किसी एक खिलाड़ी के लिए दोहरी उपलब्धि है।

दूदू के महेन्द्र गुर्जर ने भाला फेंक में रजत पदक जीता, जबकि चूरू के बन्टी ने हाई जंप में रजत हासिल किया। इन खिलाड़ियों की कहानियां जयपुर, अजमेर, दूदू, धौलपुर और चूरू से आती हैं — यानी प्रतिभा सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे जिलों से भी अंतरराष्ट्रीय पदक आ रहे हैं।

आगे क्या होगा: पैरा खिलाड़ी नकद पुरस्कार और अगली तैयारी

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नकद पुरस्कार और सुविधाएं खिलाड़ियों तक कब पहुंचेंगी। मंत्री के बयान के मुताबिक, राशि राजस्थान क्रीड़ा सहायता अनुदान नियमों के तहत दी जाएगी और मुलाकात में परिषद के अध्यक्ष व सचिव की मौजूदगी इसी ओर इशारा करती है कि प्रक्रिया अब फाइलों में आगे बढ़ेगी।

खिलाड़ियों के लिए अगला लक्ष्य भी साफ है — अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रदर्शन बनाए रखना। पैरा एशियन गेम्स के बाद अब नजरें अगले बड़े टूर्नामेंटों और पैरालंपिक की तैयारी पर होंगी। अगर ट्रेनिंग, उपकरण और आर्थिक मदद समय पर मिलती है, तो राजस्थान के पैरा खिलाड़ी अगली बार और बेहतर प्रदर्शन के साथ लौट सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वादे कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पैरा खिलाड़ी नकद पुरस्कार किस नियम के तहत मिलेगा?

राजस्थान क्रीड़ा सहायता अनुदान नियमों के तहत सभी पदक विजेताओं को शीघ्र नकद पुरस्कार राशि दी जाएगी।

31 अक्टूबर की मुलाकात में कौन-कौन से खिलाड़ी शामिल हुए?

मोना अग्रवाल, सृष्टि अरोड़ा, कृष्णा नागर, महेन्द्र गुर्जर, प्रवीण शर्मा और बन्टी — कुल छह पदकवीर।

मोना अग्रवाल ने पैरा एशियन गेम्स में कितने पदक जीते?

दो स्वर्ण — 10 मीटर एयर राइफल और 50 मीटर 3-पोजीशन स्पर्धा में।

सरकार ने ट्रेनिंग और उपकरण को लेकर क्या कहा है?

अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण, अत्याधुनिक खेल उपकरण और अन्य सभी आवश्यक सुविधाओं में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।

Leave a Comment