जापान के एची-नागोया में चल रहे 5वें एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत की झोली में एक और पदक आ गया है। राजस्थान के धौलपुर जिले के पैरा एथलीट प्रवीण शर्मा ने मंगलवार को पुरुष शॉट पुट F11 स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। अपने छठे और अंतिम प्रयास में प्रवीण ने 13.86 मीटर की थ्रो फेंकी — यह उनका अब तक का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसी एक थ्रो ने उन्हें पोडियम तक पहुंचा दिया।
इस स्पर्धा का नतीजा आखिरी थ्रो तक तय नहीं था। रजत पदक जीतने वाले ईरान के मेहदी ओलाद का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 13.93 मीटर रहा — प्रवीण से महज 7 सेंटीमीटर ज्यादा। यानी कांस्य और रजत के बीच का फासला एक हथेली से भी कम था। स्वर्ण पदक ईरान के ही अमीरहोसैन अलीपौर ने 14.99 मीटर की थ्रो के साथ जीता, जो एशियाई रिकॉर्ड भी है। फाइनल में कुल 6 एथलीटों ने हिस्सा लिया था।
आखिरी प्रयास में पलटा पूरा खेल
फाइनल के दौरान प्रवीण का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। चौथे प्रयास तक उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 13.60 मीटर था, जो पदक की दौड़ में उन्हें पीछे रख रहा था। लेकिन छठे और निर्णायक प्रयास में उन्होंने 13.86 मीटर की थ्रो फेंककर न सिर्फ अपना रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि कांस्य पदक भी पक्का कर लिया।
शॉट पुट में हर एथलीट को 6 प्रयास मिलते हैं और सर्वश्रेष्ठ थ्रो के आधार पर रैंकिंग तय होती है। ईरान के दोनों एथलीट शुरू से ही आगे चल रहे थे, ऐसे में आखिरी प्रयास में दबाव के बावजूद सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंकना प्रवीण की परिपक्वता को दर्शाता है।
डेढ़ साल की उम्र में छिन गई थी आंखों की रोशनी
प्रवीण शर्मा की जिंदगी की कहानी किसी भी खेल प्रेमी को प्रेरित करने वाली है। धौलपुर जिले के बांसरई गांव के रहने वाले प्रवीण महज डेढ़ से दो साल के थे, जब दवा के गंभीर रिएक्शन — स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम — के कारण उनकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई।
इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी चुनौती के बावजूद प्रवीण ने हार नहीं मानी और इस कमी को ही ताकत बना लिया। वर्ष 2021 में उन्होंने कोच सुरेश कुमार के मार्गदर्शन में पैरा एथलेटिक्स की शुरुआत की और महज कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय कर लिया।
दादा का सपना, पिता का साथ
प्रवीण की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान है। उनके दादा रामबाबू शर्मा ने बचपन से ही प्रवीण की प्रतिभा को पहचाना था। वे कहा करते थे कि उनका पोता एक दिन देश के लिए खेलेगा। जापान में कांस्य पदक जीतकर प्रवीण ने दादा के उस सपने को सच कर दिखाया।
प्रवीण के पिता ब्रजेश शर्मा ने भी हर कदम पर बेटे का साथ दिया और उन्हें मेहनत व अनुशासन की सीख दी। कोच के मार्गदर्शन के साथ GoSports Foundation जैसी संस्थाओं ने भी उनके सफर में अहम भूमिका निभाई।
पहले भी कई बार चमक चुके हैं प्रवीण
एशियन पैरा गेम्स 2026 का कांस्य प्रवीण के करियर की पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। इससे पहले भी वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ चुके हैं।
| प्रतियोगिता | वर्ष | प्रदर्शन |
| एशियन यूथ पैरा गेम्स | 2025 | शॉट पुट में स्वर्ण सहित कई पदक |
| खेलो इंडिया पैरा गेम्स | 2025 | शॉट पुट में रजत, डिस्कस थ्रो में कांस्य |
| वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री, नई दिल्ली | 2026 | शॉट पुट में प्रथम स्थान (13.31 मीटर), डिस्कस में रजत |
| एशियन पैरा गेम्स, एची-नागोया | 2026 | शॉट पुट F11 में कांस्य (13.86 मीटर, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ) |
उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री 2026 में नई दिल्ली में उन्होंने 13.31 मीटर की थ्रो से पहला स्थान हासिल किया था। नागोया में 13.86 मीटर की थ्रो उस प्रदर्शन से भी आधा मीटर से ज्यादा बेहतर है — यानी प्रवीण लगातार अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं।
F11 कैटेगरी का मतलब क्या है
पैरा एथलेटिक्स में एथलीटों को उनकी दिव्यांगता के प्रकार और स्तर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरियों में बांटा जाता है। F11 कैटेगरी उन एथलीटों के लिए है, जिनकी दृष्टि सबसे गंभीर रूप से प्रभावित होती है — यानी लगभग पूर्ण या पूर्ण दृष्टिहीनता।
F11 स्पर्धाओं में एथलीट पूरी तरह दृष्टि के बिना थ्रो करते हैं। दिशा, संतुलन और ताकत का सटीक समन्वय ही उनकी सफलता की कुंजी होता है। ऐसे में प्रवीण का 13.86 मीटर का थ्रो तकनीकी दृष्टि से भी असाधारण माना जा रहा है।
भारत के लिए मंगलवार का दिन रहा शानदार
एशियन पैरा गेम्स 2026 में मंगलवार का दिन भारतीय दल के लिए शानदार रहा। शॉट पुट में प्रवीण शर्मा के कांस्य के अलावा भाला फेंक की F53/F54 स्पर्धा में प्रदीप कुमार ने रजत और आयुष वर्मा ने कांस्य जीता। पैरा टेबल टेनिस में भी भारत ने उसी दिन चार कांस्य पदक जीते। एक दिन पहले जयपुर की मोना अग्रवाल ने शूटिंग में स्वर्ण और अवनी लेखरा ने रजत जीता था, जबकि अजमेर की सृष्टि अरोड़ा ने भी इन्हीं खेलों में कांस्य अपने नाम किया — राजस्थान के पैरा खिलाड़ी लगातार देश का मान बढ़ा रहे हैं।
अब आगे क्या — बड़ी प्रतियोगिताओं की राह
एशियन पैरा गेम्स 2026 में पदक जीतना किसी भी पैरा एथलीट के करियर का अहम मोड़ होता है। यह प्रदर्शन न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार लाता है, बल्कि आगामी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए चयन की संभावनाओं को भी मजबूत करता है। प्रवीण जिस रफ्तार से अपने प्रदर्शन में सुधार कर रहे हैं — 13.31 मीटर से 13.86 मीटर तक का सफर महज कुछ महीनों में — वह उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
राजस्थान के खेल प्रेमियों के लिए यह गर्व का क्षण है। धौलपुर जैसे छोटे जिले के गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराना यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और अटूट हौसले के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: प्रवीण शर्मा ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में कौन सा पदक जीता?
उत्तर: प्रवीण शर्मा ने जापान के एची-नागोया में आयोजित 5वें एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुष शॉट पुट F11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। उन्होंने 13.86 मीटर की व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंकी।
प्रश्न 2: प्रवीण शर्मा कहां के रहने वाले हैं?
उत्तर: प्रवीण शर्मा राजस्थान के धौलपुर जिले के बांसरई गांव के रहने वाले हैं।
प्रश्न 3: शॉट पुट F11 कैटेगरी क्या है?
उत्तर: F11 पैरा एथलेटिक्स की वह कैटेगरी है, जिसमें गंभीर दृष्टि दिव्यांगता वाले एथलीट हिस्सा लेते हैं। इसमें एथलीट लगभग पूर्ण दृष्टिहीनता के साथ थ्रो करते हैं।
प्रश्न 4: एशियन पैरा गेम्स 2026 कहां आयोजित हो रहे हैं?
उत्तर: 5वें एशियन पैरा गेम्स 2026 जापान के एची-नागोया शहर में आयोजित हो रहे हैं।
स्रोत: टाइम्स नाउ हिंदी और न्यूज़18 की रिपोर्टों पर आधारित। ताजा खेल खबरों के लिए पढ़ते रहें।