जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास: हाईकोर्ट ने PIL खारिज की, 19.18 करोड़ के वन-वे अंडरपास का रास्ता साफ

अजमेर रोड से रोज़ गुजरने वालों के लिए पुरानी चुंगी वह जगह है जहां सुबह-शाम गाड़ियों की रफ्तार अचानक थम जाती है। अब इस रोज़ की परेशानी से राहत को कानूनी मोहर मिल गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास के खिलाफ जनहित याचिका खारिज कर दी है, जिसके बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के 19.18 करोड़ रुपये वाले वन-वे अंडरपास का रास्ता साफ हो गया है।

यह फैसला सिर्फ निर्माण का मामला नहीं था — सवाल चुने गए तकनीकी रास्ते की सहीता का था। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे यह निर्माण आम जनता के हित के खिलाफ साबित हो।

अजमेर रोड के रोज़ाना मुसाफिरों को इससे क्या फायदा होगा

जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास का सबसे सीधा फायदा अजमेर रोड के इस हिस्से से रोज़ गुजरने वाले हजारों लोगों को मिलेगा। यह वन-वे होगा; ट्रैफिक विश्लेषण में सारथी मार्ग से सुशीलपुरा की तरफ इसकी जरूरत बताई गई है।

इसका मतलब आसान है। जिस दिशा में सुबह-शाम सबसे ज्यादा दबाव रहता है, उस दिशा के वाहनों को सिग्नल और चौराहे के दबाव से अलग रास्ता मिल जाएगा। जब एक दिशा का ट्रैफिक नीचे से निकल जाएगा, तो ऊपर की सड़क पर भी दबाव कम होगा। पीक आवर में यही फर्क दफ्तर पहुंचने में कई मिनट बचा सकता है।

जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास: तथ्य एक नज़र में

मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:

तथ्य विवरण
स्थान अजमेर रोड, पुरानी चुंगी, जयपुर
परियोजना वन-वे अंडरपास
दिशा सारथी मार्ग से सुशीलपुरा की तरफ
अनुमानित लागत 19.18 करोड़ रुपये
निर्माण एजेंसी जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए)
टेंडर 6 मार्च 2026 को निकाला गया था
याचिकाकर्ता ज्ञानेश कुमार शर्मा
फैसला सुनाने वाली पीठ मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन
ताजा स्थिति याचिका खारिज, निर्माण का रास्ता साफ

19.18 करोड़ रुपये का आंकड़ा याचिका और सुनवाई में सामने आया है — यह प्रस्तावित लागत है, अंतिम नहीं। जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास के पूरा होने की कोई तय तारीख स्रोतों में नहीं दी गई है।

कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए तीन बातों पर जोर दिया। पहली, मौके पर व्यापक यातायात सर्वेक्षण हुआ था। दूसरी, पीक आवर में पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) के आधार पर वाहनों का विश्लेषण हुआ था, जिससे सारथी मार्ग से सुशीलपुरा की तरफ वन-वे अंडरपास की जरूरत सामने आई। तीसरी, यह जेडीए का कार्यकारी नीतिगत निर्णय है।

अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री पेश नहीं की गई है, जिससे यह साबित हो कि यह निर्माण आमजन के हित के खिलाफ है। यह टिप्पणी अहम है, क्योंकि याचिका का मूल दावा यही था कि परियोजना तकनीकी रूप से ठीक नहीं है — और अदालत को इसके समर्थन में ठोस दस्तावेजी आधार नहीं दिखा।

अदालत ने यह रुख भी अपनाया कि बुनियादी परियोजनाओं के तकनीकी फैसलों में गैर-जरूरी दखल से बचना चाहिए — डिजाइन इंजीनियरों और प्रशासन के आकलन पर छोड़ना सही है, जब तक जनहित के खिलाफ कुछ स्पष्ट न दिखे।

याचिकाकर्ता की आपत्तियां क्या थीं, जेडीए ने क्या जवाब दिया

याचिका में कहा गया था कि जेडीए की अपनी रिपोर्ट में ही तकनीकी, जल निकासी, सुरक्षा और वित्तीय चिंताएं सामने आई थीं, फिर भी 19.18 करोड़ रुपये का वन-वे अंडरपास आगे बढ़ाया जा रहा है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रस्तावित अंडरपास बाढ़ प्रभावित होने और मौजूदा ढांचे से टकराव के कारण तकनीकी रूप से अनुपयुक्त है, इसलिए निर्माण प्रक्रिया रद्द की जाए।

जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुडी ने जवाब दिया कि भूमिगत बिजली लाइनों के लिए रडार यूटिलिटी मैपिंग की जाएगी और द्रव्यवती ड्रेनेज सिस्टम से जुड़ी ऑटोमेटिक पंपिंग व्यवस्था की जाएगी। तीन दिन के लगातार यातायात सर्वेक्षण और व्यस्ततम घंटों के विश्लेषण का भी हवाला दिया गया। इंजीनियरिंग डिजाइन नीतिगत निर्णय के दायरे में आता है, इसलिए याचिका खारिज की जाए।

दोनों पक्षों के अपने तर्क थे, लेकिन अदालत के सामने निर्णायक सवाल यही था कि क्या जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास को रोकने लायक ठोस आधार है। जवाब था — नहीं। कानूनी रास्ता अब खुला है, और तकनीकी जिम्मेदारी पूरी तरह निर्माण एजेंसी की होगी।

जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास: अब आगे क्या होगा

याचिका खारिज होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह है कि परियोजना पर लगा कानूनी अड़ंगा हट गया है। जेडीए अब टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा, क्योंकि अदालत का फैसला उसके पक्ष में है।

लेकिन कुछ बातें अभी साफ नहीं हैं: निर्माण की शुरुआत और पूरा होने की तारीख स्रोतों में नहीं है, निर्माण के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन तय नहीं है, और 19.18 करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित आंकड़ा है।

शहर में सड़क और ट्रैफिक के काम कई मोर्चों पर चल रहे हैं। हाल ही में जेडीए की परियोजना समिति की बैठक में 146 करोड़ रुपये से ज्यादा की सड़क और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर फैसले हुए थे, जिनमें गोपालपुरा अंडरपास भी शामिल था। इसी तरह, जेएलएन मार्ग को सिग्नल-फ्री बनाने की बड़ी योजना पर भी चर्चा चल रही है। जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास का फैसला इन कोशिशों के बीच एक छोटा लेकिन ठोस कदम है। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार यह फैसला 31 अक्टूबर 2026 की सुबह सामने आया था।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास कहां बनेगा?

यह अंडरपास जयपुर में अजमेर रोड पर पुरानी चुंगी के पास प्रस्तावित है। यह वन-वे अंडरपास होगा, जो सारथी मार्ग से सुशीलपुरा की तरफ वाहनों की आवाजाही के लिए बनाया जाएगा।

जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास की लागत कितनी है?

याचिका और सुनवाई में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इस परियोजना की अनुमानित लागत 19.18 करोड़ रुपये है। यह प्रस्तावित लागत है, अंतिम खर्च निर्माण के दौरान तय होगा।

इस अंडरपास को किसने चुनौती दी थी और क्यों?

ज्ञानेश कुमार शर्मा ने जनहित याचिका दायर करके इसे चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि यह अंडरपास बाढ़ प्रभावित होने और मौजूदा ढांचे से टकराव के कारण तकनीकी रूप से अनुपयुक्त है। हाईकोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी है।

जयपुर पुरानी चुंगी अंडरपास कब तक बनकर तैयार होगा?

इसकी कोई तय तारीख अभी सार्वजनिक स्रोतों में नहीं दी गई है। याचिका खारिज होने से निर्माण का कानूनी रास्ता साफ हुआ है, लेकिन समयसीमा जेडीए की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

अंत में, यह मामला बताता है कि शहरों का विकास अदालत, प्रशासन और तकनीकी एजेंसियों के संतुलन से आगे बढ़ता है। इस बार संतुलन निर्माण के पक्ष में झुका है — अब नजर जेडीए के अगले कदम पर रहेगी।

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