दीपावली इस साल राजस्थान के हजारों शिक्षकों के लिए घर पहुंचने का नहीं, बल्कि चुनाव ड्यूटी निभाने का समय बनता जा रहा है। पंचायत राज चुनावों का कार्यक्रम अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं और मध्यावधि (दीपावली) अवकाश के ठीक बीच में आ गया है, और इसी वजह से अब शिक्षक संगठन एक स्वर में चुनाव तिथियों में बदलाव की मांग करने लगे हैं।
“शिक्षकों के घर कैसे जलेगा दीपक” — संगठनों का सीधा सवाल
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने साफ शब्दों में कहा है कि चुनावी ड्यूटी के कारण शिक्षकों का दीपावली अवकाश प्रभावित होगा। दूरस्थ जिलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ड्यूटी पूरी करने के बाद वे समय पर घर कैसे पहुंचेंगे। शर्मा के अनुसार कई शिक्षक अपने गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर तैनात हैं, और मध्यावधि अवकाश ही वह इकलौता मौका होता है जब वे परिवार के पास जा पाते हैं।
शर्मा ने सरकार से भी सवाल किया है। उनका कहना है कि दीपावली सनातन धर्म का प्रमुख त्योहार है और सरकार स्वयं को सनातन हितैषी बताती है। ऐसे में मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करके निर्वाचन आयोग से बात करनी चाहिए, ताकि दीपावली अवकाश की अवधि को छोड़कर चुनाव कराए जाएं।
एक दिन का मतदान नहीं, हफ्तों की प्रक्रिया
शिक्षक संगठनों का एक अहम तर्क यह है कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी सिर्फ मतदान वाले एक दिन तक सीमित नहीं रहती। चुनाव से पहले प्रशिक्षण होता है, मतदान सामग्री लेनी होती है, बूथ तैयार करने होते हैं, मॉक पोल कराना होता है। मतदान के बाद ईवीएम और सामग्री जमा करानी होती है, फिर मतगणना और अन्य चुनावी प्रक्रिया में कई दिन लग जाते हैं। यानी शिक्षक कई-कई दिनों तक चुनावी काम में उलझा रहता है।
राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रणजीत मीणा के अनुसार इसी अवधि में स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी चल रही होंगी। एक तरफ परीक्षाएं होंगी, दूसरी तरफ शिक्षक चुनाव प्रशिक्षण और मतदान ड्यूटी में जाएंगे, और तीसरी तरफ मतदान केंद्र बनने वाले स्कूलों का अधिग्रहण भी होगा। मीणा का कहना है कि इससे शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों की परेशानी भी बढ़ेगी — परीक्षा व्यवस्था और पढ़ाई दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
तीसरा चरण दीपावली के ठीक बीच में
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान) ने विशेष रूप से तीसरे चरण की तिथियों पर आपत्ति जताई है। महासंघ के प्रदेश सचिव रवि आचार्य के अनुसार तीसरे चरण की चुनावी प्रक्रिया 3 से 7 नवंबर के बीच होनी है, जबकि 6 नवंबर को धनतेरस, 7 नवंबर को छोटी दीपावली और 8 नवंबर को मुख्य दीपावली मनाई जाएगी। इसी अवधि में विद्यालयों में मध्यावधि अवकाश भी रहता है।
आचार्य का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षक अपने मूल गृह जिले से दूर अन्य जिलों में कार्यरत हैं। वे पूरे साल मध्यावधि अवकाश का इंतजार करते हैं ताकि परिवार के साथ दीपावली मना सकें। महासंघ ने गृह जिले से बाहर पदस्थ शिक्षकों के लिए विशेष शिथिलता की मांग की है — या तो उनकी ड्यूटी का स्थानीय स्तर पर समायोजन हो, या वैकल्पिक तिथियां तय हों।
तृतीय श्रेणी कर्मचारियों ने भी जताया विरोध
तृतीय श्रेणी संघर्ष समिति ने भी इस शेड्यूल का विरोध किया है। समिति के प्रदेश संयोजक सुनील महला के अनुसार पंचायत चुनाव के तीसरे और चौथे चरण की मतदान तिथियां मध्यावधि अवकाश के बीच में रखी गई हैं, और दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षक इन्हीं अवकाशों में घर जा पाते हैं।
चुनाव कार्यक्रम एक नजर में
| चुनाव | चरणवार मतदान तिथियां |
|---|---|
| जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य | 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर, 14 नवंबर |
| सरपंच व वार्ड पंच | 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर, 16 नवंबर |
| जिला परिषद परिणाम | 20 नवंबर |
| सरपंच चुनाव खर्च सीमा | अधिकतम 1 लाख रुपये |
| मतदान माध्यम | सरपंच-वार्ड पंच मतपत्र से; जिला परिषद-पंचायत समिति ईवीएम से |
राज्य निर्वाचन आयोग ने कुल 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के चुनाव चार चरणों में कराने की घोषणा की है। बारां, श्रीगंगानगर, करौली और कोटा जिले की कुछ संस्थाओं का कानूनी कार्यकाल बचा होने के कारण वहां 22 दिसंबर 2026 के बाद चुनाव होंगे।
कब-कब टकरा रहा है चुनाव का कार्यक्रम
शिविरा कैलेंडर के अनुसार अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 15 से 29 अक्टूबर तक प्रस्तावित हैं, जबकि 4 से 15 नवंबर तक दीपावली अवकाश है।
पहला टकराव 15 से 29 अक्टूबर के बीच है। इसी अवधि में 23 और 25 अक्टूबर को मतदान होना है, और 29 व 31 अक्टूबर के मतदान की तैयारी — प्रशिक्षण, बूथ निरीक्षण, सामग्री वितरण — भी इन्हीं दिनों चलेगी। यानी परीक्षाओं के ठीक बीच में चुनावी मशीनरी पूरी गति से काम कर रही होगी।
दूसरा टकराव 4 से 8 नवंबर के बीच है। 4 नवंबर को जिला परिषद का मतदान, 6 नवंबर को सरपंच का मतदान, और 6 से 8 नवंबर के बीच धनतेरस, छोटी दीपावली और मुख्य दीपावली। यही वह अवधि है जब शिक्षक संगठन सबसे ज्यादा नाराज हैं, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया 3 से 7 नवंबर तक चलेगी — ठीक त्योहार के बीच।
परीक्षाओं पर पड़ने वाला असर
शिक्षक संगठनों की एक और चिंता विद्यार्थियों को लेकर है। संगठनों का कहना है कि मौजूदा शेड्यूल का असर केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा। अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के दौरान चुनावी तैयारियां शुरू होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होगी, क्योंकि मतदान केंद्र बनने वाले स्कूलों में परीक्षा कक्षों की व्यवस्था बदलनी पड़ सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: पंचायत चुनाव की ड्यूटी में शिक्षकों को क्या परेशानी हो रही है?
उत्तर: चुनाव कार्यक्रम अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं और दीपावली अवकाश के बीच में आ गया है। चुनाव प्रशिक्षण, मतदान ड्यूटी और मतगणना में कई दिन लगेंगे, जिससे शिक्षक परिवार के साथ दीपावली नहीं मना पाएंगे।
प्रश्न 2: किन शिक्षक संगठनों ने चुनाव तिथियों का विरोध किया है?
उत्तर: राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत, राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ, तृतीय श्रेणी संघर्ष समिति और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान) ने विरोध जताया है और तिथियों में बदलाव की मांग की है।
प्रश्न 3: पंचायत चुनाव कब-कब होंगे?
उत्तर: जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव 23 व 29 अक्टूबर और 4 व 14 नवंबर को होंगे, जबकि सरपंच व वार्ड पंच के चुनाव 25 व 31 अक्टूबर और 6 व 16 नवंबर को होंगे। जिला परिषद के परिणाम 20 नवंबर को आएंगे।
प्रश्न 4: शिक्षक संगठनों की मुख्य मांगें क्या हैं?
उत्तर: दीपावली अवकाश की अवधि को चुनाव से बाहर रखा जाए, परीक्षाओं से टकराव न हो, दूर पदस्थ शिक्षकों को ड्यूटी में शिथिलता दी जाए, और मुख्यमंत्री निर्वाचन आयोग से बात करके कार्यक्रम बदलवाएं।