दौसा के बांदीकुई में DAP के लिए उमड़ी भीड़: 840 कट्टों के लिए धक्का-मुक्की, दो लोग बीमार

राजस्थान के कृषि मंत्री के ही गृह जिले में किसान खाद के कट्टे के लिए एक-दूसरे से जूझते नजर आए। दौसा जिले के बांदीकुई में मंगलवार (6 अक्टूबर 2026) को DAP खाद लेने के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी कि धक्का-मुक्की में दो लोगों की तबीयत बिगड़ गई। करीब एक महीने बाद क्रय-विक्रय सहकारी समिति में 840 कट्टे DAP पहुंचने की सूचना मिलते ही किसान सुबह से कतार में लग गए थे। सरकार कह रही है कि खाद का स्टॉक पर्याप्त है, फिर भी किसान घंटों लाइन में खड़े हैं — यही असली सवाल है।

सुबह 7 बजे से कतार, धूप में बेहोश हुआ किसान

किसानों का कहना है कि वे सुबह करीब 7 बजे से समिति के बाहर लाइन में खड़े थे। खबर फैलते ही सैकड़ों किसान पहुंच गए। खाद लेने से पहले जमाबंदी पर मोहर और फिर टोकन लेने के लिए अलग-अलग कतारें लगी थीं, जिससे परेशानी और बढ़ गई।

यह सुनते ही किसान टोकन की ओर दौड़ पड़े, जिससे अचानक भीड़ बढ़ी और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। तेज धूप और भीड़ के बीच किसान संतोष शर्मा बेहोश होकर गिर पड़े। 108 एंबुलेंस से उन्हें बांदीकुई उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसी दौरान भीड़ में एक महिला की तबीयत भी बिगड़ गई, जिसे भीड़ से बाहर निकालकर उपचार के लिए ले जाया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर खाद वितरण की व्यवस्था संभाली।

20 दिन का इंतजार, रबी की बुवाई का दबाव

किसानों का कहना है कि उन्हें करीब 20 दिन से खाद का इंतजार था। रबी सीजन की बुवाई का समय चल रहा है, और DAP बुवाई के समय जमीन में दी जाने वाली सबसे जरूरी खाद है। देरी होने पर उपज प्रभावित होने का डर किसानों को सता रहा है।

यही वजह है कि जैसे ही स्टॉक पहुंचने की सूचना मिली, सुबह से ही समिति के बाहर लंबी कतार लग गई। लोगों को डर था कि अगर इस बार भी कट्टा हाथ नहीं लगा, तो बुवाई का समय निकल जाएगा।

टोकन और जमाबंदी की दोहरी लाइन

कालाबाजारी रोकने के लिए कुछ जिलों में टोकन व्यवस्था लागू है। इसका मकसद है कि खाद ज्यादा किसानों तक पहुंचे और कोई एक व्यक्ति जरूरत से ज्यादा कट्टे न ले सके। कुछ जगह आधार कार्ड के आधार पर एक से तीन कट्टे तक देने की व्यवस्था भी है।

जमाबंदी पर मोहर की एक लाइन, टोकन की दूसरी लाइन और बीच में खाद मिलने की अनिश्चितता — इस दौड़-धूप में घंटों खड़े किसान थकान और गर्मी से बेहाल हो गए। किसानों का कहना है कि अगर वितरण पहले से तय समय और व्यवस्था पर होता, तो ऐसी अफरा-तफरी नहीं मचती।

प्रदेश भर में खाद को लेकर दो तस्वीरें

बांदीकुई की घटना अकेली नहीं है। धौलपुर में किसान सुबह 5-7 बजे से DAP और यूरिया के लिए घंटों कतार में खड़े नजर आ रहे हैं, तो बारां में खाद की मांग को लेकर किसानों ने सड़क जाम कर दी थी। एक ओर किसान वितरण में परेशानी की बात कर रहे हैं, दूसरी ओर सरकार कह रही है कि स्टॉक पर्याप्त है।

सरकार के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल 3.73 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.04 लाख मीट्रिक टन DAP, 95 हजार मीट्रिक टन एनपीके और 2.09 लाख मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक उपलब्ध है। 6 अक्टूबर को हुई राज्य स्तरीय बैठक में अधिकारियों ने रबी सीजन में किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने और जमाखोरी व कालाबाजारी रोकने पर जोर दिया। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि खाद की कमी नहीं है और सप्लाई के पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं।

रबी में DAP की मांग तेजी से बढ़ती है, और भारत DAP के कच्चे माल का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार से लाता है। लेकिन असल सवाल स्टॉक का नहीं, समय पर वितरण का है — किल्लत की खबरें वहीं से आ रही हैं जहां वितरण धीमा है।

सियासी बयानबाजी के बीच किसान

खाद का मुद्दा अब सियासी भी हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि रबी में किसान परेशान हैं, लेकिन सरकार व्यवस्था पर ध्यान देने के बजाय चुनावी तैयारियों में लगी है। बीजेपी का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक फायदे के लिए कृत्रिम संकट पैदा करवा रहा है। दोनों दलों के दावों के बीच किसान अपनी कतार में खड़ा है।

खाद खरीदते समय किसान रखें इन बातों का ध्यान

  • निर्धारित दाम से ज्यादा न दें: DAP का अधिकतम खुदरा मूल्य करीब 1,350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम का कट्टा है। इससे ज्यादा दाम मांगना या खाद के साथ अतिरिक्त सामान थोपना गलत है।
  • दस्तावेज पहले तैयार रखें: टोकन वाली व्यवस्था में सुबह जल्दी पहुंचें और जमाबंदी जैसे दस्तावेज पहले से तैयार रखें।
  • शिकायत करें: खाद न मिले या ज्यादा दाम मांगा जाए, तो जिला कृषि विभाग या कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।
  • मिट्टी की जांच: जरूरत से ज्यादा खाद डालना जेब और जमीन दोनों के लिए ठीक नहीं।

प्रदेश में खाद का सरकारी स्टॉक (दावा)

खाद का प्रकार उपलब्ध स्टॉक (लगभग)
यूरिया 3.73 लाख मीट्रिक टन
DAP 1.04 लाख मीट्रिक टन
एनपीके 95 हजार मीट्रिक टन
एसएसपी 2.09 लाख मीट्रिक टन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: बांदीकुई में किसान क्यों इकट्ठा हुए?

करीब एक महीने बाद क्रय-विक्रय सहकारी समिति में 840 कट्टे DAP पहुंचे थे। रबी की बुवाई का समय होने और करीब 20 दिन के इंतजार के चलते किसान सुबह से कतार में लग गए। धक्का-मुक्की में दो लोगों की तबीयत बिगड़ गई।

प्रश्न: क्या सरकार के पास खाद का स्टॉक है?

सरकार के मुताबिक प्रदेश में 3.73 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.04 लाख मीट्रिक टन DAP, 95 हजार मीट्रिक टन एनपीके और 2.09 लाख मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध है। हालांकि कई जगह किसान वितरण में परेशानी की बात कर रहे हैं।

प्रश्न: ज्यादा दाम मांगा जाए तो क्या करें?

जिला कृषि विभाग या जिला कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। DAP का निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य करीब 1,350 रुपये प्रति 50 किलो का कट्टा है।

प्रश्न: रबी में DAP इतनी जरूरी क्यों है?

DAP बुवाई के समय जमीन में दी जाने वाली मुख्य खाद है। इससे जड़ों का विकास होता है और फसल को शुरुआती बढ़त मिलती है। समय पर न मिले तो बुवाई में देरी और उपज पर असर पड़ सकता है।

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