राजस्थान के छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती की सबसे बड़ी दिक्कत अब धीरे-धीरे कम होने जा रही है। महंगा ट्रैक्टर खरीदना, थ्रेशर का इंतजाम करना या बीज बोने की मशीन जुटाना — ये सब काम अब किराए पर मिलने वाली सुविधा से आसान हो जाएंगे। राज्य में सहकारी समितियों के जरिए चल रहे राजस्थान कृषि यंत्र किराया केंद्र की संख्या बढ़कर 1,575 हो गई है। इसके साथ ही किसानों की उपज को सुरक्षित रखने के लिए 130 गोदामों का निर्माण भी पूरा हो चुका है, जबकि 70 गोदामों पर काम चल रहा है।
मंगलवार को शासन सचिवालय में हुई सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में ये आंकड़े सामने आए। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की।
1,575 कृषि यंत्र किराया केंद्र: छोटे किसानों को क्या मिलेगा
राजस्थान कृषि यंत्र किराया केंद्र का सबसे बड़ा फायदा उन किसानों को मिलेगा, जिनके पास अपनी जमीन तो है, लेकिन महंगी मशीनें खरीदने की हैसियत नहीं है। इन केंद्रों से ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर और बीज बोने के यंत्र किराए पर मिलते हैं। इसका सीधा मतलब है कि किसान को लाखों रुपये लगाकर मशीन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह जरूरत के समय मशीन किराए पर लेगा, काम पूरा करेगा और वापस कर देगा।
शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने बैठक में बताया कि ये केंद्र सहकारी समितियों के माध्यम से चल रहे हैं। इससे छोटे एवं सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। खेती की लागत घटाना इस व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य है, क्योंकि मशीनों की खरीद पर होने वाला भारी खर्च अब किराए के छोटे भुगतान में बदल गया है।
130 गोदाम तैयार, 70 पर काम जारी: भंडारण का नया जाल
फसल काटने के बाद सबसे बड़ी चिंता उसे सुरक्षित रखने की होती है। कई बार सही भंडारण न मिलने से उपज खराब हो जाती है या किसान को मजबूरी में कम दाम पर बेचना पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए सहकारिता क्षेत्र में गोदामों का जाल बिछाया जा रहा है।
बैठक में बताया गया कि इस योजना के तहत अब तक 130 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 70 गोदामों का काम जारी है। इन गोदामों का उपयोग समर्थन मूल्य पर खरीदी गई उपज, राशन के अनाज, बीज और उर्वरकों के भंडारण में किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बने हुए गोदामों का संचालन समय पर शुरू किया जाए, ताकि किसानों को भंडारण की सुविधा तुरंत मिल सके।
80 प्रतिशत तक अनुदान: किराया केंद्र खोलने का गणित
जो लोग गांव में कृषि यंत्र किराया केंद्र खोलना चाहते हैं, उनके लिए भी सरकार की ओर से मदद का प्रावधान है। तीस लाख रुपये की लागत वाले केंद्र की स्थापना पर 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलने की व्यवस्था है। यानी केंद्र खोलने वाले व्यक्ति या समिति को पूरी लागत अपने दम पर नहीं उठानी पड़ेगी।
इस अनुदान से गांव-गांव में केंद्र बढ़ेंगे, ताकि किसान को मशीन नजदीक ही मिल सके।
| विवरण | आंकड़ा |
| तैयार गोदाम | 130 |
| निर्माणाधीन गोदाम | 70 |
| कृषि यंत्र किराया केंद्र | 1,575 |
| केंद्र की लागत पर अनुदान | 80 प्रतिशत तक |
| केंद्र की अनुमानित लागत | 30 लाख रुपये |
| बीज सहकारी समिति का कारोबार (2025-26) | 24.28 करोड़ रुपये |
| बीज सहकारी समिति का कारोबार (2024-25) | 2.34 करोड़ रुपये |
| यूएई को बाजरे का निर्यात (2025) | 2 कंटेनर |
बाजरा निर्यात से जैविक खेती तक: सहकारिता की नई कमाई
सहकारिता विभाग की समीक्षा में सिर्फ गोदाम और मशीनों की बात नहीं हुई, बल्कि किसानों की कमाई बढ़ाने के नए रास्तों पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय स्तर की बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के माध्यम से समितियों को गुणवत्तापूर्ण बीज, जैविक खेती और कृषि उपज के निर्यात से जोड़ने की प्रगति की जानकारी बैठक में दी गई।
इसका सबसे अच्छा उदाहरण श्रीगंगानगर जिले से सामने आया। वहां की अतुल्य ग्रामीण सहकारी समिति ने राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड के सहयोग से वर्ष 2025 में संयुक्त अरब अमीरात को बाजरे के दो कंटेनर निर्यात किए। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड का राजस्थान में कारोबार वर्ष 2024-25 के 2.34 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 24.28 करोड़ रुपये हो गया है।
नागौर जिले में जैविक खेती करने वाले किसानों को प्रमाणन और बाजार की सुविधा से जोड़ने का काम भी चल रहा है।
क्षेत्रवार विशेष उत्पादों को बढ़ावा: सोजत की मेहंदी से बांरा के चावल तक
बैठक में राज्य के क्षेत्रवार विशेष उत्पादों को बढ़ावा देने के भी निर्देश दिए गए। सोजत की मेहंदी, बांरा का चावल, नागौर की मैथी एवं जीरा और मथानिया की मिर्च जैसे उत्पादों की पहचान पहले से ही है। अब इन्हें संगठित तरीके से बढ़ावा देने और विदेशों में निर्यात की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में बाजरा, जीरा और किन्नू को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने के लिए उपज के संग्रहण, छंटाई, प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच की सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजस्थान राज्य भंडारण निगम डॉ. आरूषी अजेय मलिक सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
किसानों के लिए आगे क्या: कैसे उठाएं लाभ
राजस्थान कृषि यंत्र किराया केंद्र का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपनी नजदीकी सहकारी समिति से संपर्क करना चाहिए। बुवाई या कटाई के समय से पहले ही मशीन की बुकिंग करा लेना समझदारी होगी, क्योंकि सीजन के चरम समय पर मांग बढ़ जाती है।
किराया केंद्र खोलने के इच्छुक लोगों को अनुदान की शर्तों और आवेदन प्रक्रिया के बारे में सहकारिता विभाग के स्थानीय कार्यालय से पूरी जानकारी लेनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजस्थान में कितने कृषि यंत्र किराया केंद्र चल रहे हैं?
राज्य में सहकारी समितियों के माध्यम से 1,575 कृषि यंत्र किराया केंद्र चल रहे हैं, जिनसे ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर और बीज बोने के यंत्र किराए पर मिलते हैं।
किराया केंद्र खोलने पर कितना अनुदान मिलता है?
तीस लाख रुपये की लागत वाले केंद्र की स्थापना पर 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।
अब तक कितने गोदाम बन चुके हैं?
इस योजना के तहत 130 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 70 गोदामों का काम जारी है।
इन गोदामों में क्या रखा जा सकेगा?
समर्थन मूल्य पर खरीदी गई उपज, राशन का अनाज, बीज और उर्वरकों का भंडारण इन गोदामों में किया जा सकेगा।
स्रोत: पत्रिका की खबर | संबंधित खबरें: राजस्थान नैनो यूरिया अनुदान | किसान खाद संकट | राजस्थान सूखा राहत