प्रधानाचार्यों को बाल विवाह रोकने की कानूनी जिम्मेदारी, शिक्षक संगठन नाराज: जानिए क्या होगा अब

राजस्थान के सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के कंधों पर अब पढ़ाई के साथ-साथ एक और बड़ी कानूनी जिम्मेदारी आ गई है — बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी बनकर अपने इलाके में बाल विवाह रोकना। शिक्षा विभाग के ताजा आदेश ने इस व्यवस्था को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है, लेकिन खबर स्कूलों तक पहुंचते ही शिक्षक संगठनों में नाराजगी की लहर दौड़ गई। शिक्षक नेताओं का कहना है कि पढ़ाई के अलावा पहले से ही करीब 50 तरह की गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां उन पर लदी हैं, और अब एक कानूनी जिम्मेदारी और मिलने से स्कूलों में पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा।

शिक्षक संगठन क्यों नाराज हैं: 50 जिम्मेदारियों का बोझ

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान स्कूल शिक्षा) के प्रदेश मंत्री रवि आचार्य ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा पहले से ही करीब 50 तरह की जिम्मेदारियां सौंपी जा चुकी हैं — चुनाव ड्यूटी से लेकर जनगणना और प्रशासनिक काम तक। ऐसे में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की एक और कानूनी जिम्मेदारी से गैर-शैक्षणिक काम बढ़ेगा और स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।

शिक्षक संगठनों की आपत्ति का मूल तर्क यह है कि बाल विवाह की निगरानी और जांच जैसे काम पुलिस और प्रशासन के हैं। जब स्कूल का मुखिया ही कानूनी कागजी कार्रवाई, सबूत जुटाने और रिपोर्ट बनाने में उलझा रहेगा, तो स्कूल का प्रशासन और बच्चों की पढ़ाई दोनों पर असर पड़ेगा। कई प्रधानाचार्यों का यह भी कहना है कि गांवों में बाल विवाह जैसे संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करना सामाजिक दबाव भी ला सकता है। शिक्षकों ने इससे पहले पंचायत चुनाव ड्यूटी को लेकर भी इसी तरह विरोध दर्ज कराया था।

नया आदेश क्या कहता है: प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार की ओर से मंगलवार को जारी आदेश में सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में तय जिम्मेदारियां निभाने के निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्षेत्र भी साफ तय है — ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय का संबंधित वार्ड।

शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश का सख्ती से और लगातार पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं — जिला स्तर पर इसकी निगरानी भी होगी। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू करने का सिलसिला 13 अक्टूबर के आदेश से शुरू हुआ था, और अब मंगलवार के ताजा आदेश ने इसे अंतिम रूप दे दिया है।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में प्रधानाचार्य को क्या-क्या करना होगा

आदेश के मुताबिक, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में प्रधानाचार्य को अपने कार्यक्षेत्र में बाल विवाह की रोकथाम के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी:

जिम्मेदारी विवरण
हस्तक्षेप बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई और विवाह रोकने के उचित कदम
सबूत जुटाना ऐसे विवाह को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ अभियोजन के लिए साक्ष्य एकत्र करना
समझाइश परिवारों और समुदायों को बाल विवाह के दुष्परिणाम समझाना
जागरूकता अपने क्षेत्र में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना
रिपोर्टिंग सरकार के निर्देशानुसार रिपोर्ट और आंकड़े नियमित रूप से प्रस्तुत करना
समन्वय संभावित बाल विवाह की सूचना पर पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्रवाई

किसी संभावित बाल विवाह की सूचना मिलने पर प्रभावी कार्रवाई के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी पुलिस और जिला प्रशासन के साथ समन्वय भी करेगा।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की शक्तियां: कितनी, और सीमाएं क्या

अधिसूचना में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत संज्ञेय अपराधों से संबंधित कुछ जांच शक्तियां भी निर्धारित शर्तों और सीमाओं के अधीन दी गई हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि स्कूल प्रधानाचार्यों को पुलिस जैसी असीमित शक्तियां मिल गई हैं।

शक्तियों की यह स्पष्ट सीमा इसलिए जरूरी थी, ताकि बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी और पुलिस की भूमिकाओं में टकराव न हो। प्रधानाचार्य की भूमिका मुख्यतः निगरानी, रोकथाम और जागरूकता की रहेगी, जबकि दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार पुलिस और न्याय व्यवस्था के पास ही रहेगा।

यह व्यवस्था कहां से आई: पूरी पृष्ठभूमि

बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की जिम्मेदारियां बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16 में निर्धारित हैं। राज्य सरकार ने 24 अप्रैल 2026 को अधिसूचना जारी की थी, जिसे 14 मई को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इस अधिसूचना में स्कूल प्रधानाचार्यों के साथ राजस्व और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नामित किया गया।

इसके बाद शिक्षा विभाग का 13 अक्टूबर का आदेश स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश देता है, और अब मंगलवार के आदेश ने जिला अधिकारियों को इसके सख्त पालन की जिम्मेदारी सौंप दी है। 15 अक्टूबर के सरकारी आदेश में ही इस व्यवस्था की घोषणा हुई थी — आज का घटनाक्रम उसी का क्रियान्वयन और उस पर शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया है।

साथ में कौन-कौन: पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी भी शामिल

स्कूल प्रधानाचार्यों के अलावा ग्राम विकास अधिकारियों और पटवारियों को भी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह शिक्षा, राजस्व और पंचायती राज विभाग के स्थानीय अधिकारियों को बाल विवाह की रोकथाम के लिए साथ काम करना होगा। पटवारी के पास गांव की जानकारी, ग्राम विकास अधिकारी पंचायत स्तर पर सक्रिय और प्रधानाचार्य का संपर्क बच्चों के परिवारों से सबसे सीधा — तीनों के समन्वय से बाल विवाह की सूचना समय पर मिल सकेगी।

हालांकि शिक्षक संगठनों का सवाल अपनी जगह है — जब एक ही प्रधानाचार्य को पढ़ाई, स्कूल प्रशासन और अब बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की कानूनी निगरानी तीनों संभालने हैं, तो प्राथमिकता किसे मिलेगी? शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर यह व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो आंदोलन का रास्ता भी खुला है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी कौन होता है?
उत्तर: बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16 के तहत नामित अधिकारी जो अपने क्षेत्र में बाल विवाह की रोकथाम और जागरूकता की जिम्मेदारी निभाता है। राजस्थान में अब प्रधानाचार्य, पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी इस भूमिका में होंगे।

प्रश्न 2: प्रधानाचार्य का कार्यक्षेत्र क्या होगा?
उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय का संबंधित वार्ड।

प्रश्न 3: क्या प्रधानाचार्य को पुलिस जैसी शक्तियां मिल गई हैं?
उत्तर: नहीं। कुछ जांच शक्तियां शर्तों और सीमाओं के अधीन दी गई हैं, लेकिन पुलिस जैसी असीमित शक्तियां नहीं हैं। मुख्य भूमिका निगरानी, रोकथाम और जागरूकता की है।

प्रश्न 4: शिक्षक संगठन विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का कहना है कि शिक्षकों पर पढ़ाई के अलावा पहले से ही करीब 50 तरह की गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की एक और कानूनी जिम्मेदारी से पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।

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