नागौर में हारे सरपंच को गाँव ने दिए 25 लाख रुपये: 162 वोट से हारीं चिड़ी देवी का थाली सजाकर सम्मान

चुनाव में हार के बाद आमतौर पर सन्नाटा छा जाता है, लेकिन नागौर जिले के एक गाँव ने इस सन्नाटे को जश्न में बदल दिया। नागौर हारे सरपंच 25 लाख की यह कहानी मोदी गाँव की है, जहाँ ग्रामीणों ने सरपंच चुनाव में हारने वाली अपनी प्रत्याशी चिड़ी देवी को 25 लाख रुपये भेंट किए। रकम थाली में सजाकर, ढोल-नगाड़ों के साथ उनके घर तक पहुँचाई गई। गाँव का संदेश साफ था — चुनाव का नतीजा कुछ भी रहा हो, गाँव की इज्जत और अपनेपन पर कोई हार नहीं होती।

यह घटना राजस्थान में चल रहे पंचायती राज चुनाव 2026 के पहले चरण के नतीजों के बाद सामने आई है। पहले चरण का मतदान 24 अक्टूबर को हुआ था, और नतीजे आते ही दो गाँवों में एक जैसी तस्वीर दिखी — हारे हुए प्रत्याशी का सम्मान। एक जगह 25 लाख, दूसरी जगह 15 लाख।

नागौर हारे सरपंच 25 लाख: 162 वोट से हारीं चिड़ी देवी

भादौरा ग्राम पंचायत के सरपंच पद के लिए मुकाबला मोदी गाँव की चिड़ी देवी और भादौरा गाँव की गिरिजा सांडू के बीच था। गिरिजा सांडू सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक माधो सिंह की पुत्रवधू हैं। वोटों की गिनती में गिरिजा सांडू को 1,317 वोट मिले और चिड़ी देवी को 1,155 वोट। फासला सिर्फ 162 वोट का रहा।

चिड़ी देवी 45 साल की हैं और एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पति हेमाराम राव भी किसान हैं। नतीजे घोषित होते ही मोदी गाँव के लोग इकट्ठा हुए। पहले हेमाराम राव के भाई ने 5 लाख रुपये की पहल की, फिर दूसरे संपन्न ग्रामीणों ने डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का योगदान दिया। देखते ही देखते थाली में 25 लाख रुपये सज गए।

गाँव के बुजुर्गों, युवाओं और प्रमुख लोगों ने फिर ढोल-बाजे के साथ यह रकम चिड़ी देवी के घर पहुँचाई। यह सिर्फ पैसों का लेन-देन नहीं था, बल्कि एक सार्वजनिक ऐलान था कि गाँव अपने प्रत्याशी के साथ खड़ा है। चुनाव में खर्च और मेहनत के बाद हारे हुए प्रत्याशी पर जो आर्थिक और मानसिक बोझ आता है, गाँव ने उसे मिलकर उठा लिया।

थाली सजी, ढोल बजे, घर तक पहुँचा सम्मान

इस सम्मान की सबसे खास बात इसका तरीका था। रकम चुपचाप किसी लिफाफे में नहीं दी गई, बल्कि थाली में सजाकर, गाजे-बाजे के साथ, सबके सामने दी गई। गाँव की सभा में यह बात भी दोहराई गई कि जीत-हार आती-जाती रहती है, लेकिन आपसी सम्मान स्थायी होता है।

हेमाराम राव के परिवार का गाँव से नाता सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है। उन्होंने पहले गाँव की गौशाला को एक ट्रैक्टर दान किया था और पीने के पानी की व्यवस्था भी करवाई थी। यही वजह है कि गाँव के लोग इस परिवार को सिर्फ एक चुनावी प्रत्याशी के परिवार के तौर पर नहीं देखते। सम्मान की थाली इसी पुराने रिश्ते की वापसी थी।

भुंडेल में गंगाराम को 15 लाख, गौशाला को 51 हजार

मोदी गाँव की खबर फैलते ही नागौर जिले में ही दूसरी ऐसी ही कहानी सामने आ गई। खींवसर पंचायत समिति के तहत आने वाली भुंडेल ग्राम पंचायत में भी सरपंच चुनाव हारे गंगाराम के लिए ग्रामीणों ने 15 लाख रुपये इकट्ठे किए। भुंडेल, श्रीयादे नगर और नेनाऊ गाँवों के लोगों ने मिलकर यह रकम जुटाई, ताकि चुनाव में हुए खर्च का बोझ गंगाराम को अकेले न उठाना पड़े।

गंगाराम ने इस सम्मान का जवाब भी उसी भावना से दिया। उन्होंने मिली हुई रकम में से 51,000 रुपये तुरंत स्थानीय गौशाला को दान कर दिए। यह कदम बताता है कि यह सिलसिला सिर्फ लेने-देने का नहीं है, बल्कि गाँव में एक-दूसरे की मदद की परंपरा का है। एक गाँव सम्मान देता है, दूसरा व्यक्ति उस सम्मान का एक हिस्सा फिर गाँव के काम में लौटा देता है।

विवरण मोदी गाँव (भादौरा पंचायत) भुंडेल पंचायत
जिला / पंचायत समिति नागौर / मूंडवा नागौर / खींवसर
हारे प्रत्याशी चिड़ी देवी (पति हेमाराम राव) गंगाराम
जीतने वाली प्रत्याशी गिरिजा सांडू —
वोटों का अंतर 162 वोट (1,317 बनाम 1,155) —
गाँव ने दी रकम 25 लाख रुपये 15 लाख रुपये
खास बात थाली में सजाकर, ढोल-बाजे के साथ घर तक सम्मान गंगाराम ने 51,000 रुपये गौशाला को दान किए

नागौर हारे सरपंच 25 लाख की कहानी क्यों चर्चा में है

पहला कारण है इसका उल्टा संदेश। आमतौर पर चुनावी हार के बाद प्रत्याशी अकेला पड़ जाता है और गाँव में खेमेबंदी बढ़ जाती है। यहाँ उल्टा हुआ — हार के बाद गाँव और ज्यादा एकजुट दिखा। दूसरा कारण है रकम का पैमाना। 25 लाख रुपये किसी गाँव के लिए छोटी रकम नहीं है, और इसे इकट्ठा करने में कई हाथ लगे। तीसरा कारण है इसका असर — यह खबर फैली तो दूसरे गाँव ने भी उसी राह पर चलकर अपने प्रत्याशी को 15 लाख दिए।

इसका एक और पहलू भी है। पंचायत चुनावों में खर्च एक बड़ी समस्या है। प्रत्याशी प्रचार और व्यवस्थाओं पर लाखों खर्च कर देते हैं, और हारने पर यह खर्च डूब जाता है। गाँव का यह सामूहिक सम्मान उस आर्थिक चोट को कम करता है, लेकिन यह सवाल भी छोड़ता है कि चुनाव इतने महँगे क्यों हो गए हैं।

पंचायत चुनाव 2026: क्या चल रहा है, आगे क्या

राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 चार चरणों में हो रहे हैं। पहले चरण का मतदान 24 अक्टूबर को हुआ, जिसके नतीजों के बाद ही ये दोनों सम्मान की घटनाएँ सामने आईं। दूसरे चरण का मतदान 28 अक्टूबर को है।

पाठकों के लिए इसका व्यावहारिक पहलू भी है। अगर आपके गाँव में भी पंचायत चुनाव हो रहे हैं, तो नतीजों के बाद की सबसे बड़ी जरूरत शांति और सौहार्द बनाए रखना है। जीतने वाले को बधाई और हारने वाले को सम्मान — यही परंपरा गाँव को टूटने से बचाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चिड़ी देवी कौन हैं और वे कितने वोट से हारीं?

चिड़ी देवी नागौर जिले के मोदी गाँव की निवासी हैं और भादौरा ग्राम पंचायत के सरपंच पद की प्रत्याशी थीं। वे गिरिजा सांडू से 162 वोट से हारीं — गिरिजा को 1,317 और चिड़ी देवी को 1,155 वोट मिले।

गाँव ने चिड़ी देवी को 25 लाख रुपये क्यों दिए?

नतीजे आने के बाद मोदी गाँव के लोगों ने हार के बावजूद अपने प्रत्याशी का सम्मान करने का फैसला किया। हेमाराम राव के भाई ने 5 लाख रुपये दिए, अन्य ग्रामीणों ने डेढ़-डेढ़ लाख का योगदान दिया, और कुल 25 लाख रुपये थाली में सजाकर उनके घर पहुँचाए गए।

भुंडेल में गंगाराम को कितनी रकम मिली और उन्होंने क्या किया?

भुंडेल ग्राम पंचायत के गाँवों ने सरपंच चुनाव हारे गंगाराम को 15 लाख रुपये दिए। गंगाराम ने इसमें से 51,000 रुपये स्थानीय गौशाला को दान कर दिए।

यह घटना राजस्थान के पंचायत चुनावों के किस चरण से जुड़ी है?

यह पहले चरण से जुड़ी है, जिसका मतदान 24 अक्टूबर को हुआ था। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 चार चरणों में हो रहे हैं, और दूसरा चरण 28 अक्टूबर को है। इस घटना की विस्तृत रिपोर्ट ETV Bharat पर पढ़ें।

नागौर की ये कहानियाँ बताती हैं कि गाँवों में चुनाव का मतलब सिर्फ कुर्सी नहीं होता। कभी-कभी हारने वाला भी गाँव का सिकंदर बन जाता है — बस उसे सम्मान देने वाले हाथ चाहिए होते हैं।

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