राजस्थान मेडिकल कॉलेज रैगिंग: 13 दिन में 8 शिकायतें, पाली से NMC ने मांगी रिपोर्ट

राजस्थान मेडिकल कॉलेज रैगिंग का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने सरकारी मेडिकल कॉलेज, पाली को 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। यह निर्देश जूनियर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार की एक गंभीर शिकायत के बाद आया है।

यह मामला किसी एक कॉलेज तक सीमित नहीं है। द ट्रिब्यून की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 10 से 23 अक्टूबर के बीच राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की 8 शिकायतें सामने आई हैं। 13 दिन में 8 शिकायतें — यह आंकड़ा हॉस्टल और कैंपस की निगरानी व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

एक बात शुरू में ही साफ रखना जरूरी है: शिकायत का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है। पाली मामले में जांच अभी चल रही है। लेकिन NMC ने यह भी साफ किया है कि छात्रों की सुरक्षा के कदम जांच पूरी होने का इंतजार नहीं कर सकते।

राजस्थान मेडिकल कॉलेज रैगिंग: 24 घंटे की रिपोर्ट में NMC ने क्या मांगा

NMC ने पाली कॉलेज से सामान्य जवाब नहीं, बल्कि बिंदुवार ब्योरा मांगा है। कमीशन यह जानना चाहता है कि कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी और एंटी-रैगिंग स्क्वॉड ने अब तक क्या किया, शुरुआती जांच में क्या सामने आया और जिन छात्रों पर आरोप हैं, उनकी पहचान की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है।

कमीशन ने यह भी पूछा है कि हॉस्टल वार्डन, सुरक्षा कर्मियों और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों से पूछताछ हुई है या नहीं, और निगरानी में कोई चूक पाई गई है या नहीं। कॉलेज को हॉस्टल सुरक्षा की पूरी व्यवस्था बतानी होगी — गार्ड की तैनाती, ड्यूटी रोस्टर, सुरक्षा राउंड और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स की निगरानी।

कॉलेज को यह भी बताना होगा कि दोबारा उत्पीड़न रोकने के क्या उपाय हैं, गोपनीय शिकायत व्यवस्था क्या है और काउंसलिंग की सुविधा है या नहीं। अंत में हर आरोप पर बिंदुवार टिप्पणी के साथ पूरी कार्रवाई रिपोर्ट भी सौंपनी है।

NMC ने क्या मांगा छात्रों के लिए इसका मतलब
24 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट कॉलेज जवाब टाल नहीं सकता
कमेटी और स्क्वॉड की कार्रवाई का ब्योरा कॉलेज की अपनी व्यवस्था की जांच होगी
वार्डन और सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ हॉस्टल निगरानी की चूक की जिम्मेदारी तय होगी
गार्ड, रोस्टर, राउंड और एंट्री-एग्जिट का ब्योरा हॉस्टल में कौन, कब मौजूद था, इसका हिसाब मिलेगा
दोबारा उत्पीड़न रोकने के उपाय शिकायतकर्ता को बदले की कार्रवाई से सुरक्षा मिले
गोपनीय शिकायत व्यवस्था और काउंसलिंग छात्र बिना डर के शिकायत कर सकें

13 दिन में 8 शिकायतें: आंकड़ा क्या कहता है

8 शिकायतों का आंकड़ा चिंता का विषय है, लेकिन इससे यह नतीजा निकालना गलत होगा कि हर शिकायत में आरोप साबित हो चुके हैं। शिकायत दर्ज होना और आरोप साबित होना दो अलग बातें हैं। फिर भी, इतने कम समय में इतनी शिकायतें यह जरूर दिखाती हैं कि छात्रों को अपनी बात कहने के लिए बाहर के मंचों की जरूरत पड़ रही है, या कॉलेज के भीतर की व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर है।

अक्टूबर में ही राजस्थान के अन्य मेडिकल कॉलेजों को लेकर भी NMC से रिपोर्ट मांगे जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं। कोटा मामले में भी इसी महीने NMC को शिकायत भेजी गई थी। इन मामलों को एक ही घटना मानना गलत होगा — हर कॉलेज, हर शिकायत और हर जांच अलग है — लेकिन एक साथ देखने पर यह साफ है कि हॉस्टलों में निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की जरूरत है।

पाली में आरोप क्या हैं

शिकायत के अनुसार, सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों के साथ गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें हॉस्टल के कमरों में बुलाया गया। शिकायत में कपड़े खोलने या उतारने के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। यह भी कहा गया है कि रैगिंग वीडियो कॉल के जरिए भी की गई और जूनियर छात्रों को अप्रैल तक ऐसी हरकतें जारी रखने की धमकी दी गई। हॉस्टल में सुरक्षा और निगरानी की कमी का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा गया है, ताकि शिकायत करने वाले छात्र को परेशानी न झेलनी पड़े।

फिर दोहराना जरूरी है: ये आरोप हैं, जांच का नतीजा नहीं। लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए NMC ने तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठाने पर जोर दिया है।

राजस्थान मेडिकल कॉलेज रैगिंग: हॉस्टल सुरक्षा ही असली परीक्षा है

इस मामले की असली परीक्षा हॉस्टल की रोजमर्रा की व्यवस्था में है। रात में वार्डन के राउंड होते हैं या नहीं, सुरक्षा गार्ड अपनी जगह पर मौजूद रहते हैं या नहीं, एंट्री-एग्जिट पर नजर रखी जाती है या नहीं — यही वे बिंदु हैं जहां रैगिंग को रोका जा सकता है। कागज पर कमेटी बना लेना काफी नहीं है; कमेटी और स्क्वॉड को जमीन पर सक्रिय रहना होता है।

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल ने पिछले 15 दिनों में सामने आई सभी शिकायतों की उच्च स्तरीय समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि जहां लापरवाही साबित हो, वहां डीन या प्रिंसिपल की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि रैगिंग कोई परंपरा नहीं है और न ही व्यक्तित्व विकास का तरीका — यह किसी छात्र के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को नुकसान पहुंचा सकती है।

शिकायत कैसे करें: छात्रों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारी

अगर कोई छात्र रैगिंग का शिकार हो रहा है, तो सबसे पहली बात यह है कि शिकायत करना उसका अधिकार है। नेशनल एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन 1800-180-5522 पर 24 घंटे, टोल-फ्री शिकायत की जा सकती है। antiragging.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है, और जरूरत पड़ने पर पहचान गोपनीय भी रखी जा सकती है। अपने कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी, स्क्वॉड या हॉस्टल वार्डन से भी संपर्क किया जा सकता है।

शिकायत करते समय तारीख, समय, जगह और घटना का लिखित ब्योरा रखना मददगार होता है। मैसेज या कॉल लॉग जैसे सबूतों को सुरक्षित रखना जांच में काम आता है। अभिभावकों को अपने बच्चों से नियमित बातचीत बनाए रखनी चाहिए और व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। मानसिक सहारे के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

सबसे अहम बात यह है कि शिकायत के बाद छात्र को धमकी या बदले की कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए। यही वजह है कि NMC ने पाली कॉलेज से शिकायतकर्ता और गवाहों की सुरक्षा के उपायों का ब्योरा भी मांगा है।

आगे क्या देखना होगा

अब सबकी नजर पाली कॉलेज की 24 घंटे की रिपोर्ट पर होगी। उससे साफ होगा कि शुरुआती जांच में क्या पाया गया और आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं — क्योंकि हॉस्टल सुरक्षित होगा, तभी पढ़ाई पर ध्यान लगेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रैगिंग की शिकायत सबसे पहले कहां करें?

नेशनल एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन 1800-180-5522 पर 24 घंटे टोल-फ्री शिकायत की जा सकती है। antiragging.in पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।

क्या शिकायत गुमनाम भी की जा सकती है?

हां, शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जा सकती है। पाली मामले में भी शिकायत गुमनाम तरीके से की गई है।

कॉलेज पर शिकायत मिलने पर क्या कार्रवाई होती है?

कॉलेज को तुरंत जांच शुरू करनी होती है, सुरक्षात्मक कदम उठाने होते हैं और NMC को तय समय में बिंदुवार रिपोर्ट सौंपनी होती है।

रैगिंग साबित होने पर सीनियर छात्रों पर क्या सजा हो सकती है?

आरोप साबित होने पर निलंबन, निष्कासन और गंभीर मामलों में पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है। सजा आरोप की गंभीरता और जांच के नतीजे पर निर्भर करती है।

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स्रोत: द ट्रिब्यून की रिपोर्ट

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