गंभीर बीमारी में सबसे कीमती चीज समय होता है, और अक्सर उसी समय की सबसे बड़ी परीक्षा जांच की कतार में होती है। उदयपुर के महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल से आई ताजा खबर उन हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आई है जो किसी अपने की सीटी स्कैन रिपोर्ट का इंतजार करते हैं। अस्पताल में दो नई सीटी स्कैन मशीनें लगाने का काम शुरू हो गया है। उदयपुर एमबी अस्पताल सीटी स्कैन की यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि आरएनटी मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमबी अस्पताल और उससे संबद्ध अस्पतालों में हर रोज 70 से 80 मरीजों को इस जांच की जरूरत पड़ती है।
उदयपुर एमबी अस्पताल सीटी स्कैन: जांच का इंतजार घटेगा
रोज 70 से 80 मरीजों की सीटी स्कैन जरूरत एक मशीन के भरोसे पूरी करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब इमरजेंसी के मरीज भी उसी कतार में आते हैं। सिर में चोट, स्ट्रोक के संदेह या पेट में अचानक तेज दर्द वाले मरीज की जांच में देरी का मतलब सीधे इलाज में देरी होता है।
दो नई मशीनों के जुड़ने से जांचों का बंटवारा हो जाएगा। एक मशीन पर दबाव कम होगा तो दूसरी पर भी कतार छोटी होगी। यह बात उन परिवारों के लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है जो दूर-दराज के गांवों से उदयपुर आते हैं और एक ही दिन में जांच कराकर लौटना चाहते हैं।
उदयपुर एमबी अस्पताल सीटी स्कैन विस्तार: दोनों मशीनें कहां लग रही हैं
पहली मशीन की स्थापना एमबी अस्पताल के कल्पना चावला पैथ लैब के भीतर शुरू कर दी गई है। पैथ लैब वह केंद्र है जहां पहले से तरह-तरह की प्रयोगशाला जांचें होती हैं। वहां सीटी स्कैन की सुविधा जुड़ने से मरीजों को एक ही परिसर में कई जांचें कराने में आसानी होगी।
दूसरी मशीन सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में लगाई जाएगी और उसके करीब एक महीने में स्थापित होने की उम्मीद जताई गई है। इस ब्लॉक में हृदय, न्यूरो, किडनी और अन्य विशेषज्ञ विभागों के मरीजों का इलाज होता है, जिन्हें अक्सर बारीक इमेजिंग की जरूरत पड़ती है। अपने ब्लॉक में ही मशीन होने से गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर पर दूर ले जाने की जरूरत कम पड़ेगी।
दक्षिणी राजस्थान के लिए एमबी अस्पताल की भूमिका
एमबी अस्पताल सिर्फ उदयपुर शहर का अस्पताल नहीं है। दक्षिणी राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के तौर पर यहां उदयपुर संभाग के साथ-साथ आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्यों की सीमा से लगे इलाकों से भी मरीज पहुंचते हैं। यह अस्पताल रवींद्रनाथ टैगोर (आरएनटी) मेडिकल कॉलेज से संबद्ध है, यानी यहां इलाज के साथ-साथ डॉक्टरों की पढ़ाई और प्रशिक्षण भी होता है।
मेडिकल कॉलेज से जुड़े होने का फायदा यह है कि यहां विशेषज्ञ और प्रशिक्षु डॉक्टरों की बड़ी टीम मौजूद रहती है। जांच की नई सुविधा का फायदा सिर्फ मरीजों को ही नहीं, बल्कि पढ़ाई कर रहे डॉक्टरों को भी मिलेगा।
सीटी स्कैन किन मरीजों के लिए सबसे जरूरी होता है
सीटी स्कैन में शरीर के अंदरूनी हिस्सों की बारीक तस्वीरें बनती हैं। यह जांच खासकर उन स्थितियों में काम आती है जहां डॉक्टर को जल्दी और साफ जानकारी चाहिए होती है। सड़क हादसे में सिर या छाती में लगी चोट के बाद अंदरूनी ब्लीडिंग का पता लगाने, स्ट्रोक के मरीज में दिमाग की स्थिति समझने और पेट में अचानक दर्द के कारण का पता लगाने में इसकी भूमिका अहम मानी जाती है।
आम एक्स-रे की तुलना में सीटी स्कैन कहीं ज्यादा विस्तार से जानकारी देता है। यही वजह है कि इमरजेंसी और गंभीर मामलों में डॉक्टर सबसे पहले इसी जांच की सलाह देते हैं। नई मशीनों के आने से इमरजेंसी के मरीजों को प्राथमिकता के साथ जल्दी जांच मिल सकेगी और सामान्य मरीजों की कतार भी धीरे-धीरे छोटी होगी।
मरीजों और परिजनों के लिए व्यावहारिक जानकारी
अगर आपके परिवार में किसी को डॉक्टर ने सीटी स्कैन की सलाह दी है, तो पुरानी रिपोर्टें और दवाओं की पर्ची साथ लेकर जाएं। डॉक्टर को मरीज की एलर्जी, किडनी की बीमारी या गर्भावस्था की जानकारी पहले से देना जरूरी है, क्योंकि कुछ जांचों में कंट्रास्ट डाई का इस्तेमाल होता है।
सरकारी अस्पताल में जांच के लिए संबंधित काउंटर से प्रक्रिया की जानकारी लें, क्योंकि हर विभाग की व्यवस्था अलग हो सकती है।
राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर भी चर्चा होती है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार मेडिकल ऑफिसर के 600 पदों के लिए करीब 30 हजार आवेदन आए थे। (मेडिकल ऑफिसर भर्ती: 600 पदों पर 30 हजार आवेदन) डॉक्टरों की भर्ती और जांच की मशीनों का विस्तार साथ-साथ आगे बढ़ें, तभी मरीजों को पूरा फायदा मिलेगा। भर्ती की पूरी जानकारी के लिए पहले प्रकाशित 600 पदों वाली भर्ती की खबर भी पढ़ें। उदयपुर की अन्य स्वास्थ्य खबरों के लिए उदयपुर स्वास्थ्य समाचार देखें।
एक नजर में: उदयपुर एमबी अस्पताल सीटी स्कैन विस्तार
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| अस्पताल | महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल, उदयपुर |
| संबद्ध संस्थान | आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर |
| नई मशीनें | 2 सीटी स्कैन मशीनें |
| पहली मशीन | कल्पना चावला पैथ लैब (स्थापना शुरू) |
| दूसरी मशीन | सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (करीब एक महीने में) |
| रोजाना जांच की जरूरत | 70 से 80 मरीज |
| मुख्य फायदा | जांच का दबाव कम, रिपोर्ट जल्दी |
| खबर की तारीख | 24 अक्टूबर 2026 |
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों मशीनें कब पूरी तरह चालू होती हैं। स्थापना का काम शुरू हो चुका है और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की मशीन के लिए करीब एक महीने का समय बताया गया है। मशीनें लग जाना ही काफी नहीं है, उनके लिए प्रशिक्षित तकनीशियन और रखरखाव की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
स्रोत: उदयपुर टाइम्स की मूल खबर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उदयपुर एमबी अस्पताल में कितनी नई सीटी स्कैन मशीनें लग रही हैं?
दो नई मशीनें लगाई जा रही हैं। एक की स्थापना कल्पना चावला पैथ लैब में शुरू हो गई है, जबकि दूसरी सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में करीब एक महीने में स्थापित होने की उम्मीद है।
एमबी अस्पताल में रोज कितने मरीजों को सीटी स्कैन की जरूरत पड़ती है?
रोज 70 से 80 मरीजों को इस जांच की जरूरत पड़ती है। इसी दबाव को कम करने के लिए नई मशीनें लगाई जा रही हैं।
नई मशीनों से मरीजों को क्या फायदा होगा?
जांचों का दबाव बंटेगा, कतार छोटी होगी और रिपोर्ट जल्दी मिल सकेगी। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के मरीजों को अपनी जांच के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
सीटी स्कैन जांच के लिए मरीज को क्या साथ लेकर जाना चाहिए?
डॉक्टर का परामर्श, पुरानी रिपोर्टें और दवाओं की पर्ची साथ रखें। एलर्जी, किडनी की बीमारी या गर्भावस्था की जानकारी डॉक्टर को पहले से जरूर बताएं।
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