बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले में राजकीय मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर ने 79 एमबीबीएस छात्रों पर एक साथ कार्रवाई की है। सबसे कड़ी मार 13 छात्रों पर पड़ी है — उन्हें छात्रावास से स्थायी रूप से निकाल दिया गया है और 30 से 60 कार्यदिवसों तक पढ़ाई की हर गतिविधि से भी बाहर रखा जाएगा। यानी ये छात्र इस अवधि में न लेक्चर में बैठ सकेंगे, न प्रैक्टिकल कर सकेंगे, न वार्ड पोस्टिंग पर जा सकेंगे और न ही परीक्षा दे सकेंगे।
यह कार्रवाई 2025 बैच के सीनियर छात्रों के खिलाफ हुई है, जिन पर प्रथम वर्ष के जूनियर्स के साथ रैगिंग और अपमानजनक व्यवहार के आरोप थे। जांच में बयानों और साक्ष्य के आधार पर हर छात्र की भूमिका अलग-अलग तय की गई, और सजा भी उसी हिसाब से स्तरवार सुनाई गई।
बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग: किसको क्या सजा मिली
एंटी-रैगिंग कमेटी की अनुशंसा पर हुई कार्रवाई चार हिस्सों में बंटी है — 13 छात्र सबसे गंभीर श्रेणी में, 11 दूसरी श्रेणी में, 50 को चेतावनी के साथ सीमित रोक लगी है, और 5 को चेतावनी के साथ अभिभावकों को बुलाने का निर्देश मिला है।
| छात्र | हॉस्टल कार्रवाई | पढ़ाई पर रोक | अन्य प्रतिबंध |
|---|---|---|---|
| 13 | स्थायी निष्कासन | 30-60 कार्यदिवस निलंबन | 1 साल खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों से बाहर |
| 11 | 30 कार्यदिवस के लिए निकाले गए | 15 दिन शैक्षणिक रोक | 1 साल खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों से बाहर |
| 50 | दोबारा गलती पर स्थायी निष्कासन की चेतावनी | 7 कार्यदिवस शैक्षणिक निलंबन | 1 साल खेल व सांस्कृतिक आयोजनों से निलंबन |
| 5 | सख्त चेतावनी | — | 3 दिन में माता-पिता को प्रशासन के सामने पेश करें |
चारों श्रेणियों को जोड़ने पर कुल 79 बनता है — 13 जमा 11 जमा 50 जमा 5। सबसे कड़ी कार्रवाई वाले 24 छात्रों पर एक साल तक किसी भी सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधि में हिस्सा लेने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग का मामला सामने कैसे आया
शुरुआत किसी औपचारिक शिकायत से नहीं, फैकल्टी सदस्यों की नजर से हुई। उन्होंने देखा कि कई जूनियर छात्रों ने बाल बहुत छोटे करा रखे हैं। गोपनीय बातचीत में छात्रों ने बताया कि सीनियर्स के दबाव के कारण उन्हें बाल कटवाने पड़े थे। इसके बाद प्रशासन को बाड़मेर शहर के एक सैलून से छात्रों के बाल कटवाने के वीडियो फुटेज भी मिले, और एंटी-रैगिंग कमेटी ने औपचारिक जांच शुरू की।
जांच में यह भी सामने आया कि सीनियर और जूनियर छात्रों के अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप बने हुए थे, और सीनियर्स ने निर्देश व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज से दिए थे। इसी डिजिटल निशान ने जांच को आगे बढ़ाया।
सीनियर्स पर क्या आरोप लगे
जांच के मुताबिक, सीनियर्स ने जूनियर्स पर छोटे बाल रखने, फॉर्मल कपड़े पहनने और सीनियर्स को एक तय लहजे में संबोधित करने का दबाव बनाया था। यह दबाव व्हाट्सऐप के जरिए दिया गया, यानी जूनियर्स को कैंपस के बाहर भी इन निर्देशों का पालन करना पड़ रहा था।
शिकायतों में इससे आगे के भी गंभीर आरोपों का जिक्र है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, जूनियर्स को कॉलेज से करीब तीन किलोमीटर दूर एक सुनसान स्थान पर स्थित कमरे — जिसे ‘व्हाइट हाउस’ कहा गया है — पर ले जाकर अपमानजनक निर्देश देने और आपत्तिजनक सामग्री पढ़ने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी शिकायत में शामिल है।
प्राचार्य का जीरो टॉलरेंस और एनएमसी की नजर
प्राचार्य डॉ. अनूप गुर्जर ने स्पष्ट किया है कि संस्थान रैगिंग, अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करता है, और किसी भी स्तर पर ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले ने प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों में हॉस्टल निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाड़मेर का मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब एनएमसी को राजस्थान के 12 अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों से प्रथम वर्ष के छात्रों के उत्पीड़न और रैगिंग की शिकायतें मिली हैं। एनएमसी ने सभी संस्थानों को निष्पक्ष जांच, सबूत सुरक्षित रखने और नए छात्रों की सुरक्षा के सख्त निर्देश दिए हैं। बाड़मेर मामले में भी एनएमसी ने कॉलेज से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जिसे प्रशासन भेज चुका है।
बाड़मेर मामला अकेला नहीं: पाली और कोटा में भी शिकायतें
बाड़मेर की कार्रवाई को अकेली घटना समझना गलत होगा। इसी महीने पाली मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले में एनएमसी ने 24 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, और कोटा मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले में भी फर्स्ट ईयर छात्रों ने एनएमसी को शिकायत भेजी थी। तीनों मामले अलग-अलग कॉलेजों और अलग-अलग शिकायतों के हैं, लेकिन एक साथ देखने पर हॉस्टल निगरानी मजबूत करने की जरूरत साफ दिखती है।
छात्र और अभिभावक क्या करें
अगर कोई छात्र रैगिंग का शिकार हो रहा है, तो शिकायत करना उसका अधिकार है, गलती नहीं। राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन 1800-180-5522 पर 24 घंटे टोल-फ्री शिकायत की जा सकती है। antiragging.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज होती है, और पहचान गोपनीय भी रखी जा सकती है। कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी, स्क्वॉड या हॉस्टल वार्डन से भी सीधे संपर्क किया जा सकता है। शिकायत में तारीख, समय, जगह और घटना का लिखित ब्योरा रखें, और मैसेज या कॉल लॉग जैसे सबूत सुरक्षित रखें।
अभिभावक बच्चों से नियमित बातचीत बनाए रखें और व्यवहार में अचानक बदलाव — कॉलेज जाने से कतराना, फोन पर घबराहट, नींद-भूख में गड़बड़ी — जैसे संकेतों पर ध्यान दें। शिकायत के बाद छात्र को धमकी या बदले की कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए; एनएमसी ने भी संस्थानों से शिकायतकर्ता और गवाहों की सुरक्षा के उपायों का ब्योरा मांगा है।
आगे क्या देखना होगा
अब नजर इस बात पर होगी कि निलंबन के बाद इन छात्रों की वापसी किन शर्तों पर होगी, और क्या बाड़मेर कॉलेज हॉस्टल निगरानी में स्थायी बदलाव करता है। एनएमसी की ओर से 12 कॉलेजों की शिकायतों पर आगे क्या निर्देश आते हैं, यह भी प्रदेश के मेडिकल छात्रों के लिए अहम होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामले में कितने छात्रों पर कार्रवाई हुई?
कुल 79 एमबीबीएस छात्रों पर — 13 स्थायी हॉस्टल निष्कासन, 11 को 30 कार्यदिवस हॉस्टल से बाहर, 50 को चेतावनी के साथ सीमित रोक, 5 को चेतावनी के साथ अभिभावक बुलाने का निर्देश।
13 छात्रों को हॉस्टल से निकालने के अलावा क्या सजा मिली?
30 से 60 कार्यदिवसों के लिए लेक्चर, प्रैक्टिकल, वार्ड पोस्टिंग और परीक्षाओं से निलंबन, और एक साल तक सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने पर रोक।
बाड़मेर मेडिकल कॉलेज रैगिंग का मामला कैसे सामने आया?
फैकल्टी ने जूनियर्स के बहुत छोटे बाल देखे, गोपनीय बातचीत में सीनियर्स का दबाव सामने आया, और सैलून के वीडियो फुटेज के बाद एंटी-रैगिंग कमेटी ने जांच शुरू की।
रैगिंग की शिकायत कहां और कैसे करें?
हेल्पलाइन 1800-180-5522 पर 24 घंटे टोल-फ्री शिकायत करें, antiragging.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें, या कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी या वार्डन से संपर्क करें। पहचान गोपनीय रखी जा सकती है।