राजस्थान में मातृत्व स्वास्थ्य को मिली बड़ी मजबूती: 19 मेडिकल कॉलेज और 58 जिला अस्पतालों में अक्टूबर में शून्य मातृ मृत्यु

जयपुर। राजस्थान की मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गुरुवार को एक ऐसी खबर आई, जो आने वाले महीनों में हजारों गर्भवती महिलाओं के लिए उम्मीद से कम नहीं है। प्रदेश के 19 मेडिकल कॉलेजों और 58 जिला अस्पतालों में अक्टूबर के महीने में एक भी मातृ मृत्यु दर्ज नहीं हुई है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक में ये आंकड़े सामने रखे और स्वास्थ्य तंत्र को इसे कायम रखने की सख्त हिदायत दी।

बैठक में यह भी बताया गया कि इस महीने अब तक 11,928 गर्भवती महिलाओं के प्रसव पूर्व जांच (ANC) पंजीकरण हो चुके हैं, जिनमें 6,175 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (HRP) को विशेष ANC कवरेज दिया गया है। मतलब साफ है — जोखिम वाली महिलाओं को अब पहले ही चिह्नित किया जा रहा है, ताकि प्रसव के समय कोई अप्रत्याशित खतरा न आए।

शून्य मातृ मृत्यु: राजस्थान के लिए क्यों बड़ी बात है

मातृ मृत्यु दर किसी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे सच्चा आईना होती है। एक मौत भी दर्ज न होना कोई संयोग नहीं, बल्कि लगातार निगरानी, बेहतर रेफरल व्यवस्था और समय पर जांच का नतीजा है। प्रदेश में 19 मेडिकल कॉलेज और 58 जिला अस्पताल — यानी कुल 77 बड़े चिकित्सा संस्थान — अक्टूबर में इस आंकड़े को कायम रखने में कामयाब रहे हैं।

इसके पीछे मुख्य वजह उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और उनका लगातार फॉलोअप है। मुख्य सचिव ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को महीने में दो बार समीक्षा बैठक करने और HRP मामलों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं, ताकि यह सिलसिला थमे नहीं।

11,928 ANC पंजीकरण: समय पर जांच ही सबसे बड़ा हथियार

बैठक में आए आंकड़ों पर एक नजर:

सेवा/कार्यक्रम अक्टूबर माह का आंकड़ा
मेडिकल कॉलेज (शून्य मातृ मृत्यु) 19
जिला अस्पताल (शून्य मातृ मृत्यु) 58
ANC पंजीकरण 11,928
HRP महिलाओं को ANC कवरेज 6,175
प्रसव सखी (सरकारी संस्थानों में) 1,318
104 जननी एक्सप्रेस + 108 एम्बुलेंस ट्रिप (19 अक्टूबर तक) 39,436
2026-27 में मॉड्यूलर OT बनने वाले मेडिकल कॉलेज 35

गर्भवती महिलाओं को समय पर प्रसव पूर्व जांच (ANC) सेवाएं देना इस समीक्षा की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताई गई। उच्च जोखिम वाली महिलाओं की पहचान, उनका इलाज और फॉलोअप — तीनों को एक सिस्टम में जोड़ने से ही यह परिणाम आया है।

35 मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर

बैठक में बुनियादी ढांचे पर भी अहम फैसले हुए। वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 35 मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (Modular OT) बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पुराने ऑपरेशन थिएटरों को भी मॉड्यूलर ओटी में अपग्रेड किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नए मॉड्यूलर OT के निर्माण और पुराने ओटी के अपग्रेडेशन के प्रस्ताव तैयार करके केंद्र सरकार को भेजे जाएं। इससे सर्जरी की सुविधा आधुनिक, संक्रमण-मुक्त और सुरक्षित हो सकेगी — खासकर सिजेरियन डिलीवरी जैसे मामलों में इसका सीधा फायदा माताओं को मिलेगा।

इसके अलावा अस्पतालों में जरूरी दवाओं और सर्जिकल सामान की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि इलाज के दौरान किसी मरीज को सामान की कमी की वजह से परेशानी न हो।

104 और 108: 39,436 ट्रिप में जुटी जीवनरक्षा की रफ्तार

रेफरल परिवहन व्यवस्था पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंद मरीजों के लिए चल रही 104 जननी एक्सप्रेस और आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा 108 के जरिए 19 अक्टूबर 2026 तक कुल 39,436 ट्रिप दर्ज किए गए।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि जरूरतमंद मरीज को सही स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने में देरी नहीं होनी चाहिए। रेफरल में देरी ही अक्सर मातृ मृत्यु का बड़ा कारण बनती है, इसलिए इस व्यवस्था को और तेज करना प्राथमिकता में है।

प्रसव सखी और स्टाफ की मेंटरिंग: गांव तक पहुंचेगा विशेषज्ञ अनुभव

प्रदेश की सरकारी चिकित्सा संस्थाओं में इस समय 1,318 प्रसव सखियां कार्यरत हैं। प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने निर्देश दिया कि मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ चिकित्सक अपने आसपास के डिलीवरी पॉइंट्स पर कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ की मेंटरिंग लगातार जारी रखें।

उन्होंने प्रसव और जांच सेवाओं के सही दस्तावेजीकरण तथा स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल उन्नयन (Skill Upgradation) पर भी जोर दिया। मतलब यह कि बड़े शहरों का विशेषज्ञ अनुभव अब गांव-देहात के डिलीवरी सेंटरों तक पहुंचेगा।

बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), RMSCL, चिकित्सा शिक्षा, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, जनस्वास्थ्य और RCH विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

गर्भवती महिलाओं के लिए: ये बातें काम की हैं

  • समय पर ANC पंजीकरण कराएं: सरकारी अस्पतालों में प्रसव पूर्व जांच मुफ्त है — जितनी जल्दी जांच, उतना सुरक्षित प्रसव।
  • 104 जननी एक्सप्रेस: प्रसव के लिए अस्पताल जाने हेतु मुफ्त वाहन सेवा — जरूरत पर 104 पर कॉल करें।
  • 108 एम्बुलेंस: आपात स्थिति में 24 घंटे उपलब्ध एम्बुलेंस सेवा।
  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था: अगर आपको उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है, तो नियमित फॉलोअप बिल्कुल न छोड़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. अक्टूबर में कितने संस्थानों में शून्य मातृ मृत्यु दर्ज हुई?

19 मेडिकल कॉलेजों और 58 जिला अस्पतालों में अक्टूबर माह में एक भी मातृ मृत्यु दर्ज नहीं हुई है। यह आंकड़ा मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में सामने आया।

2. ANC पंजीकरण और HRP कवरेज के क्या आंकड़े हैं?

अक्टूबर में 11,928 गर्भवती महिलाओं के ANC पंजीकरण हुए हैं, जबकि 6,175 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को विशेष ANC कवरेज दिया गया।

3. मॉड्यूलर OT कहां बनेंगे?

वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 35 मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाए जा रहे हैं, साथ ही पुराने ओटी का अपग्रेडेशन भी होगा।

4. जननी एक्सप्रेस और 108 सेवा का प्रदर्शन कैसा रहा?

19 अक्टूबर 2026 तक इन दोनों सेवाओं के जरिए कुल 39,436 ट्रिप दर्ज किए गए, जो जरूरतमंद मरीजों को सही समय पर अस्पताल पहुंचाने में मददगार रहे।

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