रात के अंधेरे में खेत में सिंचाई करने गए किसान के लिए सांप-बिच्छू का डर, कड़ाके की ठंड में रातभर जागने की मजबूरी और आधी रात को ट्यूबवेल का स्विच दबाने की थकान — राजस्थान के लाखों अन्नदाताओं की यही रोज़मर्रा की कहानी अब धीरे-धीरे बदल रही है। राज्य सरकार ने कृषि बिजली को दिन के उजाले में देने का जो मिशन शुरू किया था, वह अब 26 जिलों तक पहुंच चुका है। यानी इन जिलों के किसान अब रात की बजाय दिन में दो ब्लॉकों में बिजली पाकर खेतों की सिंचाई कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा के दौरान दावा किया है कि उनके 34 महीने के कार्यकाल में बिजली उत्पादन क्षमता के क्षेत्र में पांच गुना तक की उपलब्धि हासिल की गई है। सरकार का संकल्प है कि 2027 तक प्रदेश के हर जिले के किसानों को दिन के समय निर्बाध बिजली मिलेगी।
किन 26 जिलों के किसानों को मिल रही है दिन में बिजली
ऊर्जा विभाग के मुताबिक “टू ब्लॉक पावर सप्लाई” नेटवर्क से जुड़ने वाले जिलों की संख्या अब 26 हो गई है। ताज़ा विस्तार में चित्तौड़गढ़ और टोंक जिले शामिल हुए हैं — चित्तौड़गढ़ पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा कृषि उपभोक्ताओं वाला जिला है, जहां 1.01 लाख किसान इस योजना से सीधे जुड़े हैं। टोंक में 34,748 कृषि उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा। इससे पहले अप्रैल में दौसा और करौली को इस दायरे में लाया गया था।
तीनों डिस्कॉम्स का ब्योरा इस प्रकार है:
| डिस्कॉम | कुल जिले | जुड़े जिले | जिलों के नाम |
|---|---|---|---|
| अजमेर डिस्कॉम (AVVNL) | 14 | 13 | अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर, सलूंबर, प्रतापगढ़, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, सीकर, चित्तौड़गढ़ |
| जयपुर डिस्कॉम (JVVNL) | 15 | 10 | धौलपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डीग, भरतपुर, दौसा, करौली, टोंक |
| जोधपुर डिस्कॉम (JdVVNL) | 12 | 3 | जालौर, सिरोही, पाली |
यानी अजमेर डिस्कॉम में महज एक जिला बाकी है, जबकि जोधपुर डिस्कॉम के 12 में से 9 जिले अब भी इस नेटवर्क से बाहर हैं — पश्चिमी राजस्थान के किसानों को सबसे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है।
दो ब्लॉक सप्लाई आखिर है क्या और किसानों को इससे क्या फायदा
सामान्य भाषा में समझें तो पहले कृषि फीडरों पर बिजली ज्यादातर रात के घंटों में दी जाती थी। “टू ब्लॉक” व्यवस्था में किसानों को दिन के समय दो अलग-अलग ब्लॉकों में बिजली मिलती है — सुबह और दोपहर के सत्रों में। इससे किसान दिन के उजाले में सिंचाई कर पाते हैं।
इसके तीन सीधे फायदे हैं। पहला, सुरक्षा — रात में खेत जाने पर सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा टलता है। दूसरा, स्वास्थ्य — सर्दियों की रातों में जागकर सिंचाई करने से होने वाली बीमारियों से राहत मिलती है। तीसरा, बेहतर प्रबंधन — उजाले में किसान पानी का सही इस्तेमाल और फसल की देखभाल आसानी से कर पाते हैं। यही वजह है कि सरकार इसे किसानों के जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा फैसला बता रही है, सिर्फ बिजली की उपलब्धता का सवाल नहीं।
बिजली उत्पादन में “5 गुना” का दावा — आंकड़े क्या कहते हैं
मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी सरकार के 34 महीनों में पूर्ववर्ती सरकार के पहले 34 महीनों — बल्कि पूरे पांच साल के कार्यकाल — से कई गुना ज्यादा काम ऊर्जा क्षेत्र में हुआ है। सौर ऊर्जा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि को नीतियों की सफलता का परिणाम बताया गया है।
इस दावे की पृष्ठभूमि में कुछ ठोस घटनाक्रम भी हैं। इसी महीने बीकानेर के कलासर सोलर प्रोजेक्ट से NTPC की 153.94 मेगावाट नई सौर क्षमता कमर्शियल ऑपरेशन में आई है, और चित्तौड़गढ़-बीकानेर में ACME की 107.36 मेगावाट बैटरी स्टोरेज से कमर्शियल सप्लाई शुरू हुई है। दिन में पैदा होने वाली सौर बिजली को रात की मांग के लिए संग्रहित करना ही इस मिशन की असली रीढ़ है — और यही वजह है कि सरकार पंप स्टोरेज और बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही है।
दूसरी तस्वीर: सितंबर में 56 करोड़ यूनिट की कमी भी सामने आई
हालांकि उपलब्धियों के दावों के साथ दूसरी तस्वीर भी नजरअंदाज नहीं की जा सकती। सितंबर 2026 में देश में बिजली की कमी बढ़कर 56 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई थी — जो अगस्त 2023 के बाद सबसे बड़ी कमी थी — और राजस्थान उन 9 राज्यों में शामिल था जिन्होंने केंद्र से अतिरिक्त बिजली मांगी थी। सोलर बूम के चलते ग्रिड पर बढ़ते दबाव को लेकर ADB की रिपोर्ट के बाद ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर खुद एक्शन मोड में दिखे थे।
यानी चुनौती दोहरी है: उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं, उसे सही समय पर सही जगह पहुंचाना — ट्रांसमिशन नेटवर्क की मजबूती — भी उतना ही जरूरी है।
आगे की राह: DUM 2026 और ट्रांसमिशन का दांव
ऊर्जा क्षेत्र में अगला बड़ा मौका 27-28 अक्टूबर को जयपुर में है, जहां 10वां डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट (DUM 2026) होगा। देशभर की 40 से ज्यादा बिजली वितरण कंपनियां इसमें हिस्सा लेंगी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इसका उद्घाटन करेंगे। एजेंडे में अक्षय ऊर्जा का एकीकरण, ग्रिड आधुनिकीकरण और AI डेटा सेंटरों-इलेक्ट्रिक वाहनों से बढ़ती नई मांग जैसे विषय हैं।
सरकार का रोडमैप साफ है: उत्पादन में सौर-पवन पर जोर, भंडारण में पंप और बैटरी स्टोरेज को प्राथमिकता, और वितरण में उपभोक्ताओं को सस्ती-गुणवत्तापूर्ण बिजली। 2027 तक सभी जिलों में दिन की बिजली का लक्ष्य इसी रोडमैप का हिस्सा है। लेकिन असली परीक्षा जोधपुर डिस्कॉम के बाकी 9 जिलों और जयपुर डिस्कॉम के 5 जिलों में होगी — जहां काम सबसे धीमा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टू ब्लॉक पावर सप्लाई का मतलब क्या है?
कृषि फीडरों पर दिन के समय दो अलग-अलग ब्लॉकों (सुबह और दोपहर के सत्र) में बिजली देना, ताकि किसानों को रात में सिंचाई न करनी पड़े।
मेरा जिला कब जुड़ेगा?
अजमेर डिस्कॉम में 13/14 जिले जुड़ चुके हैं; जयपुर में 10/15 और जोधपुर में 3/12। सरकार का लक्ष्य 2027 तक सभी जिलों को जोड़ना है — डिस्कॉम और प्रसारण निगम चरणबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं।
क्या रात की बिजली पूरी तरह बंद हो जाएगी?
नहीं, योजना रात की आपूर्ति बंद करने की नहीं, बल्कि दिन में भरोसेमंद विकल्प देने की है ताकि किसान अपनी सुविधा से सिंचाई का समय चुन सकें।
बिजली से जुड़ी शिकायत कहां दर्ज करें?
राजस्थान संपर्क पोर्टल 181 पर बिजली-पानी की शिकायतें दर्ज होती हैं — पानी-बिजली को लेकर एक महीने में 11 लाख से ज्यादा शिकायतें आने का रिकॉर्ड भी इसी पोर्टल का है।