चित्तौड़गढ़/बीकानेर। राजस्थान की सौर ऊर्जा कहानी में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है — सूरज की बिजली को दिन में बनाकर शाम के लिए संभालकर रखने का अध्याय। ACME Solar Holdings ने प्रदेश में 107.36 मेगावाट डिस्चार्ज क्षमता और 437.49 मेगावाट-घंटा (MWh) ऊर्जा भंडारण वाली नई बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) क्षमता चालू कर दी है। कंपनी ने यह जानकारी शेयर बाजारों को दी गई सूचना में साझा की है। चालू की गई यह क्षमता दो अलग-अलग परियोजनाओं से आई है — एक चित्तौड़गढ़ जिले के नीमरी गांव में और दूसरी बीकानेर जिले के केलन गांव में। दोनों परियोजनाओं की कमर्शियल ऑपरेशन डेट यानी व्यावसायिक संचालन की तारीख 2 अक्टूबर 2026 तय की गई है। आसान भाषा में कहें तो 2 अक्टूबर से यह बैटरी भंडारण व्यवस्था औपचारिक रूप से बिजली व्यवस्था का हिस्सा बन जाएगी।
दो जिलों में एक साथ चालू हुए प्रोजेक्ट
पहली परियोजना चित्तौड़गढ़ जिले की रावतभाटा तहसील के नीमरी गांव में स्थित है। यहां FDRE यानी फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी परियोजना के पहले चरण में 53.73 मेगावाट / 222.969 MWh बैटरी स्टोरेज चालू किया गया है। यह काम कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई ACME Sigma Urja Private Limited के जरिए किया गया है। यह चरण कुल 250 मेगावाट / 1,069 MWh की बड़ी FDRE परियोजना का हिस्सा है। कंपनी ने साफ किया है कि फिलहाल सिर्फ बैटरी स्टोरेज वाला हिस्सा चालू हुआ है, जबकि इससे जुड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन वाला हिस्सा अभी विकास के चरण में है।
दूसरी परियोजना बीकानेर जिले के केलन गांव में है, जहां एश्योर्ड पीक पावर प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में 53.63 मेगावाट / 214.52 MWh क्षमता चालू की गई है। बीकानेर में इससे पहले के चरणों में भी बैटरी क्षमता चालू हो चुकी है और वहां की परियोजना के लिए SJVN Limited के साथ बिजली खरीद समझौता (PPA) जुड़ा हुआ है। दोनों नई परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय REIA के साथ 25 वर्ष के PPA की व्यवस्था बताई गई है, यानी लंबे समय तक बिजली की खरीद का भरोसा इन परियोजनाओं के साथ जुड़ा रहेगा।
आंकड़ों में समझिए पूरी तस्वीर
इस नई शुरुआत के बाद कंपनी की कुल चालू बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़कर 320.67 मेगावाट / 1,298.779 MWh हो गई है। इससे पहले यह आंकड़ा 213.31 मेगावाट / 861.289 MWh था। कंपनी की कुल परिचालन BESS क्षमता अब 4.96 गीगावाट-घंटा बताई गई है।
| विवरण | क्षमता |
|---|---|
| नीमरी, चित्तौड़गढ़ (FDRE चरण-1) | 53.73 MW / 222.969 MWh |
| केलन, बीकानेर (पीक पावर चरण-3) | 53.63 MW / 214.52 MWh |
| कुल नई चालू क्षमता | 107.36 MW / 437.49 MWh |
| पहले तक कुल चालू BESS | 213.31 MW / 861.289 MWh |
| अब कुल चालू BESS | 320.67 MW / 1,298.779 MWh |
| कमर्शियल ऑपरेशन डेट | 2 अक्टूबर 2026 |
बैटरी स्टोरेज क्यों है राजस्थान के लिए गेमचेंजर?
राजस्थान देश का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक राज्य है, लेकिन सौर बिजली की एक पुरानी दिक्कत रही है — बिजली दिन में बनती है, जबकि मांग का सबसे बड़ा दबाव शाम को आता है, जब सूरज ढल चुका होता है। दिन में जरूरत से ज्यादा बनी बिजली कई बार ग्रिड के लिए संभालना मुश्किल हो जाती है। बैटरी स्टोरेज इसी समस्या का सीधा जवाब है। दिन की अतिरिक्त सौर बिजली बैटरियों में जमा होगी और शाम की पीक मांग के समय वही बिजली ग्रिड को वापस मिलेगी। इससे बिजली की बर्बादी घटेगी, ग्रिड स्थिर रहेगा और शाम को महंगी बिजली खरीदने का दबाव भी कम होगा।
FDRE मॉडल की खासियत यही है कि यह सिर्फ बिजली बनाकर नहीं देता, बल्कि जरूरत के समय भरोसे के साथ बिजली उपलब्ध कराने का वादा करता है। इसीलिए दुनिया भर में सौर और पवन ऊर्जा के साथ बैटरी भंडारण को भविष्य की सबसे जरूरी तकनीक माना जा रहा है। राजस्थान जैसे राज्य के लिए, जहां सौर पार्क लगातार बढ़ रहे हैं, भंडारण क्षमता का बढ़ना उतना ही जरूरी है, जितना नए सौर प्लांट लगना। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में भंडारण ही तय करेगा कि सौर बिजली कितनी भरोसेमंद बन पाती है।
25 साल के PPA और आगे की तस्वीर
इन परियोजनाओं के साथ 25 वर्ष के लंबे PPA जुड़े होना निवेश के लिहाज से अहम माना जाता है, क्योंकि इससे कंपनी को लंबे समय तक आय का अनुमान रहता है और परियोजना का विस्तार आसान होता है। चित्तौड़गढ़ की FDRE परियोजना कुल 250 मेगावाट की है, जिसका उत्पादन वाला हिस्सा अभी बन रहा है। वह हिस्सा तैयार होने के बाद नीमरी साइट से सौर बिजली बनाकर सीधे बैटरी में जमा करने और जरूरत पर आपूर्ति करने का पूरा मॉडल जमीन पर उतरेगा। बीकानेर में भी चरणबद्ध तरीके से क्षमता बढ़ाई जा रही है, जहां पहले के चरण पहले ही चालू हो चुके हैं।
बाजार की नजर से देखें तो कंपनी का शेयर बुधवार को 439.85 रुपये पर बंद हुआ था। लेकिन आम पाठक के लिए असली खबर बाजार की नहीं, जमीन की है — प्रदेश के दो जिलों में बड़े पैमाने की बैटरी भंडारण व्यवस्था अब कागज से निकलकर चालू हालत में आ गई है। 2 अक्टूबर से व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि शाम की पीक मांग के समय यह भंडारण ग्रिड को कितनी राहत देता है। राजस्थान की सौर क्रांति अब उत्पादन के दौर से निकलकर भंडारण के दौर में प्रवेश कर चुकी है, और नीमरी व केलन की यह शुरुआत उसी बदलाव का ताजा सबूत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: BESS यानी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम क्या होता है?
जवाब: यह बड़े पैमाने की बैटरियों की व्यवस्था होती है, जिसमें बिजली जमा की जाती है और जरूरत पड़ने पर ग्रिड को वापस दी जाती है। सौर बिजली के मामले में दिन की बिजली शाम को इस्तेमाल करना इससे संभव होता है।
सवाल: ये दोनों प्रोजेक्ट कहां लगे हैं और कितनी क्षमता के हैं?
जवाब: एक प्रोजेक्ट चित्तौड़गढ़ जिले के नीमरी गांव में 53.73 MW का है और दूसरा बीकानेर जिले के केलन गांव में 53.63 MW का। दोनों मिलाकर 107.36 MW डिस्चार्ज और 437.49 MWh भंडारण क्षमता चालू हुई है।
सवाल: कमर्शियल सप्लाई कब से शुरू होगी?
जवाब: दोनों परियोजनाओं की कमर्शियल ऑपरेशन डेट 2 अक्टूबर 2026 तय की गई है। चालू करने की प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 को पूरी की गई थी।
सवाल: आम उपभोक्ता को इसका क्या फायदा होगा?
जवाब: बैटरी भंडारण से शाम की पीक मांग के समय ग्रिड पर दबाव घटेगा, बिजली आपूर्ति स्थिर रहने में मदद मिलेगी और दिन में बर्बाद होने वाली सौर बिजली का सही उपयोग हो सकेगा। इसका सीधा फायदा आपूर्ति की गुणवत्ता के रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।