राजस्थान के रेगिस्तान में सूरज की ताकत एक बार फिर बिजली में बदलकर ग्रिड तक पहुंच गई है। बीकानेर जिले के कलासर सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट से NTPC ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने 153.94 मेगावाट की अतिरिक्त सौर क्षमता को 1 अक्टूबर 2026 की आधी रात से व्यावसायिक उत्पादन यानी कमर्शियल ऑपरेशन में डाल दिया है। कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई सूचना में बताया कि प्रोजेक्ट के दूसरे हिस्से की 73.06 मेगावाट और तीसरे हिस्से की 80.88 मेगावाट क्षमता अब औपचारिक रूप से चालू हो गई है। यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि महज पांच दिन पहले, 26 सितंबर को इसी प्रोजेक्ट का पहला हिस्सा 81.34 मेगावाट चालू हुआ था। यानी एक हफ्ते के भीतर कलासर से कुल 235.28 मेगावाट सौर क्षमता ग्रिड से जुड़ चुकी है, और NTPC ग्रीन एनर्जी समूह की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 11,212.51 मेगावाट पहुंच गई है।
1 अक्टूबर से क्या बदला, आंकड़ों में समझिए
कंपनी ने यह जानकारी 29 सितंबर 2026 को सेबी के लिस्टिंग नियमों के प्रावधान 30 के तहत शेयर बाजारों को भेजी थी, जिसमें स्पष्ट लिखा था कि दोनों हिस्से 1 अक्टूबर की रात 12 बजे से कमर्शियल माने जाएंगे। कमर्शियल ऑपरेशन का सीधा मतलब होता है कि अब इस क्षमता से बनने वाली बिजली का हिसाब-किताब व्यावसायिक रूप से शुरू हो गया है — यानी प्लांट सिर्फ ट्रायल पर नहीं चल रहा, बल्कि बाकायदा उत्पादन करके आपूर्ति व्यवस्था का हिस्सा बन गया है। इस जोड़ के बाद NTPC ग्रीन एनर्जी समूह की कमर्शियल क्षमता 11,058.57 मेगावाट दर्ज की गई है, जबकि कुल स्थापित क्षमता 11,212.51 मेगावाट हो गई है। आंकड़ों की रफ्तार देखें तो समूह ने जुलाई में गुजरात के दाहोद प्रोजेक्ट से 68.22 मेगावाट, सितंबर में विंकी पवन परियोजना से क्षमता जोड़ने के बाद अब कलासर से लगातार दो बड़े हिस्से चालू किए हैं।
कलासर प्रोजेक्ट आखिर है क्या? RTC का मतलब भी जानिए
कलासर कोई अकेला छोटा प्लांट नहीं है। यह 650 मेगावाट के बड़े सोलर घटक का हिस्सा है, जो खुद 500 मेगावाट के REMCL राउंड-द-क्लॉक यानी RTC प्रोजेक्ट से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट को NTPC रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड बना रही है, जो NTPC ग्रीन एनर्जी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। बिजली की खरीद व्यवस्था राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड से भी जुड़ी बताई गई है, जबकि REMCL रेलवे की ऊर्जा प्रबंधन से जुड़ी कंपनी है। RTC शब्द यहां सबसे अहम है। आम सोलर प्लांट सिर्फ दिन में बिजली देता है, लेकिन राउंड-द-क्लॉक व्यवस्था का लक्ष्य सौर और पवन जैसे स्रोतों को जोड़कर दिन-रात भरोसेमंद स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना होता है, ताकि रेलवे जैसे बड़े उपभोक्ता और वितरण कंपनियां सिर्फ सूरज के भरोसे न रहें। यही वजह है कि कलासर जैसे प्रोजेक्ट को सिर्फ मेगावाट के आंकड़े से नहीं, बल्कि आपूर्ति की निरंतरता के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
| चरण | क्षमता | कमर्शियल ऑपरेशन |
|---|---|---|
| कलासर पहला हिस्सा | 81.34 मेगावाट | 26 सितंबर 2026 |
| कलासर दूसरा हिस्सा | 73.06 मेगावाट | 1 अक्टूबर 2026 |
| कलासर तीसरा हिस्सा | 80.88 मेगावाट | 1 अक्टूबर 2026 |
| कलासर पर कुल चालू क्षमता | 235.28 मेगावाट | — |
| NTPC ग्रीन समूह की कुल स्थापित क्षमता | 11,212.51 मेगावाट | 1 अक्टूबर के बाद |
राजस्थान के लिए यह खबर क्यों अहम है
बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर का इलाका देश के सबसे तेज धूप वाले क्षेत्रों में गिना जाता है, और भादला जैसे विशाल सोलर पार्कों के कारण पश्चिमी राजस्थान पहले से ही सौर ऊर्जा का राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। कलासर में हर नया चरण चालू होना इस स्थिति को और मजबूत करता है। इसका पहला फायदा राज्य की बिजली व्यवस्था को मिलता है, क्योंकि दिन के समय सस्ती सौर बिजली उपलब्ध होने से महंगी बिजली खरीद का दबाव घटता है। दूसरा फायदा स्थानीय स्तर पर दिखता है — बड़े प्रोजेक्ट चलते रहने से निर्माण, रखरखाव, सुरक्षा और परिवहन जैसे कामों में स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते रहते हैं। हालांकि ईमानदारी से यह भी समझना जरूरी है कि सौर क्षमता बढ़ने के साथ ग्रिड प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। दिन में एक साथ भारी उत्पादन और शाम को मांग के शिखर के बीच संतुलन बनाए रखना वितरण कंपनियों के लिए लगातार चुनौती रहता है, और RTC जैसी व्यवस्थाएं इसी चुनौती का जवाब मानी जाती हैं।
आगे क्या होगा: 650 मेगावाट के लक्ष्य की ओर
कलासर के 650 मेगावाट सोलर घटक में से अब तक 235.28 मेगावाट चालू हो चुके हैं, यानी करीब 414 मेगावाट क्षमता का काम आने वाले चरणों में पूरा होना बाकी है। कंपनी के प्रबंधन की ओर से पहले साझा की गई योजनाओं में कलासर के अलावा भादला में करीब 200 मेगावाट और गुजरात के खावड़ा में बड़े प्रोजेक्ट का जिक्र रहा है। बड़े स्तर पर NTPC ग्रीन एनर्जी वर्ष 2032 तक 60 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता का लक्ष्य लेकर चल रही है, और कलासर जैसी चरणबद्ध शुरुआतें उसी दिशा के कदम हैं। आम पाठक के लिए सार यही है कि 1 अक्टूबर से बीकानेर की धरती से 153.94 मेगावाट और स्वच्छ बिजली बननी शुरू हो गई है — यह न तो कोई घोषणा भर है, न भविष्य का वादा, बल्कि चालू हो चुका उत्पादन है, जिसकी औपचारिक सूचना शेयर बाजारों को दी जा चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: कलासर सोलर प्रोजेक्ट कहां है और अब वहां कुल कितनी क्षमता चालू है?
जवाब: यह प्रोजेक्ट राजस्थान के बीकानेर जिले में है। 26 सितंबर के 81.34 मेगावाट और 1 अक्टूबर के 153.94 मेगावाट को मिलाकर अब वहां कुल 235.28 मेगावाट क्षमता कमर्शियल ऑपरेशन में है।
सवाल: कमर्शियल ऑपरेशन में आने का मतलब क्या होता है?
जवाब: इसका मतलब है कि प्लांट की वह क्षमता परीक्षण के चरण से आगे बढ़कर औपचारिक रूप से बिजली उत्पादन और व्यावसायिक आपूर्ति के लिए तैयार घोषित कर दी गई है। कलासर के दोनों नए हिस्सों के लिए यह तारीख 1 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे तय की गई थी।
सवाल: RTC यानी राउंड-द-क्लॉक प्रोजेक्ट आम सोलर प्लांट से अलग कैसे है?
जवाब: आम सोलर प्लांट सिर्फ दिन में बिजली देता है, जबकि RTC व्यवस्था सौर और पवन जैसे स्रोतों को जोड़कर दिन-रात भरोसेमंद स्वच्छ बिजली देने के लिए बनाई जाती है। कलासर का 650 मेगावाट सोलर घटक 500 मेगावाट के REMCL RTC प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
सवाल: इस प्रोजेक्ट को कौन बना रहा है और आम उपभोक्ता को इससे क्या फायदा है?
जवाब: इसे NTPC रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड बना रही है, जो NTPC ग्रीन एनर्जी की सहायक कंपनी है। आम उपभोक्ता को सीधा फायदा बिजली व्यवस्था मजबूत होने से मिलता है — दिन में सस्ती सौर बिजली उपलब्ध रहने से आपूर्ति का दबाव घटता है और राज्य की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है।