वर्दी पहनकर जनता की हिफाजत की कसम खाने वाले ही जब उसी वर्दी की धौंस दिखाकर वसूली करने लगें, तो आम आदमी का भरोसा कहां बचेगा? खैरथल-तिजारा जिले में शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जिला विशेष टीम (DST) के दो कांस्टेबलों को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। आरोप है कि दोनों ने एक कारोबारी के कारखाने पर नकली मिठाई बनाने का झूठा आरोप लगाकर उसे इस कदर डरा-धमकाया कि वह रिश्वत देने को मजबूर हो गया।
यह खैरथल ACB ट्रैप एक आम कारोबारी की हिम्मत की कहानी भी है, जिसने डरने के बजाय शिकायत की और ब्यूरो की तेज कार्रवाई ने खाकी के दुरुपयोग को बेनकाब कर दिया।
खैरथल ACB ट्रैप: पूरी घटना का टाइमलाइन
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 21 अक्टूबर 2026 | DST प्रभारी गौरव और उनकी टीम के सदस्य ब्रजेश व ईश्वर सिंह सादे कपड़ों में कारोबारी के कारखाने पहुंचे; कैमरे हटवाए, नकली कलाकंद बनाने का आरोप लगाया, खाद्य विभाग से माल के नमूने लिए |
| 21 अक्टूबर 2026 | कारोबारी ने ACB चौकी अलवर प्रथम में शिकायत दर्ज कराई; ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें 2,20,000 रुपये की रिश्वत मांग की पुष्टि हुई |
| 23 अक्टूबर 2026 | ACB ने ट्रैप कार्रवाई कर दोनों कांस्टेबलों को 2 लाख रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया; रिश्वत की राशि बरामद |
कारखाने में दबिश: कैमरे हटवाए, नकली मिठाई का आरोप
परिवादी के अनुसार, 21 अक्टूबर को DST प्रभारी गौरव के साथ ब्रजेश और ईश्वर सिंह सादे कपड़ों में उसके कारखाने पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने कारखाने में लगे सीसीटीवी कैमरे हटवा दिए — ताकि जो कुछ होने वाला था, उसका कोई वीडियो सबूत न रहे। इसके बाद कारोबारी पर नकली कलाकंद बनाने का आरोप लगाकर खाद्य विभाग की टीम से तैयार माल के नमूने ले लिए गए।
DST का काम जिले में अपराध और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना है, लेकिन इस मामले में टीम ने खाद्य सुरक्षा जैसे विषय को दबाव बनाने का हथियार बना लिया। इसके बाद कारोबारी पर तैयार माल नष्ट करवाने और कारखाना सीज करने की कार्रवाई का दबाव बनाया जाने लगा। एक कारोबारी के लिए उसका तैयार माल ही उसकी पूंजी होती है — माल नष्ट होने या कारखाना सीज होने के डर ने उसे घबरा दिया।
रिश्वत की मांग और धमकी का पैटर्न
ACB की जांच के अनुसार, आरोपियों ने रिश्वत की मांग को चालाकी से बांट रखा था। ब्रजेश ने माल नष्ट करवाने से बचाने और कारखाना सीज नहीं करवाने की एवज में एक-दो दिन में 1,00,000 रुपये मांगे। वहीं, ईश्वर सिंह ने कारोबारी के परिचित अन्य व्यक्तियों से भी 50-50 हजार रुपये लेकर DST कार्यालय आने को कहा और रकम न देने पर उनके कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी।
सत्यापन में दोनों की ओर से कुल 2,20,000 रुपये की रिश्वत मांग स्पष्ट रूप से प्रमाणित पाई गई। यानी यह एक व्यक्ति से एक बार की मांग नहीं थी — कई कारोबारियों को निशाना बनाकर वसूली का जाल बिछाया गया था।
इसी तरह के एक अन्य मामले में हाल ही में राजसमंद में CGST नोटिस को रफादफा करने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले दलालों को ACB ने दबोचा था, और नाहरगढ़ में वन विभाग के कर्मचारियों पर भी ACB की कार्रवाई हुई थी — ब्यूरो इन दिनों वसूली के ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखे हुए है।
कौन हैं दोनों कांस्टेबल, अब आगे क्या होगा
गिरफ्तार कांस्टेबलों की पहचान ब्रजेश (नंबर 210) और ईश्वर सिंह (नंबर 333) के रूप में हुई है। दोनों खैरथल-तिजारा की DST में तैनात थे। ACB महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि यह कार्रवाई ACB मुख्यालय के निर्देश पर अलवर प्रथम चौकी की टीम ने पुलिस उप अधीक्षक शब्बीर खान के नेतृत्व में की।
दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल पूछताछ चल रही है और अनुसंधान जारी है। जांच में यह भी सामने आ सकता है कि 21 अक्टूबर को कारखाने पहुंची टीम में शामिल DST प्रभारी गौरव की क्या भूमिका थी, और क्या दोनों ने पहले भी इस तरह की वसूली की थी।
पुलिस महकमे के लिए यह मामला इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि हाल ही में प्रदेश के 24 पुलिस कांस्टेबलों ने इस्तीफा देकर चपरासी की नौकरी की तैयारी शुरू की थी — एक तरफ विभाग में असंतोष है, तो दूसरी तरफ कुछ वर्दीधारी वर्दी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
ACB का ट्रैप कैसे काम करता है: आम आदमी के लिए सीख
इस खैरथल ACB ट्रैप से सबसे बड़ी सीख यही है कि रिश्वत मांगने वालों से डरने के बजाय शिकायत करना सबसे कारगर रास्ता है। ACB पहले पीड़ित की शिकायत लेती है, फिर गुप्त तरीके से उसका सत्यापन कराती है ताकि मांग का पक्का सबूत मिल सके। सत्यापन में मांग प्रमाणित होने पर ही ट्रैप की योजना बनती है, जिसमें रिश्वत लेते समय आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा जाता है।
रिश्वत की राशि भी मौके से बरामद हो गई, जो अदालत में मजबूत सबूत बनेगी। अगर कारोबारी ने डरकर चुपचाप रकम दे दी होती, तो न ये दोनों पकड़े जाते और न दूसरे कारोबारियों को धमकाने का सिलसिला रुकता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: DST यानी जिला विशेष टीम क्या होती है?
उत्तर: DST जिले के पुलिस अधीक्षक के अधीन काम करने वाली विशेष टीम होती है, जिसका काम अपराधियों पर नजर रखना और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना जुटाना है। इस मामले में टीम के दो सदस्यों ने अपने पद का दुरुपयोग किया।
प्रश्न 2: रिश्वत मांगने पर ACB से शिकायत कैसे करें?
उत्तर: कोई भी व्यक्ति अपने जिले की ACB चौकी या ब्यूरो मुख्यालय में लिखित शिकायत दे सकता है। शिकायत के बाद ACB गुप्त सत्यापन कराती है और मांग प्रमाणित होने पर ट्रैप कार्रवाई करती है। शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखी जाती है।
प्रश्न 3: दोनों कांस्टेबलों पर कौन सा कानून लगेगा?
उत्तर: दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ है। इस कानून में लोकसेवक द्वारा रिश्वत लेने पर कठोर सजा का प्रावधान है, साथ ही विभागीय जांच में बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।
प्रश्न 4: रिश्वत की राशि बरामद होने का क्या मतलब है?
उत्तर: ट्रैप के दौरान रिश्वत की रकम का बरामद होना अदालत में सबसे मजबूत सबूत माना जाता है। इससे आरोपी के खिलाफ मामला मजबूत होता है और जमानत मिलना भी मुश्किल हो जाता है।
खैरथल-तिजारा का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि वर्दी का गलत इस्तेमाल करने वालों पर कानून की नजर जरूर पड़ती है — बस जरूरत है शिकायत करने की हिम्मत की। (स्रोत: News18)