किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी: वीआईपी ट्रेड के नाम पर करोड़ों का खेल, 4 आरोपी गिरफ्तार

अजमेर जिले के किशनगढ़ से आज सुबह एक बड़ी खबर सामने आई है। किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी के मामले में अजमेर पुलिस ने वीआईपी ट्रेड कंपनी के नाम पर फॉरेक्स ट्रेडिंग का जाल बिछाकर निवेशकों से करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने कंपनी के दो डायरेक्टर समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अकेले अजमेर जिले में इस कंपनी के खिलाफ ठगी के 40 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रियंका कुमावत के नेतृत्व वाली एसआईटी और गांधीनगर थानाधिकारी अनिल कुमार शर्मा की टीम ने की।

40 केस और करोड़ों की रकम: किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी का पैमाना

किशनगढ़ के गांधीनगर और मदनगंज थानों में पीड़ित निवेशकों की ओर से इस कंपनी के खिलाफ कुल 40 मामले दर्ज कराए गए हैं। कंपनी के खिलाफ दूसरे राज्यों में भी मामले सामने आए हैं, और शुरुआती पड़ताल में ठगी के तार राजस्थान के अन्य जिलों से भी जुड़े मिले हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि निवेशकों से कुल कितनी रकम जुटाई गई — पुलिस अब वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जुटाई गई रकम का कितना हिस्सा वास्तव में किसी कारोबार में लगा और बाकी रकम कहां खर्च हुई। गौरतलब है कि इससे पहले जयपुर में ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत 21 साइबर ठगों की गिरफ्तारी और 18.60 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ था।

8 से 12 प्रतिशत मुनाफे का जाल: निवेशकों को ऐसे फंसाया गया

पुलिस जांच में सामने आया है कि किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी में निवेशकों को फंसाने के लिए वीआईपी ट्रेड कंपनी (कुछ रिपोर्टों में बीआईपी ट्रेड) के नाम पर पूरी योजना के साथ काम किया जाता था। आरोपियों ने लग्जरी होटलों में भव्य सेमिनार आयोजित किए, जिनमें निवेशकों को कम समय में 8 से 12 प्रतिशत तक मुनाफे का लालच दिया जाता था। कंपनी के कथित टीम लीडर नए लोगों को ज्यादा कमाई का वादा करके निवेश के लिए प्रेरित करते थे। निवेशकों के जरिए उनके रिश्तेदारों और परिचितों को भी जोड़ने की कोशिश की जाती थी। शुरुआत में कुछ लोगों को मुनाफा भी दिया गया ताकि भरोसा पक्का हो जाए, लेकिन बाद में कई निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूब गई। पैसा वापस मांगने पर कूपन और ड्रॉ के जरिए रकम लौटाने के झूठे भरोसे दिए गए। कंपनी की वेबसाइट पर जमा राशि डॉलर में दिखाई जाती थी, जिससे निवेशकों को लगता था कि उनका पैसा सच में अंतरराष्ट्रीय फॉरेक्स बाजार में लग रहा है।

वीआरएफएक्स सॉफ्टवेयर और बाइनेंस वॉलेट: ठगी को असली दिखाने का खेल

ठगी को वास्तविक दिखाने के लिए आरोपियों ने वीआरएफएक्स नाम से एक विशेष सॉफ्टवेयर विकसित करवाया था। किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी की जांच में सामने आया है कि इसी सॉफ्टवेयर के जरिए निवेशकों को ट्रेडिंग से जुड़ी जानकारी दिखाई जाती थी। जांच में यूएसडीटी के माध्यम से रकम प्रदर्शित करने के लिए बाइनेंस वॉलेट के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इन डिजिटल माध्यमों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही है। जांच का दायरा ट्रेडिंग तक सीमित नहीं है — आरोपियों ने सस्ती जमीन पर “ड्रीम कोटा यार्डा” नाम से एक कॉलोनी भी विकसित की थी, जिसके जरिए भी निवेशकों से ज्यादा रकम लगवाई गई।

किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी के चारों आरोपी: डायरेक्टर से टीम लीडर तक

डायरेक्टर लोकेश चौधरी और धीरज गट्टानी को अजमेर सेंट्रल जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर गिरफ्तार किया गया; दो कथित टीम लीडर भी पकड़े गए। अनुसंधान के बाद तीन आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है, जबकि चौथे से पूछताछ जारी है।

आरोपी का नाम भूमिका वर्तमान स्थिति
लोकेश चौधरी कंपनी डायरेक्टर न्यायिक अभिरक्षा में
धीरज गट्टानी कंपनी डायरेक्टर न्यायिक अभिरक्षा में
अब्दुल समद टीम लीडर न्यायिक अभिरक्षा में
हनुमान छणंग टीम लीडर (कथित) पुलिस पूछताछ जारी

लोकेश चौधरी हरमाड़ा का निवासी है और किशनगढ़ की बजरंग कॉलोनी में रह रहा था। किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी के इन चारों आरोपियों में धीरज गट्टानी कुचामन सिटी का रहने वाला है। अब्दुल समद गांधीनगर के भिश्ती मोहल्ले का निवासी है, जबकि हनुमान छणंग किशनगढ़ की नारायण विहार कॉलोनी में रह रहा था। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और अन्य धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

छत्तीसगढ़ में भी पकड़ा जा चुका है यही नेटवर्क

फरवरी 2026 में छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में भी किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी से जुड़े इसी वीआईपी ट्रेड नेटवर्क के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वहां एक शिकायतकर्ता से 8 लाख 6 हजार 640 रुपये की ठगी हुई थी, और जांच में सामने आया था कि पूरा नेटवर्क राजस्थान से संचालित हो रहा था। इससे साफ है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था। किशनगढ़ में ही नकली सोना गिरवी रखकर 43 लाख रुपये के गोल्ड लोन फ्रॉड के मास्टरमाइंड को भी गांधीनगर थाने की पुलिस ने दबोचा था।

पुलिस की चेतावनी: निवेश से पहले इन 5 बातों की जांच जरूर करें

अजमेर पुलिस ने अपील की है कि किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी जैसे मामलों से बचने के लिए किसी भी कंपनी में निवेश से पहले उसकी कानूनी वैधता, वास्तविक कारोबार और मुनाफे के दावों की जांच जरूर करें। रातों-रात अमीर बनाने का लालच देने वाली योजनाओं से सावधान रहें।

  1. कंपनी का पंजीकरण जांचें: सिर्फ वेबसाइट देखकर भरोसा न करें।
  2. असंभव मुनाफे पर शक करें: 8 से 12 प्रतिशत मासिक मुनाफे जैसे दावे टिकाऊ नहीं होते।
  3. रिश्तेदारों के दबाव में न आएं: ठग अक्सर परिचितों के जरिए जाल फैलाते हैं।
  4. डॉलर-क्रिप्टो के भ्रम से बचें: वेबसाइट पर डॉलर में रकम दिखना असली ट्रेडिंग का सबूत नहीं।
  5. शिकार हों तो तुरंत शिकायत करें: 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी का पूरा मामला क्या है?
उत्तर: वीआईपी ट्रेड कंपनी के नाम पर फॉरेक्स ट्रेडिंग में 8 से 12 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर करोड़ों की ठगी की गई। अजमेर पुलिस ने 22 अक्टूबर 2026 को दो डायरेक्टर समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। अजमेर जिले में 40 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

प्रश्न 2: कौन-कौन गिरफ्तार हुआ है?
उत्तर: डायरेक्टर लोकेश चौधरी और धीरज गट्टानी, तथा टीम लीडर अब्दुल समद और हनुमान छणंग। तीन न्यायिक अभिरक्षा में हैं, चौथे से पूछताछ जारी है।

प्रश्न 3: डूबी रकम वापस मिलेगी?
उत्तर: पुलिस वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। पीड़ित अपने थाने में शिकायत दर्ज कराएं और 1930 हेल्पलाइन पर सूचना दें, ताकि रकम होल्ड होने पर दावा किया जा सके।

प्रश्न 4: ऐसी ठगी से कैसे बचें?
उत्तर: किशनगढ़ फॉरेक्स ठगी जैसी निवेश ठगी से बचने के लिए कंपनी का पंजीकरण जांचें, असंभव मुनाफे के वादों पर भरोसा न करें, बिना जांच पैसा न लगाएं और शिकायत तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर दर्ज करें।

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