अजमेर साइबर ठगी गिरफ्तारी: 14 लाख फ्रॉड का मुख्य आरोपी पकड़ा गया

अजमेर पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे म्यूल हंटर अभियान के तहत एक और बड़ी अजमेर साइबर ठगी गिरफ्तारी की है — 14 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी साबिर आलम को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया है, यानी वह किसी अन्य मामले में पहले से न्यायिक हिरासत में था और अब इस प्रकरण में भी उसकी गिरफ्तारी औपचारिक रूप से डाल दी गई है।

सिविल लाइन थाना पुलिस की यह कार्रवाई इसलिए भी अहम है, क्योंकि इस मामले में पहले ही दो आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। साबिर आलम की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क — किन खातों में पैसा गया, किन हाथों से होकर निकला — की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पूछताछ जारी है।

केस एक नज़र में

ठगी की रकम 14 लाख रुपये
मुख्य आरोपी साबिर आलम पुत्र मोहम्मद आलम
आरोपी का पता जामा मस्जिद क्षेत्र, लोहाखान (अजमेर)
गिरफ्तारी का आधार प्रोडक्शन वारंट
जांच थाना सिविल लाइन थाना, अजमेर
थाना अधिकारी शम्बू सिंह
मुकदमा दर्ज 5 अप्रैल 2026
पीड़ित रोहतास, निवासी मुरादाबाद (यूपी)
अब तक गिरफ्तारियां 3 (दो पहले, साबिर आलम अब)
अभियान म्यूल हंटर अभियान

अजमेर साइबर ठगी गिरफ्तारी — प्रोडक्शन वारंट पर पकड़ा गया मुख्य आरोपी

सिविल लाइन थाना अधिकारी शम्बू सिंह के अनुसार, साबिर आलम को प्रोडक्शन वारंट के जरिए गिरफ्तार किया गया है — यानी वह किसी अन्य प्रकरण में पहले से हिरासत में था, और अब अदालत के आदेश से इस मामले में भी औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाया गया है।

पुलिस के सामने अब तीन बड़े सवाल हैं — 14 लाख की रकम किन खातों में भेजी गई, उसे निकालने में किन लोगों की भूमिका रही, और इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क तो नहीं चल रहा। साबिर आलम पुत्र मोहम्मद आलम, निवासी जामा मस्जिद क्षेत्र लोहाखान, से पूछताछ शुरू हो गई है। इससे पहले दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं; पुलिस अब तीनों के बीच संबंधों, बैंक खातों और लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

14 लाख की ठगी का पूरा मामला — अप्रैल में दर्ज हुआ था मुकदमा

इस अजमेर साइबर ठगी गिरफ्तारी की जड़ में 5 अप्रैल 2026 को दर्ज एक मुकदमा है। शिकायत के अनुसार, पीड़ित रोहतास, निवासी मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के बैंक खातों से कुल 14 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।

जांच में सामने आया कि साइबर ठगी के ऐसे मामलों में बैंक खातों की कड़ी सबसे अहम होती है — ठगी की रकम पहले इन्हीं खातों में जमा होती है और फिर अलग-अलग तरीकों से निकाल ली जाती है। सिविल लाइन थाना पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रोहतास के खातों से निकली रकम किन खातों में भेजी गई और उसे निकालने में किन-किन लोगों ने साथ दिया। इस कड़ी में साबिर आलम की भूमिका को पुलिस मुख्य आरोपी की नजर से देख रही है।

म्यूल हंटर अभियान: बैंक खातों पर शिकंजा क्यों?

साइबर अपराधियों के खिलाफ अजमेर पुलिस का म्यूल हंटर अभियान उन्हीं बैंक खातों को निशाने पर लेता है, जिनसे ठगी की रकम इधर-उधर की जाती है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहते हैं।

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त धन को एक जगह से दूसरी जगह भेजने या निकालने में होता है। कई बार ये खाते दूसरों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके खोले जाते हैं, और रकम कई खातों के जरिए आगे भेजी जाती है ताकि असली स्रोत का पता न चले। ऐसे खातों की पहचान और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए ही म्यूल हंटर अभियान चलाया जाता है।

पत्रिका की एक पुरानी खबर के अनुसार, रामगंज थाना पुलिस की 1100 पेज की चार्जशीट में सबरे आलम (लोहाखान) को अजमेर के साइबर ठगी नेटवर्क का सरगना बताया गया था — यानी लोहाखान से जुड़ा यह नाम पहले से पुलिस के राडार पर था। ताजा गिरफ्तारी उसी बड़ी तस्वीर की नई कड़ी है। इससे पहले किशनगढ़ में फॉरेक्स ठगी के गिरोह का पर्दाफाश और त्योहारी सीजन में साइबर ठगी पर पुलिस एडवाइजरी भी सामने आ चुकी है।

साइबर ठगी से बचने के 7 जरूरी नियम

इस मामले से एक बात साफ है — बैंक खातों और पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग साइबर अपराध का सबसे बड़ा हथियार है। अपनी सुरक्षा के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

  1. आधार कार्ड और बैंक डिटेल कभी साझा न करें — कोई भी असली बैंक या सरकारी एजेंसी फोन पर OTP, CVV या आधार नंबर नहीं मांगती।
  2. अपना खाता किसी को इस्तेमाल न करने दें — किसी दूसरे को अपना खाता इस्तेमाल करने देना या अजनबी रकम आगे भेजना आपको भी फंसा सकता है।
  3. अनजान लिंक और ऐप से सावधान रहें — ठगी की शुरुआत अक्सर एक फर्जी लिंक या कॉल से होती है।
  4. संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत एक्शन लें — खाते में अजीब लेन-देन दिखे तो फौरन बैंक और साइबर सेल को सूचित करें।
  5. 1930 हेल्पलाइन याद रखें — साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें; जल्दी शिकायत से पैसा फ्रीज होने की संभावना बढ़ती है।
  6. cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें — राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
  7. लालच वाले ऑफर पर भरोसा न करें — “घर बैठे दोगुनी कमाई” जैसे ऑफर अक्सर ठगी का जाल होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अजमेर साइबर ठगी गिरफ्तारी में साबिर आलम कौन है?

साबिर आलम (लोहाखान, अजमेर) 14 लाख की साइबर ठगी का मुख्य आरोपी है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने उसे म्यूल हंटर अभियान के तहत प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है।

प्रोडक्शन वारंट क्या होता है?

जब कोई आरोपी किसी अन्य मामले में पहले से न्यायिक हिरासत में हो और पुलिस को किसी दूसरे प्रकरण में भी उसकी गिरफ्तारी चाहिए होती है, तो अदालत के आदेश (प्रोडक्शन वारंट) से उसे उस मामले में भी औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाया जाता है।

म्यूल अकाउंट क्या होता है?

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने या निकालने में होता है। कई बार ये खाते दूसरों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके खोले जाते हैं।

इस अजमेर साइबर ठगी गिरफ्तारी का क्या असर होगा?

अब तक तीन — दो आरोपी पहले पकड़े गए थे, अब मुख्य आरोपी साबिर आलम गिरफ्तार हुआ है। पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश में पूछताछ कर रही है।

साइबर ठगी का शिकार होने पर कहां शिकायत करें?

तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।

22 अक्टूबर 2026 की कार्रवाई पर आधारित; जांच जारी है।

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