एक अकेला बैंक खाता — बस इतना ही काफी होता है एक साइबर ठग के लिए करोड़ों की हेराफेरी शुरू करने के लिए। अब कल्पना कीजिए: 21 ठगों का जाल, 101 पीड़ितों की शिकायतें और कुल ₹18 करोड़ 60 लाख की ठगी। जयपुर दक्षिण पुलिस ने 17 अक्टूबर को “ऑपरेशन म्यूल हंटर” के तहत इस नेटवर्क का पर्दाफाश करके देशभर में फैले अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह को सलाखों के पीछे धकेल दिया है। यह जयपुर साइबर ठग गिरफ्तार अभियान इस साल की सबसे बड़ी साइबर कार्रवाइयों में गिना जा रहा है।
यह कहानी सिर्फ गिरफ्तारियों की नहीं है। ठग OLX पर सस्ती गाड़ी के विज्ञापन से लेकर “CBI अधिकारी” बनकर डिजिटल अरेस्ट तक — हर हथकंडा अपनाते हैं। और पुलिस अब उनके सबसे जरूरी हथियार, फर्जी बैंक खातों यानी “म्यूल अकाउंट्स” की जड़ में चोट कर रही है।
ऑपरेशन म्यूल हंटर: जयपुर साइबर ठग गिरफ्तार — 15 केस, 21 गिरफ्तारी
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के डीसीपी साउथ राजर्षि राज के मुताबिक, म्यूल बैंक खातों के खिलाफ पिछले दिनों एक विशेष अभियान चलाया गया था। इसी अभियान को “ऑपरेशन म्यूल हंटर” नाम दिया गया। इसके तहत पुलिस ने कुल 15 प्रकरण दर्ज किए और इन मामलों में 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
सबसे अहम बात यह है कि पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मिले बैंक खातों और पासबुक की जांच राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 के पोर्टल पर की। जांच में पता चला कि इन खातों से देश के अलग-अलग राज्यों की 101 साइबर शिकायतें जुड़ी हुई हैं। इन्हीं शिकायतों से कुल ₹18.60 करोड़ की साइबर ठगी की रकम का खुलासा हुआ। पुलिस ने अब तक ठगों के खातों में ₹45 लाख 83 हजार 504 रुपये होल्ड भी करवा दिए हैं।
डीसीपी राजर्षि राज के मुताबिक यह पहला मौका है जब म्यूल अकाउंट चलाने वाले कई लोगों को भी इसी ऑपरेशन में गिरफ्तार किया गया है। पहले पुलिस ठगों के पीछे भागती थी, अब ठगों के “बैंक खातों” के पीछे जा रही है — और यहीं से गिरोह की जड़ें उखड़ती हैं।
जयपुर साइबर ठग गिरफ्तार: म्यूल अकाउंट की जड़ में पुलिस की चोट
“म्यूल अकाउंट” शब्द भले ही तकनीकी लगे, लेकिन खेल सीधा है — ठग 8 से 10 हजार रुपये के कमीशन के लालच में आम लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। ठगी की रकम इन्हीं खातों में आती है, फिर मिनटों में दर्जनों खातों में बांटकर निकाल ली जाती है।
ऑपरेशन म्यूल हंटर में पुलिस ने रणनीति बदली — खाता खुलवाने वालों, चलाने वालों और बेचने वालों को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस की अपील साफ है: कमीशन के लालच में अपना खाता किसी को किराए पर न दें, वरना आप भी आरोपी बन सकते हैं।
फर्जी KYC के जरिए दूसरे राज्यों में संदिग्ध खाते खुलवाना इस गिरोह का खास हथियार था। 15 लोगों के फर्जी पैन-आधार कार्ड का मिलना बताता है कि गिरोह के पास पहचान-पत्रों का पूरा कारखाना था।
ठगों के 6 जाल: सस्ती गाड़ी से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक
- 1. OLX पर सस्ती गाड़ी का झांसा: कम कीमत की गाड़ी के विज्ञापन से खरीदारों को फंसाया जाता।
- 2. फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट: असली जैसे दिखने वाले नकली स्क्रीनशॉट भेजकर सामान या रकम हड़प ली जाती।
- 3. डिजिटल अरेस्ट का डर: खुद को पुलिस या CBI अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर “गिरफ्तारी” की धमकी। बता दें, कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज होती ही नहीं। (जयपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.74 करोड़ की ठगी इसी की ताजा मिसाल है।)
- 4. कमीशन के लालच में म्यूल खाते: आम लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम घुमाना; आरोपी 8-10 हजार रुपये में म्यूल अकाउंट खरीदते-बेचते थे।
- 5. हवाला का डर दिखाकर ठगी: CBI अधिकारी बनकर “हवाला के पैसों” का डर दिखाकर रकम ऐंठना।
- 6. फेसबुक पर 3D मूर्ति का एडवांस: एडवांस लेकर गायब हो जाना, और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए खाते खाली करना।
बरामद माल की सूची: थाई करेंसी, स्कॉर्पियो और 38 मोबाइल फोन
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से मिली चीजों की सूची देखकर ठगी के पैमाने का अंदाजा लगता है:
| बरामद सामान | मात्रा |
| नकद रुपये | ₹2,04,500 |
| थाई करेंसी के नोट | 12 |
| मोबाइल फोन | 38 |
| लग्जरी स्कॉर्पियो कार | 1 |
| बैंक चेकबुक | 25 |
| बैंक पासबुक | 20 |
| ATM/डेबिट कार्ड | 30 |
| फर्जी पैन-आधार कार्ड | 15 लोगों के |
2026 में जयपुर पुलिस का साइबर रिकॉर्ड: आंकड़े खुद बोलते हैं
यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई — इसके पीछे 2026 की शुरुआत से चली आ रही लगातार मेहनत है। प्रदेश में बढ़ती साइबर ठगी पर लगाम लगाने के इस अभियान के जयपुर पुलिस के आंकड़े कुछ इस तरह हैं:
1 जनवरी से 17 अक्टूबर 2026 तक 31,976 लंबित साइबर शिकायतों में से 25,808 का निस्तारण किया गया।
इस दौरान 542 मोबाइल फोन बरामद करके पीड़ितों को लौटाए गए।
साइबर ठगों के खातों में ₹8.84 करोड़ से अधिक की रकम होल्ड करवाई गई।
“ऑपरेशन वज्र प्रहार 2.0” के तहत ₹1.77 करोड़ से अधिक की राशि पीड़ितों को रिफंड कराई गई।
पुलिस की एडवाइजरी: ठगी से बचने के लिए ये 5 बातें गांठ बांध लें
डीसीपी राजर्षि राज ने लोगों से अपील की है कि कटाई लालच में न पड़ें और न ही किसी अनजान कॉलर के डर से दबें:
1. लालच भरे ऑफर पर शक करें — OLX पर बेहद सस्ती गाड़ी या निवेश पर दोगुना मुनाफा जैसे ऑफर अक्सर जाल होते हैं।
2. किसी को अपना खाता किराए पर न दें — कमीशन के लालच में खाता खुलवाना आपको भी अपराधी बना सकता है।
3. अनजान वेबसाइट, ऐप और लिंक से दूर रहें — बिना जरूरत के कोई लिंक न खोलें, कोई ऐप न इंस्टॉल करें।
4. डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकी को न मानें — कोई असली अधिकारी फोन पर गिरफ्तारी या पैसे ट्रांसफर की मांग नहीं करता।
5. शिकार हो जाएं तो तुरंत 1930 पर कॉल करें — साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: ऑपरेशन म्यूल हंटर में कितने ठग गिरफ्तार हुए?
उत्तर: जयपुर दक्षिण पुलिस ने इस ऑपरेशन में 15 प्रकरण दर्ज करके कुल 21 अंतरराज्यीय साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है।
प्रश्न 2: इस गिरोह ने कितनी रकम की ठगी की?
उत्तर: आरोपियों के खातों से जुड़ी 101 शिकायतों की जांच में कुल ₹18.60 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा हुआ; ₹45.83 लाख खातों में होल्ड कराए गए हैं।
प्रश्न 3: म्यूल अकाउंट क्या होता है?
उत्तर: म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते हैं जो ठग दूसरों के नाम पर (अक्सर कमीशन के लालच में) खुलवाते हैं और ठगी की रकम इन्हीं खातों के जरिए घुमाते हैं। इस ऑपरेशन में पुलिस ने पहली बार म्यूल अकाउंट चलाने वालों को भी गिरफ्तार किया है।
प्रश्न 4: साइबर ठगी की शिकायत कहां दर्ज कराएं?
उत्तर: तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। जल्दी शिकायत करने पर रकम होल्ड होने की संभावना बढ़ जाती है।
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