अलवर जिले के मेवात इलाके से चल रहा एक ऐसा साइबर ठगी का गिरोह राजस्थान पुलिस ने तोड़ दिया है, जिसके तार बांग्लादेश तक फैले हुए थे। इस गिरोह ने वर्ष 2024 से अब तक करीब एक हजार बांग्लादेशी नागरिकों को अपना निशाना बनाया और एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। पुलिस ने बुधवार को अलवर जिले के उसकसी गांव में दबिश देकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने पांच मोबाइल फोन, तीन एटीएम कार्ड और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं। अलवर जिला पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि यह गिरोह भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को निशाना बनाता था और इसमें कुल 20 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
₹1 करोड़ का जाल: हनीट्रैप से ब्लैकमेल तक का पूरा खेल
यह मामला आम साइबर फ्रॉड से बिल्कुल अलग है। गिरोह के सदस्य महिलाओं के नाम पर सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाते थे और बांग्लादेशी नागरिकों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते थे। दोस्ती बढ़ने के बाद ये ठग महिला बनकर वीडियो कॉल करते थे। वीडियो कॉल के दौरान सामने वाले व्यक्ति की नग्न फोटो या वीडियो हासिल करके उसे ब्लैकमेल किया जाता था।
एसपी सुधीर चौधरी के अनुसार, ठगी की रकम वसूलने के लिए बांग्लादेश में सक्रिय डिजिटल वॉलेट ‘बिकाश ऐप’ के नंबरों का इस्तेमाल किया जाता था। पीड़ित के इन नंबरों पर रकम भेजते ही बांग्लादेश में बैठे गिरोह के मददगार कमीशन काटकर भारत के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते थे। इस तरह पैसा सीमा पार होते-होते ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह 2024 से सक्रिय था। दो साल से भी ज्यादा समय में करीब एक हजार बांग्लादेशी नागरिक इसके जाल में फंसे। एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आंकड़ा अभी प्रारंभिक है — जांच आगे बढ़ने पर यह राशि और बढ़ सकती है।
बुधवार की दबिश: गोठड़ा गांव के चारों आरोपी पकड़े गए
पुलिस को गिरोह की गतिविधियों की पुख्ता सूचना मिली थी, जिसके बाद बुधवार को उसकसी गांव में छापेमारी की गई। गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी अलवर जिले के गोठड़ा गांव के निवासी हैं — शालिम खान, दीपू खान, निजामुद्दीन और राहुल खान।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरोह में 20 लोगों के शामिल होने की जानकारी मिली है। इसका मतलब है कि गिरफ्तार चार आरोपी सिर्फ एक कड़ी हैं। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें सक्रिय हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का नेटवर्क बांग्लादेश में किन हैंडलर्स से जुड़ा था और ठगी की रकम का पूरा रास्ता क्या था।
क्यों निशाना बने बांग्लादेशी नागरिक?
इस गिरोह की सबसे खतरनाक रणनीति थी अपने पीड़ितों का चुनाव। भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाया गया। इसके पीछे एक सोची-समझी वजह हो सकती है — ऐसे पीड़ित अक्सर डर या शर्म के मारे पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराते। गिरोह को यह भी भरोसा था कि विदेशी नंबरों और बिकाश ऐप जैसे रास्तों से पैसे भेजे जाएंगे तो ट्रैकिंग मुश्किल होगी।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पार ठगी के ऐसे गिरोहों का मॉडल तेजी से फैल रहा है। डिजिटल वॉलेट, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और हनीट्रैप — इन तीनों का मिश्रण ठगों के लिए फायदेमंद बनता जा रहा है। इससे पहले भी राजस्थान में ठगी के बड़े मामले सामने आए हैं — किशनगढ़ में फॉरेक्स ठगी के नाम पर करोड़ों का खेल और अजमेर में 14 लाख के साइबर फ्रॉड के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी इसके ताजा उदाहरण हैं।
एक नजर में: अलवर साइबर ठगी गिरोह मामला
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गिरोह का ठिकाना | अलवर जिले का मेवात क्षेत्र |
| निशाना | बांग्लादेशी नागरिक (भारत में रह रहे) |
| ठगी की अवधि | वर्ष 2024 से अब तक |
| पीड़ितों की संख्या | करीब 1,000 बांग्लादेशी नागरिक |
| ठगी की राशि | ₹1 करोड़ से अधिक |
| गिरफ्तार आरोपी | शालिम खान, दीपू खान, निजामुद्दीन, राहुल खान |
| आरोपियों का गांव | गोठड़ा, जिला अलवर |
| दबिश का स्थान | उसकसी गांव, अलवर |
| बरामद सामान | 5 मोबाइल फोन, 3 एटीएम कार्ड, 2 सिम कार्ड |
| गिरोह में शामिल | कुल 20 लोग (जांच जारी) |
| पैसा भेजने का जरिया | बिकाश ऐप (बांग्लादेश का डिजिटल वॉलेट) |
राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी: व्हाट्सएप ठगी से बचें
इस मामले के साथ ही राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराध को लेकर एक व्यापक एडवाइजरी भी जारी की है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) वी. के. सिंह ने बताया कि देश में व्हाट्सएप अकाउंट हैक करने के मामले सामने आने के बाद यह एडवाइजरी जारी की गई है।
साइबर ठग फर्जी क्यूआर कोड, सोशल इंजीनियरिंग और ओटीपी हासिल करने के बहाने व्हाट्सएप अकाउंट में सेंध लगाते हैं। अकाउंट पर नियंत्रण मिलते ही वे संपर्क सूची में शामिल परिचितों को इलाज या आपात समस्या का हवाला देकर रुपये मांगने के संदेश और संदिग्ध लिंक भेजते हैं। इसके बाद वे सीधे पैसों की मांग करते हैं।
पुलिस की सलाह है कि अनजान क्यूआर कोड स्कैन न करें, किसी को अपना ओटीपी न बताएं और वीडियो कॉल पर अनजान लोगों के बहकावे में न आएं। संदिग्ध गतिविधि दिखते ही तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। गौरतलब है कि राजस्थान पुलिस ने हाल ही में सरकारी ईमेल के गलत इस्तेमाल पर भी सख्त आदेश जारी किया था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: अलवर साइबर ठगी गिरोह में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
उत्तर: पुलिस ने बुधवार को अलवर के उसकसी गांव में दबिश देकर चार आरोपियों — शालिम खान, दीपू खान, निजामुद्दीन और राहुल खान — को गिरफ्तार किया है। ये चारों अलवर के गोठड़ा गांव के रहने वाले हैं। गिरोह में कुल 20 लोगों के शामिल होने की जानकारी मिली है, बाकी की तलाश जारी है।
प्रश्न 2: यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और कितनी ठगी हुई?
उत्तर: पुलिस के अनुसार गिरोह वर्ष 2024 से सक्रिय था। इस अवधि में करीब एक हजार बांग्लादेशी नागरिकों को निशाना बनाकर एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई। यह आंकड़ा अभी प्रारंभिक है और जांच के साथ बढ़ सकता है।
प्रश्न 3: ठग बांग्लादेशी नागरिकों से पैसे कैसे वसूलते थे?
उत्तर: गिरोह बिकाश ऐप के नंबरों का इस्तेमाल करता था। पीड़ित के इन नंबरों पर रकम भेजते ही बांग्लादेश में बैठे गिरोह के मददगार कमीशन काटकर पैसे भारत के बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे।
प्रश्न 4: ऐसी ठगी से बचने के लिए पुलिस की क्या सलाह है?
उत्तर: अनजान क्यूआर कोड स्कैन न करें, किसी को ओटीपी न बताएं, वीडियो कॉल पर अजनबियों के बहकावे में न आएं और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।