21 आईएएस अधिकारियों को राजस्थान में निवेश की बड़ी जिम्मेदारी

राजस्थान में निवेश बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार ने आज एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। कार्मिक विभाग के ताजा आदेश के मुताबिक प्रदेश के 21 आईएएस अधिकारियों को देश के विभिन्न राज्यों और दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ व्यापार, व्यवसाय और निवेश के अवसर तलाशने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह आदेश 22 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ है और इसके साथ ही इस व्यवस्था से जुड़े पहले के चारों आदेशों को निरस्त कर दिया गया है। यानी अब निवेश समन्वय की पूरी व्यवस्था एक ही एकीकृत आदेश के तहत चलेगी।

इस फैसले को सिर्फ अधिकारियों के तबादले या अतिरिक्त प्रभार जैसा न समझा जाए — इसका सीधा नाता राजस्थान में आने वाले निवेश, कारोबार और प्रवासी राजस्थानियों से है। प्रशासनिक हलकों में इसे ‘राजस्थान 21 आईएएस निवेश’ पहल के नाम से देखा जा रहा है। ये अधिकारी अपने-अपने आवंटित राज्यों और देशों में राजस्थान में निवेश के इच्छुक लोगों और संस्थानों को जरूरी मार्गदर्शन देंगे, साथ ही देश-विदेश में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों से जुड़े मामलों में भी सहयोग करेंगे। सरकार का साफ मकसद है कि निवेशकों को एक ही जगह भरोसेमंद सरकारी संपर्क मिले, ताकि कोई भी बड़ा निवेशक राजस्थान की ओर देखते वक्त अटकले न खाए।

चार पुराने आदेश क्यों रद्द हुए: 2024 से 2026 तक की कहानी

नई व्यवस्था को समझने के लिए पीछे का घटनाक्रम जानना जरूरी है। कार्मिक विभाग ने 6 सितंबर 2024, 7 सितंबर 2024, 18 दिसंबर 2025 और 16 जनवरी 2026 को जारी चार अलग-अलग आदेशों को निरस्त कर दिया है। ये सभी आदेश राज्यों और देशों के साथ समन्वय की पुरानी व्यवस्था से जुड़े थे। अलग-अलग समय पर जारी हुए इन आदेशों से व्यवस्था बिखरी हुई थी, इसलिए सरकार ने इन्हें समेटकर एक ही एकीकृत आदेश लागू किया है।

दरअसल, इसकी जड़ें दिसंबर 2024 में हुए राइजिंग राजस्थान सम्मेलन से जुड़ी हैं। उस समय 33 आईएएस अधिकारियों को 19 राज्यों और 23 देशों के निवेशकों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी गई थी। इस बार की व्यवस्था में यह काम प्रधान सचिव से लेकर विशेष सचिव स्तर के अधिकारियों को सौंपा गया है। एक अहम बात यह भी है कि ज्यादातर अधिकारियों को उन्हीं देशों का प्रभार दिया गया है, जिनके साथ उन्होंने राइजिंग राजस्थान के दौरान काम किया था — ताकि निवेशकों के साथ बने रिश्तों में निरंतरता बनी रहे। राज्यों का चयन भी बड़े पैमाने पर अधिकारियों के मूल राज्यों को ध्यान में रखकर किया गया है, जिससे वहां के कारोबारी और प्रशासनिक तंत्र से उनकी पहले से मौजूद समझदारी काम आ सके।

राजस्थान 21 आईएएस निवेश: किस अधिकारी को कौन सा राज्य और देश

कार्मिक विभाग की ओर से जारी आवंटन सूची के अनुसार इन अधिकारियों को राज्य और देश, दोनों का प्रभार मिला है। नीचे पूरी सूची दी गई है:

अधिकारी का नाम राज्य का प्रभार देश का प्रभार
गायत्री ए. राठौड़ गोवा सिंगापुर
टी. रविकांत आंध्र प्रदेश केन्या
मंजू राजपाल बिहार हांगकांग
नवीन जैन हरियाणा सऊदी अरब
कृष्ण कुणाल झारखंड कतर
रवि जैन छत्तीसगढ़ ऑस्ट्रेलिया
डॉ. रवि कुमार सुरपुर कर्नाटक दक्षिण अफ्रीका
डॉ. जोगा राम केरल संयुक्त अरब अमीरात
पी. रमेश तेलंगाना आयरलैंड
आरती डोगरा उत्तराखंड जर्मनी
डॉ. रोहित गुप्ता उत्तर प्रदेश ब्रिटेन
आनंदी तमिलनाडु जापान
राजन विशाल पंजाब स्पेन
अर्चना सिंह मध्य प्रदेश फिनलैंड, डेनमार्क
नकाते शिवप्रसाद मदन महाराष्ट्र ब्राजील
शिवांगी स्वर्णकार असम अमेरिका
अनुपमा जोरवाल दिल्ली इटली
रुक्मणी रियार पश्चिम बंगाल स्वीडन, नॉर्वे
हिमांशु गुप्ता ओडिशा युगांडा
अरविंद कुमार पोसवाल हिमाचल प्रदेश नेपाल
सुरेश कुमार ओला गुजरात स्विट्जरलैंड

प्रवासी राजस्थानियों के लिए इस फैसले का क्या मतलब है

आदेश में एक खास जिम्मेदारी प्रवासी राजस्थानियों (एनआरआर) से जुड़ी है। ये अधिकारी अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में रह रहे प्रवासी राजस्थानियों से जुड़े मामलों में सहयोग देंगे और संबंधित राज्यों में पदस्थापित राजस्थान कैडर या राजस्थान मूल के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखेंगे। इसका मतलब है कि विदेश में बसा कोई राजस्थानी उद्यमी अगर अपने प्रदेश में निवेश करना चाहे, तो उसे अब एक नामित वरिष्ठ अधिकारी के रूप में सीधा संपर्क मिलेगा।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 10 दिसंबर को प्रवासी राजस्थानी दिवस का आयोजन होना है। साफ है कि सरकार इस आयोजन से पहले प्रवासी समुदाय के साथ अपने प्रशासनिक पुल को मजबूत करना चाहती है, ताकि उस मंच पर सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि पहले से काम कर रही व्यवस्था पेश की जा सके।

राजस्थान 21 आईएएस निवेश व्यवस्था: निवेशकों को क्या फायदा मिलेगा

किसी भी निवेशक के लिए सबसे बड़ी दिक्कत जानकारी और भरोसेमंद संपर्क की होती है। नई व्यवस्था में हर आवंटित राज्य और देश के लिए एक नामित आईएएस अधिकारी होगा, जो राजस्थान में निवेश के इच्छुक व्यक्तियों और संस्थानों को जरूरी मार्गदर्शन देगा। यानी मुंबई का कोई कारोबारी या दुबई का कोई निवेशक, जो राजस्थान में फैक्ट्री या कारोबार लगाना चाहता है, उसे अब एक ही अधिकारी के जरिए सरकारी तंत्र तक पहुंच मिलेगी।

गौरतलब है कि निवेश को लेकर प्रदेश में पहले से कई मोर्चों पर काम चल रहा है — मुख्य सचिव की विश्व बैंक के साथ हुई बैठक में भी रोजगार सृजन और निवेश पर विस्तृत चर्चा हुई थी, और रीको की ई-नीलामी के जरिए 500 से ज्यादा औद्योगिक भूखण्डों का आवंटन भी निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है। नई समन्वय व्यवस्था इन प्रयासों को एक प्रशासनिक चेहरे से जोड़ती है, जिससे निवेशकों को सिर्फ योजना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार अधिकारी भी मिलेगा।

अब आगे क्या होगा

आदेश जारी होने के साथ ही नई व्यवस्था लागू हो गई है। उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में ये अधिकारी अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में निवेशकों और प्रवासी राजस्थानियों के साथ संपर्क साधना शुरू कर देंगे। असली परीक्षा 10 दिसंबर के प्रवासी राजस्थानी दिवस पर होगी, जब इस व्यवस्था के शुरुआती नतीजे सामने आने की उम्मीद की जा सकती है। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो राजस्थान के लिए यह सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि निवेश लाने का एक स्थायी तंत्र साबित हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: कितने आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिली है?
उत्तर: कार्मिक विभाग के आदेश के तहत कुल 21 आईएएस अधिकारियों को विभिन्न राज्यों और देशों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रश्न 2: कौन से पुराने आदेश निरस्त किए गए हैं?
उत्तर: 6 सितंबर 2024, 7 सितंबर 2024, 18 दिसंबर 2025 और 16 जनवरी 2026 को जारी चार आदेशों को निरस्त कर उनके स्थान पर नई एकीकृत व्यवस्था लागू की गई है।

प्रश्न 3: इन अधिकारियों का मुख्य काम क्या होगा?
उत्तर: ये अधिकारी अपने आवंटित राज्यों और देशों में राजस्थान में निवेश के इच्छुक लोगों को मार्गदर्शन देंगे, प्रवासी राजस्थानियों से जुड़े मामलों में सहयोग करेंगे और संबंधित राज्यों में कार्यरत राजस्थान कैडर के अधिकारियों के साथ समन्वय रखेंगे।

प्रश्न 4: कार्मिक विभाग के आदेश कहां देखे जा सकते हैं?
उत्तर: कार्मिक विभाग के सभी आदेश राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित होते हैं।

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