सोचिए, जिस डॉक्टर पर आपने अपने इलाज की जिम्मेदारी सौंपी है, जिसने आपको दवाएं लिखीं, शायद सर्जरी की सलाह दी — वही डॉक्टर कभी डॉक्टर था ही नहीं। राजस्थान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच ने इसी खौफनाक आशंका को सच कर दिखाया है। फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के जरिए विदेश से MBBS की डिग्री लाने वालों ने लाखों रुपये देकर डॉक्टर बनने का सर्टिफिकेट खरीद लिया, मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर ली और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन तक कर दिया। जांच में अब तक 100 से ज्यादा संदिग्ध चिन्हित किए जा चुके हैं, जिनमें से 33 को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और 15 अक्टूबर को चार नए आरोपियों को SOG ने दबोच लिया।
फर्जी FMGE सर्टिफिकेट: 30 लाख में डॉक्टर बनने का सौदा
इस रैकेट की सबसे चौंकाने वाली बात इसका रेट कार्ड है। जांच में सामने आया है कि फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाने के लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक दिए गए। जिन चार आरोपियों को 15 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया, उनमें भरत भूषण ने 30 लाख रुपये देकर सर्टिफिकेट बनवाया, जबकि सौरव शर्मा और हिमांशु शर्मा ने 27-27 लाख रुपये चुकाए। शिवम चौधरी ने भी करीब 30 लाख रुपये का भुगतान किया।
यह पैसा कथित बिचौलियों को दिया गया। जांच में दो नाम सामने आए हैं — शुभम गुर्जर और गजेंद्र। आरोप है कि इन्हीं के माध्यम से फर्जी FMGE सर्टिफिकेट तैयार कराए गए और मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप व काउंसिल में पंजीयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। SOG अब इन बिचौलियों के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
4 फरवरी की FIR से 15 अक्टूबर की गिरफ्तारी तक: पूरा घटनाक्रम
- 4 फरवरी 2026: जयपुर के SOG थाने में प्रकरण संख्या 08/26 के तहत FIR दर्ज। भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू।
- पहले चरण की कार्रवाई: मुख्य आरोपी भानाराम माली, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर और एलडीसी फरहान हसन समेत कुल 33 लोगों की गिरफ्तारी।
- 15 अक्टूबर 2026: विदेश से MBBS करने वाले 4 और डॉक्टर गिरफ्तार — भरत भूषण, सौरव शर्मा, हिमांशु शर्मा और शिवम चौधरी।
- अब तक: 100 से ज्यादा संदिग्धों की पहचान, बिचौलियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी।
काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि रैकेट को व्यवस्था के भीतर से भी मदद मिली होगी। SOG का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने, उनके इस्तेमाल और पंजीकरण की प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
कौन हैं गिरफ्तार चारों आरोपी
| आरोपी | उम्र | जिला | विदेश से MBBS | लौटे | दी गई रकम | इंटर्नशिप कहां की |
|---|---|---|---|---|---|---|
| भरत भूषण शर्मा | 26 | डीग | किर्गिस्तान | 2022 | 30 लाख रुपये | राजकीय मेडिकल कॉलेज, दौसा |
| सौरव शर्मा | 29 | वैर (भरतपुर) | रूस | 2023 | 27 लाख रुपये | राजकीय मेडिकल कॉलेज, धौलपुर |
| हिमांशु शर्मा | 26 | हलैना (भरतपुर) | रूस | 2023 | 27 लाख रुपये | महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज, जयपुर |
| शिवम चौधरी | 28 | पहाड़ी (डीग) | कजाकिस्तान | 2021 | 30 लाख रुपये | राजकीय मेडिकल कॉलेज, अलवर |
चारों ने विदेश से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी, लेकिन भारत लौटने के बाद FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा कई बार देने के बावजूद पास नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर दलालों से संपर्क किया और लाखों रुपये देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवा लिए। इन सर्टिफिकेटों के आधार पर उन्होंने राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की और फिर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया। जांच में यह भी सामने आया है कि सौरव शर्मा और हिमांशु शर्मा रिश्ते में ममेरे-मौसेरे भाई हैं।
फर्जी FMGE सर्टिफिकेट और मरीजों के लिए खतरा
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल आम मरीजों से जुड़ा है। जिस डॉक्टर ने FMGE परीक्षा पास ही नहीं की, क्या वह मरीजों का सही इलाज कर सकता था? विशेषज्ञों के मुताबिक विदेश से MBBS करने वालों के लिए यह स्क्रीनिंग परीक्षा इसलिए जरूरी है ताकि भारत में प्रैक्टिस करने वाले हर डॉक्टर का न्यूनतम योग्यता स्तर तय हो सके।
आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि डॉक्टर की असलियत जांचने के तरीके आसान हैं। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन नंबर की पुष्टि करें — हर पंजीकृत डॉक्टर का नंबर काउंसिल के रिकॉर्ड में होना चाहिए। डिग्री पर संदेह हो तो सीधे काउंसिल या SOG से शिकायत करें। निजी क्लीनिकों में डॉक्टर की योग्यता के दस्तावेज मांगना आपका अधिकार है।
प्रदेश में डॉक्टरों से जुड़े मामलों पर पहले भी कार्रवाई हुई है। (राजस्थान में 678 डॉक्टरों पर कानूनी कार्रवाई की तलवार) वहीं डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए नई भर्तियां भी हो रही हैं। (राजस्थान मेडिकल ऑफिसर भर्ती 2026: 600 पद) SOG की यह कार्रवाई पेपर लीक मामलों में चल रही जांचों की कड़ी में एक और अहम कदम है।
आगे क्या होगा?
SOG का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और नेटवर्क के अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। जांच एजेंसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन 100 से ज्यादा चिन्हित संदिग्धों की भूमिका स्पष्ट करना है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के और चेहरे सामने आएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. FMGE क्या है और यह क्यों जरूरी है?
FMGE यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन एक स्क्रीनिंग परीक्षा है, जिसे विदेश से MBBS की डिग्री लेकर भारत लौटने वालों को पास करना जरूरी होता है।
2. इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
इस प्रकरण में पहले 33 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी, जिनमें मुख्य आरोपी भानाराम माली और मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार भी शामिल हैं। 15 अक्टूबर को चार और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ कुल संख्या 37 हो गई है।
3. फर्जी सर्टिफिकेट कैसे बनवाए गए थे?
जांच के मुताबिक, FMGE परीक्षा में कई बार असफल होने के बाद आरोपियों ने बिचौलियों से संपर्क किया और 20 से 30 लाख रुपये देकर सर्टिफिकेट बनवाए। इन्हीं के आधार पर उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की और काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया।
4. अगर मुझे किसी डॉक्टर पर संदेह हो तो शिकायत कहां करूं?
आप राजस्थान मेडिकल काउंसिल से डॉक्टर के पंजीयन की पुष्टि करा सकते हैं। फर्जीवाड़े की आशंका पर SOG या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।