दिवाली और धनतेरस की खरीदारी अपने चरम पर है, और ठीक इसी मौसम में अजमेर के दुकानदारों पर उपभोक्ताओं का हक रखने वाली बड़ी कार्रवाई हुई है। विधिक माप विज्ञान अजमेर विभाग ने जिले में विशेष औचक निरीक्षण अभियान चलाकर कुल 35 प्रतिष्ठानों की जांच की और नियमों की अनदेखी पर एक लाख रुपए का जुर्माना ठोंका है। मेडिकल स्टोर, इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें और पैकेटबंद खाने-पीने का सामान बेचने वाले प्रतिष्ठान इस बार जांच के दायरे में थे।
सबसे अहम बात यह है कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है — आने वाले दिनों में भी विभाग की टीमें बाजारों में उतरती रहेंगी। यानी दिवाली की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए यह राहत भरी खबर है कि तोल में कम सामान देने वालों पर सरकार की नजर टिकी हुई है।
तीन चरणों में चला विशेष अभियान — जानें पूरा ब्योरा
विधिक माप विज्ञान विभाग की टीमों ने यह अभियान एक बार में नहीं, बल्कि अलग-अलग चरणों में चलाया। पहले दो चरणों में 5 से 7 अक्टूबर और फिर 10 से 12 अक्टूबर तक निरीक्षण किए गए। इसके बाद 12 से 14 अक्टूबर तक तीसरा और सबसे सख्त दौर चला, जिसमें पैकेटबंद सामान पर विशेष फोकस रहा।
| अभियान का चरण | तारीखें | जांच का मुख्य फोकस |
|---|---|---|
| पहला चरण | 5 से 7 अक्टूबर 2026 | बाट-कांटों और माप उपकरणों का सत्यापन |
| दूसरा चरण | 10 से 12 अक्टूबर 2026 | मेडिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रतिष्ठानों की जांच |
| तीसरा चरण | 12 से 14 अक्टूबर 2026 | पैकेज कमोडिटी नियम 2011 की पालना पर विशेष जांच |
उपभोक्ता मामले विभाग के विधिक माप विज्ञान प्रकोष्ठ की सहायक नियंत्रक भावना दयाल ने बताया कि तीनों चरणों में कुल 35 निरीक्षण किए गए और नियम तोड़ने वालों पर कुल एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। उन्होंने साफ किया कि जांच का एकमात्र उद्देश्य यही था कि उपभोक्ता को माप-तोल में पूरा सामान मिले और उसके साथ कोई धोखा न हो।
बुधवार को इन प्रतिष्ठानों पर हुई जांच — आयुर्वेदिक भवन से गैस एजेंसी तक
अभियान के आखिरी दिन, बुधवार 14 अक्टूबर को विभाग की टीमों ने अजमेर शहर के कई जाने-माने प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। जांच किए गए प्रतिष्ठानों में कृष्ण गोपाल आयुर्वेदिक भवन (परबतपुरा), अजमेर गैस, बालाजी फ्लोर मिल, मेहता इलेक्ट्रॉनिक्स और खुराना इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल रहे।
टीमों ने दो बातों पर खास ध्यान दिया। पहली — दुकानों में इस्तेमाल हो रहे बाट और कांटे सही माप दे रहे हैं या नहीं, और उनका तय प्रक्रिया के तहत सत्यापन हुआ है या नहीं। दूसरी — पैक किए गए सामान पर उत्पाद की मात्रा, निर्माता या पैकर का नाम-पता और अन्य अनिवार्य सूचनाएं सही तरीके से अंकित हैं या नहीं। विभाग का कहना है कि पैकेट पर साफ जानकारी होने से ही ग्राहक खरीदते समय सही फैसला ले पाता है।
सहायक नियंत्रक ने व्यापारियों से अपील की है कि वे अपने तोल-तौल उपकरणों का समय पर सत्यापन करवाएं। नियमों की अनदेखी उपभोक्ताओं के हितों को तो प्रभावित करती ही है, साथ ही कारोबारी के लिए भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।
पैकेटबंद सामान पर ये 7 जानकारियां होनी चाहिए — पैकेज कमोडिटी नियम 2011
अभियान में सबसे ज्यादा जांच पैकेटबंद वस्तुओं की हुई। पैकेज कमोडिटीज रूल्स, 2011 के तहत हर पैकेट पर ये सूचनाएं अंकित होना अनिवार्य है:
- निर्माता या पैकर का नाम और पूरा पता
- पैकेट में मौजूद सामान की कुल मात्रा (वजन, नाप या संख्या)
- अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP)
- निर्माण या पैकिंग की तारीख
- उपभोक्ता देखभाल अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण
- वस्तु का सामान्य या जैनेरिक नाम
- निर्धारित भाषाओं में जानकारी का स्पष्ट अंकन
अजमेर में विधिक माप विज्ञान विभाग की टीमों ने इन्हीं बिंदुओं की जांच की और जहां पैकेट पर जरूरी विवरण गायब थे या अधूरे थे, वहां जुर्माने की कार्रवाई हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारी सीजन में मिठाई, सूखे मेवे, नमकीन और गिफ्ट हैंपर जैसे पैकेटबंद सामानों की बिक्री बढ़ जाती है, और इन्हीं दिनों पैकेजिंग में गड़बड़ी के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं।
तोल के बाट-कांटों का सत्यापन क्यों जरूरी — विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009
विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के तहत हर व्यापारी के लिए अपने प्रतिष्ठान में इस्तेमाल होने वाले बाट और माप उपकरणों का समय-समय पर सत्यापन करवाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह सत्यापन इसलिए जरूरी है क्योंकि थोड़ा-सा झुका हुआ तराजू या गलत कांटा रोजाना सैकड़ों ग्राहकों को थोड़ा-थोड़ा नुकसान पहुंचाता है — और साल भर में यह रकम लाखों में पहुंच जाती है।
अजमेर के इस अभियान में टीमों ने यही देखा कि कितने व्यापारियों के कांटे सत्यापित हैं और कितने नहीं। असत्यापित बाट-कांटा या तय मात्रा से कम वजन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है — जिसमें जुर्माने के साथ-साथ गंभीर मामलों में मुकदमा भी चल सकता है।
दिवाली की खरीदारी में धोखे से बचने के 5 काम के टिप्स
- पैकेट पलटकर पढ़ें: खरीदने से पहले पैकेट के पीछे छपी मात्रा, MRP और निर्माण तारीख जरूर देखें। कोई जानकारी मिट्टी हुई या अधूरी हो तो वह सामान न खरीदें।
- तोल अपनी आंखों से देखें: सब्जी, मिठाई या सूखे मेवे खरीदते समय तराजू का कांटा अपनी आंखों से देखें। इलेक्ट्रॉनिक कांटे में शून्य (0.000) पढ़ना चाहिए, उसके बाद सामान तौला जाना चाहिए।
- MRP से ज्यादा दाम न दें: पैकेटबंद सामान पर छपी अधिकतम खुदरा मूल्य से एक रुपया भी ज्यादा देना कानूनी रूप से गलत है। त्योहारी छूट के नाम पर MRP से ऊपर का बिल कभी स्वीकार न करें।
- शिकायत दर्ज करें: धोखा होने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर शिकायत करें या consumerhelpline.gov.in पर ऑनलाइन दर्ज करें। अजमेर में जिला उपभोक्ता फोरम में भी शिकायत की जा सकती है।
FAQ
सवाल: विधिक माप विज्ञान विभाग की जांच किस पर होती है?
जवाब: विभाग उन सभी प्रतिष्ठानों की जांच करता है जहां सामान तोल-मापकर या पैकेटबंद रूप में बेचा जाता है — किराना, मेडिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई और गैस एजेंसियां सभी इसके दायरे में आते हैं।
सवाल: पैकेट पर MRP से ज्यादा दाम मांगा जाए तो क्या करें?
जवाब: पैकेज कमोडिटी नियम 2011 के तहत MRP से अधिक कीमत वसूलना अपराध है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर शिकायत दर्ज कराएं।
सवाल: असत्यापित तराजू पकड़े जाने पर व्यापारी को क्या सजा मिलती है?
जवाब: विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009 के तहत असत्यापित बाट-कांटा इस्तेमाल करने पर जुर्माना लगाया जाता है और गंभीर या दोहराए जाने वाले उल्लंघन पर मुकदमा भी चल सकता है।
सवाल: अजमेर में तोल संबंधी शिकायत कहां करें?
जवाब: आप जिला उपभोक्ता मामले विभाग के विधिक माप विज्ञान प्रकोष्ठ में शिकायत कर सकते हैं, या फिर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर टोल-फ्री शिकायत दर्ज करा सकते हैं।