जरा सोचिए — आप अस्पताल में भर्ती हैं, ऑपरेशन टेबल पर लेटे हैं, और आपकी जिंदगी जिस डॉक्टर के हाथों में है, उसने कभी एमबीबीएस की डिग्री ली ही नहीं। यही खौफनाक सच्चाई फर्जी डॉक्टर राजस्थान के एक और बड़े मामले में सामने आई है। जालोर के रानीवाड़ा में एक ‘डॉक्टर’ सालों से मरीजों का इलाज और ऑपरेशन करता रहा, जो असल में सिर्फ आठवीं कक्षा तक पढ़ा था।
उसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में अपना पंजीयन भी करवा लिया था और 50 बेड का खुद का अस्पताल चलाता था। SOG ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को जयपुर में SOG मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एडीजी विशाल बंसल और आईजी अजयपाल लांबा ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया। फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के सहारे डॉक्टर बनने के पिछले मामले की तरह इस बार भी सवाल है — RMC जैसी संवैधानिक संस्था में धांधली कैसे हुई?
फर्जी डॉक्टर राजस्थान: RMC रजिस्ट्रेशन का पूरा खेल
जालोर के दहीपुर का नानजीराम चौधरी महज आठवीं कक्षा तक पढ़ा है, लेकिन उसके पास नौवीं से लेकर एमबीबीएस और डिप्लोमा इन गायनेकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स तक के दस्तावेज थे — सब के सब फर्जी।
SOG के मुताबिक, अस्पताल के कामकाज के दौरान जयपुर में RMC कार्यालय आने पर उसने काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क बनाए और उनकी मिलीभगत से 2023 में खुद का डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन करवा लिया।
रानीवाड़ा में उसका 50 बेड का भास्कर हॉस्पिटल है, जहां उसने खुद को स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में स्थापित कर मरीजों के ऑपरेशन किए। SOG के पास उसके ऑपरेशन थिएटर में बिना मास्क मौजूद होने की तस्वीरें भी हैं।
फर्जी डॉक्टर राजस्थान पर SOG की बड़ी कार्रवाई: 2 गिरफ्तार, 7 फरार
SOG के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि इस मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच लगातार जारी है। एसओजी ने अब तक इस प्रकरण में दो आरोपियों — नानजीराम चौधरी और पंकज यादव — को गिरफ्तार किया है, जबकि सात अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी चल रही है।
फरार आरोपियों के नाम हैं — शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार और रामकिशोर महावर। SOG अब यह भी खंगाल रही है कि इस फर्जी पंजीयन के खेल में RMC के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका क्या थी।
RMC के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधर गोपाल ने 6 अक्टूबर, 2026 को अशोक नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आठ लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज और फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर पंजीयन करवाने का आरोप है। उसी मुकदमे की जांच SOG को सौंपी गई थी। इससे पहले SOG ने वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक मामले में विनोद जाट की गिरफ्तारी भी की थी।
पंकज यादव: 6 बार FMGE फेल, तो बिहार से खरीद ली फर्जी MBBS डिग्री
दूसरे गिरफ्तार आरोपी पंकज यादव की कहानी भी चौंकाने वाली है। वह सीकर के कालियावास का रहने वाला है। उसने 2013 से 2018 तक कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की, लेकिन भारत लौटने के बाद छह बार FMGE दिया और हर बार फेल हो गया।
इसके बाद उसने बिहार की श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज की फर्जी डिग्री-मार्कशीट और बिहार मेडिकल काउंसिल का फर्जी रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र बनवाकर RMC में पंजीयन करवा लिया। सत्यापन में दस्तावेज फर्जी पाए गए; गिरफ्तारी से बचने के लिए वह कैथल (हरियाणा) में रह रहा था, जहां से SOG ने उसे दबोचा।
फर्जी दस्तावेजों की सूची: कौन सा कागज कहां से ‘बना’
फर्जी डॉक्टर राजस्थान के इस मामले में नानजीराम के पास मिले दस्तावेजों की सूची इस प्रकार है:
| दस्तावेज | दावा किया गया स्रोत | जांच में स्थिति |
|---|---|---|
| 10वीं और 12वीं की मार्कशीट | आंध्र प्रदेश सेकेंडरी बोर्ड | फर्जी |
| एमबीबीएस डिग्री | रामा यूनिवर्सिटी, कानपुर | फर्जी |
| डिप्लोमा इन गायनेकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स | द कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स, मुंबई | फर्जी |
| अलॉटमेंट लेटर और पासिंग सर्टिफिकेट | मुंबई कॉलेज के नाम पर | फर्जी |
| अटेम्प्ट सर्टिफिकेट | मुंबई कॉलेज के नाम पर | फर्जी |
इन दस्तावेजों के आधार पर RMC में करवाया गया पंजीयन संस्था के तत्कालीन पदाधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। इसीलिए SOG अब काउंसिल के उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
2010 में पर्ची काटने वाला, 2015 में अस्पताल का मालिक
नानजीराम का सफर हजारों मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ की कहानी है। करीब 2010 में उसने रानीवाड़ा में एक निजी क्लिनिक के ओपीडी काउंटर पर पर्चियां काटने का काम शुरू किया। 2014 में वह रानीवाड़ा के राजदेव हॉस्पिटल में पर्चियां काटने लगा।
अगले ही साल 2015 में उसने उसी अस्पताल के मालिक से पूरा अस्पताल खरीद लिया और 2016 में उसका नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल रख दिया। 2019 में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की सेवाएं शुरू कीं — और फिर खुद ही ‘स्त्री रोग विशेषज्ञ’ बन बैठा।
पर्ची काटने से डॉक्टर बनने तक का यह सफर सिर्फ फर्जी कागजों और मिलीभगत के दम पर तय हुआ। सवाल यह है कि इतने सालों तक न तो स्वास्थ्य विभाग की नजर पड़ी, न ही काउंसिल ने कोई सवाल उठाया।
अपने डॉक्टर की असलियत कैसे जांचें — काम की जानकारी
इलाज से पहले डॉक्टर की असलियत जांचने के लिए काम की जानकारी इस प्रकार है:
- इलाज करवाने से पहले डॉक्टर का RMC रजिस्ट्रेशन नंबर पूछें और उसे राजस्थान मेडिकल काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट पर सत्यापित करें।
- अस्पताल में डॉक्टर का डिग्री प्रमाण पत्र और पंजीयन प्रमाण पत्र लगा होना चाहिए — इसकी जांच करें।
- अस्पताल का पंजीयन और लाइसेंस वैध है या नहीं, यह भी देखें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत सीधे जिला चिकित्सा अधिकारी या RMC में दर्ज कराएं।
FAQ
सवाल: इस मामले में कौन-कौन गिरफ्तार हुआ है? जवाब: SOG ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया — जालोर का नानजीराम चौधरी (आठवीं पास, 50 बेड का भास्कर हॉस्पिटल चलाता था, ऑपरेशन भी करता था) और सीकर का पंकज यादव (कजाकिस्तान से MBBS, FMGE में 6 बार फेल, फिर बिहार से फर्जी डिग्री बनवाई)।
सवाल: नानजीराम ने RMC में पंजीयन कैसे करवाया? जवाब: SOG के मुताबिक, अस्पताल के कामकाज के दौरान उसने RMC के तत्कालीन पदाधिकारियों से संपर्क बनाए और उनकी मिलीभगत से 2023 में डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन करवा लिया। इस मिलीभगत की भी जांच जारी है।
सवाल: कुल कितने आरोपी हैं, कितने फरार? जवाब: RMC रजिस्ट्रार की FIR में आठ लोग आरोपी हैं। दो गिरफ्तार हो चुके हैं; शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार और रामकिशोर महावर — ये सात अब भी फरार हैं।
सवाल: क्या मरीज अपने डॉक्टर का RMC रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन चेक कर सकते हैं? जवाब: हां, राजस्थान मेडिकल काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट पर नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर से सत्यापन किया जा सकता है। संदिग्ध मामले की शिकायत RMC या जिला चिकित्सा अधिकारी के पास दर्ज कराएं।