221 करोड़ का नुकसान, और अब केंद्र तक पहुंचा मामला
राजस्थान के मूंग किसानों को इस खरीफ सीजन में 221 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। यह नुकसान किसी सूखे या ओलावृष्टि से नहीं, बल्कि मूंग MSP खरीद देरी से हुआ है। किसान महापंचायत ने गुरुवार, 5 नवंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर तत्काल खरीद और नुकसान की भरपाई मांगी है।
संगठन का कहना है कि सितंबर में मंडियों में आई मूंग की उपज पर ही किसानों को 221 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा उठाना पड़ा। सरकारी खरीद समय पर शुरू नहीं हुई, इसलिए किसानों को अपनी फसल खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम कीमत पर बेचनी पड़ी। मूंग MSP खरीद देरी का यह मामला अब केंद्र सरकार के सामने पहुंच गया है।
मूंग MSP खरीद देरी: 221 करोड़ का हिसाब
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय संयोजक रामपाल जाट ने पत्र में सितंबर महीने के मंडी आंकड़ों का हवाला दिया है। संगठन के अनुसार, इस दौरान राजस्थान की मंडियों में 7 लाख 70 हजार 481 क्विंटल मूंग की आवक हुई।
उस समय सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई थी, इसलिए किसानों को अपनी उपज MSP से कम कीमत पर बेचनी पड़ी। संगठन का अनुमान है कि किसानों को प्रति क्विंटल करीब 3 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। मंडियों में मूंग का औसत भाव करीब 7,000 रुपये रहा, जबकि MSP 8,780 रुपये प्रति क्विंटल है।
MSP 8,780 रुपये, मंडी में 7,200 रुपये: फसलों के भाव का अंतर
मूंग अकेली फसल नहीं है जिसकी कीमत MSP से नीचे चल रही है। खरीफ की दूसरी फसलों की हालत भी यही है:
| फसल | MSP (रुपये/क्विंटल) | मंडी भाव लगभग (रुपये/क्विंटल) | प्रति क्विंटल अंतर |
|---|---|---|---|
| मूंग | 8,780 | 7,200–7,452 | 1,300–3,000 तक |
| सोयाबीन | 5,708 | 4,000 | करीब 1,700 |
| मूंगफली | 7,517 | 6,600 | करीब 900 |
सोयाबीन का हाल सबसे खराब है। बारां-झालावाड़ में भाव करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि MSP 5,708 रुपये है। मूंगफली के किसान भी प्रति क्विंटल करीब 900 रुपये कम पा रहे हैं। इस साल मूंग के MSP में सिर्फ 12 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है — महज 0.1 प्रतिशत।
किसान महापंचायत ने केंद्र से क्या-क्या मांगा
किसान महापंचायत ने केंद्रीय कृषि मंत्री को भेजे पत्र में पांच प्रमुख मांगें रखी हैं।
- तत्काल खरीद: मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन सहित सभी खरीफ दलहन-तिलहन फसलों की MSP पर खरीद तत्काल शुरू की जाए।
- हर साल 1 सितंबर से खरीद: अगले वर्षों में मूंग की सरकारी खरीद 1 सितंबर से शुरू हो।
- भावांतर भुगतान: MSP से कम कीमत पर फसल बेच चुके किसानों को भावांतर भुगतान से भरपाई दी जाए।
- शत-प्रतिशत खरीद: मूंग की शत-प्रतिशत खरीद नाफेड और एनसीसीएफ से सुनिश्चित की जाए।
- तिलहन की गारंटी: तिलहन फसलों के लिए भी MSP की प्रभावी गारंटी और पर्याप्त खरीद व्यवस्था बनाई जाए।
संगठन का तर्क है कि अरहर, मसूर, उड़द और चने की तरह मूंग की भी नाफेड और एनसीसीएफ से शत-प्रतिशत खरीद होनी चाहिए।
मूंग MSP खरीद देरी: 1 सितंबर से खरीद क्यों नहीं
किसानों का सबसे बड़ा सवाल यही है — जब मूंग की फसल सितंबर की शुरुआत से ही मंडियों में पहुंचने लगती है, तो सरकारी खरीद नवंबर से क्यों शुरू होती है? रामपाल जाट ने पत्र में कहा है कि राजस्थान सरकार की ओर से मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की MSP पर खरीद के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, और राज्य सरकार ने मूंग की खरीद 1 नवंबर से शुरू करने का आश्वासन भी दिया था।
लेकिन किसानों का कहना है कि नवंबर से खरीद शुरू होने पर शुरुआती दिनों में उपज बेचने वाले किसानों को MSP का लाभ नहीं मिल पाता। सितंबर-अक्टूबर में ही मंडियों में सबसे ज्यादा आवक होती है, और उसी दौरान किसान अपनी फसल बेचने को मजबूर होता है। संगठन का सुझाव है कि नाफेड और एनसीसीएफ को राज्यों के अनुरोध की प्रतीक्षा किए बिना खरीद शुरू करने की अनुमति दी जाए।
राज्य में खरीफ MSP खरीद की व्यवस्था पर पढ़ें: राजफेड के 810 क्रय केंद्र। सीकर में 1 नवंबर से मूंग-मूंगफली की खरीद: सीकर में मूंग-मूंगफली MSP खरीद।
राजस्थान: देश की आधी से ज्यादा मूंग यहीं पैदा होती है
किसान महापंचायत ने अपने पत्र में राजस्थान को मूंग उत्पादन के लिहाज से देश का प्रमुख राज्य बताया है। संगठन का दावा है कि पिछले कई वर्षों से देश के कुल मूंग उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 48 फीसदी से अधिक रही है और राज्य उत्पादन में पहले स्थान पर है।
इसीलिए मूंग MSP खरीद देरी का असर सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रहता — यह देश की दालों की आपूर्ति और कीमतों से भी जुड़ा है। अगर राजस्थान का किसान मूंग की खेती से घाटा खाकर अगली बार इसका रकबा घटा देता है, तो इसका असर देशभर में मूंग की उपलब्धता पर पड़ेगा।
किसानों को अब क्या करना चाहिए
अगर आपने भी इस साल मूंग, उड़द, मूंगफली या सोयाबीन MSP से कम भाव पर बेची है, तो ये कदम उठाएं:
- क्रय केंद्र पर पंजीकरण कराएं: राजफेड के स्वीकृत क्रय केंद्रों पर पंजीकरण कराएं।
- मंडी भाव रोज देखें: अपनी मंडी के ताजा भाव Agmarknet पोर्टल पर देखें और MSP से तुलना करें।
- बिक्री की रसीद संभालकर रखें: मंडी में बेची गई उपज की रसीद रखें — भावांतर भुगतान की मांग पर यही दस्तावेज काम आएंगे।
- संगठन से जुड़ें: अपने जिले के किसान संगठन या कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क में रहें।
खरीफ फसल उत्पादन के ताजा अनुमान यहां पढ़ें: खरीफ फसल उत्पादन अनुमान 2026।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: मूंग का MSP 2026-27 में कितना है?
उत्तर: इस साल मूंग का MSP 8,780 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है।
प्रश्न: किसानों को 221 करोड़ रुपये का नुकसान कैसे हुआ?
उत्तर: सितंबर में राजस्थान की मंडियों में 7,70,481 क्विंटल मूंग की आवक हुई, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई थी। किसानों को फसल MSP से करीब 3,000 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव पर बेचनी पड़ी।
प्रश्न: किसान महापंचायत ने केंद्र सरकार से क्या मांगा है?
उत्तर: पांच मांगें रखी हैं — तत्काल MSP खरीद, हर साल 1 सितंबर से खरीद, भावांतर भुगतान से भरपाई, नाफेड-एनसीसीएफ से शत-प्रतिशत खरीद और तिलहन फसलों के लिए MSP की गारंटी।
प्रश्न: राजस्थान में मूंग की सरकारी खरीद कब से शुरू हुई?
उत्तर: राज्य सरकार ने मूंग की खरीद 1 नवंबर से शुरू करने का आश्वासन दिया था और सीकर जैसे जिलों में 1 नवंबर से खरीद शुरू भी हुई है।
मूंग MSP खरीद देरी का मामला अब केंद्र सरकार के सामने है। किसान महापंचायत के पत्र पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय क्या जवाब देता है और भावांतर भुगतान की मांग पर कोई फैसला होता है या नहीं — यह आने वाले दिनों में साफ होगा।