राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक पर SOG की सख्ती लगातार जारी है। शनिवार को एसओजी ने सुपरवाइजर भर्ती पेपर लीक मामले में एक और बड़ी गिरफ्तारी की है। आरोपी मनीष गिला को नागौर से पकड़ा गया है। आरोप है कि उसने पेपर लीक गैंग से परीक्षा का पेपर खरीदकर अपनी रिश्तेदार मंजू कुमारी बिश्नोई को दिलवाया था। इस गिरफ्तारी के साथ सुपरवाइजर भर्ती 2018 के फर्जीवाड़े में पकड़े गए आरोपियों की संख्या अब 10 हो गई है।
यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जांच में यह भी सामने आ चुका है कि OMR शीट की स्कैनिंग और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया में करोड़ों के खेल के साथ-साथ बोर्ड के अंदर बैठे लोगों की मिलीभगत भी थी।
सुपरवाइजर भर्ती पेपर लीक: गिरफ्तारी के 5 बड़े तथ्य
सबसे पहले समझिए कि आज की कार्रवाई में क्या-क्या सामने आया है:
- किसे पकड़ा गया: मनीष गिला, निवासी नागौर। SOG ने उसे पेपर लीक गैंग से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
- क्या आरोप है: जांच के मुताबिक मनीष गिला ने पेपर लीक करने वाले गिरोह से सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा का पेपर खरीदा और उसे अपनी रिश्तेदार मंजू कुमारी बिश्नोई को दिलवाया।
- कौन सी भर्ती: यह मामला राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) की सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा 2018 से जुड़ा है।
- किसने की कार्रवाई: स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), जिसकी अगुवाई में इस फर्जीवाड़े की जांच अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल कर रहे हैं।
- क्यों है अहम: यह उसी मामले की कड़ी है जिसमें पहले OMR शीट में हेरफेर कर अंकों को 35.85 से बढ़ाकर 183.85 करने का खुलासा हुआ था।
मनीष गिला कौन है और उस पर क्या आरोप है
मनीष गिला नागौर का रहने वाला है। SOG की जांच में उसका नाम सुपरवाइजर भर्ती पेपर लीक के सिलसिले में सामने आया था, जिसके बाद शनिवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि उसने पेपर लीक गैंग से परीक्षा का प्रश्नपत्र खरीदा और अपनी रिश्तेदार मंजू कुमारी बिश्नोई तक पहुंचाया।
पेपर लीक के ऐसे मामलों में अमूमन दो तरह के लोग शामिल होते हैं — एक वे जो पेपर चुराते या लीक करते हैं, और दूसरे वे जो उसे खरीदकर अपने जानने वालों को पहुंचाते हैं। मनीष गिला दूसरी श्रेणी में आता है। SOG अब उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि पेपर की खरीद के लिए कितने रुपये दिए गए, सौदा किसके माध्यम से हुआ और क्या इस चेन में और भी लोग शामिल थे।
35.85 से 183.85 — OMR घोटाले की जड़
मनीष गिला की गिरफ्तारी को समझने के लिए इस मामले की जड़ को जानना जरूरी है। दरअसल, सुपरवाइजर भर्ती 2018 के परिणाम में OMR शीट से छेड़छाड़ कर अंकों में हेरफेर का खुलासा हुआ था।
जांच में सामने आया कि वांछित अभ्यर्थी कमोद मीना की मूल OMR शीट में महज 35.85 अंक थे। आरोप है कि स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान OMR में कूटरचना कर उसके अंक बढ़ाकर 183.85 कर दिए गए। इन्हीं बढ़े हुए अंकों के आधार पर वह चयन सूची में आ गई। कमोद मीना चाकसू क्षेत्र की रहने वाली है, और उसके सहयोगी मनराज मीना (निवाई) को 8 अक्टूबर को SOG ने गिरफ्तार किया था। दोनों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
यह फर्जीवाड़ा अकेले नहीं हुआ था। सुपरवाइजर भर्ती पेपर लीक की जांच में यह भी सामने आया कि OMR शीट की स्कैनिंग और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी कंपनी के कर्मचारियों ने बोर्ड के कार्मिकों और अन्य लोगों के साथ मिलीभगत कर परीक्षा परिणाम में हेरफेर की। यानी बोर्ड के अंदर और बाहर, दोनों जगह के लोग इस खेल में शामिल थे।
सुपरवाइजर भर्ती पेपर लीक में अब तक गिरफ्तार — पूरी सूची
इस मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों की स्थिति इस प्रकार है:
| आरोपी | भूमिका/आरोप | स्थिति |
|---|---|---|
| मनीष गिला (नागौर) | पेपर लीक गैंग से पेपर खरीदकर रिश्तेदार को दिलवाया | 10 अक्टूबर को गिरफ्तार |
| कमोद मीना (चाकसू) | अभ्यर्थी, OMR हेरफेर से अंक 35.85 से 183.85 | 8 अक्टूबर को गिरफ्तार, पुलिस रिमांड |
| मनराज मीना (निवाई) | कमोद मीना का सहयोगी | 8 अक्टूबर को गिरफ्तार |
| संजय माथुर | RSSB के तत्कालीन एनालिस्ट कम प्रोग्रामर (उप निदेशक) | पूर्व में गिरफ्तार |
| प्रवीण गंगवाल | RSSB के तत्कालीन प्रोग्रामर, परिचित अभ्यर्थियों को चयनित कराने का आरोप | पूर्व में गिरफ्तार |
| विनोद कुमार गौड़ | स्कैनिंग कंपनी का कर्मी, परिणाम में हेरफेर के बदले लाखों रुपये लेने का आरोप | पूर्व में गिरफ्तार |
| शादान खान | स्कैनिंग कंपनी का कर्मी | पूर्व में गिरफ्तार |
| पूनम माथुर | अभ्यर्थी | पूर्व में गिरफ्तार |
| संतोष कुमारी मीना | अभ्यर्थी | पूर्व में गिरफ्तार |
| मीराबाई मीना | अभ्यर्थी | पूर्व में गिरफ्तार |
जांच के मुताबिक प्रवीण गंगवाल ने अपने परिचित अभ्यर्थियों को चयनित कराने में भूमिका निभाई, वहीं कंपनी के कर्मियों ने अन्य अभ्यर्थियों के परिणाम में हेरफेर के बदले लाखों रुपये लिए।
अभ्यर्थियों के लिए आगे क्या
इस सुपरवाइजर भर्ती पेपर लीक मामले से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब आगे क्या होगा। कुछ अहम बातें समझ लीजिए:
- चयन सूची पर असर: जिन अभ्यर्थियों का चयन हेरफेर से हुआ, उनकी नियुक्ति पर अब गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। SOG की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
- ईमानदार अभ्यर्थी: जो अभ्यर्थी अपनी मेहनत से पास हुए हैं, उनके लिए यह जांच राहत की खबर है — फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के बाहर होने से मेरिट साफ होगी।
- कानूनी प्रक्रिया: गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। रिमांड अवधि में और नाम सामने आने की संभावना है, इसलिए जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
- आधिकारिक जानकारी: भर्ती से जुड़ी किसी भी आधिकारिक सूचना के लिए अभ्यर्थी RSSB की वेबसाइट (https://rssb.rajasthan.gov.in/) पर नजर रखें। अफवाहों पर ध्यान न दें।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
सुपरवाइजर भर्ती पेपर लीक का यह मामला भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों का ताजा उदाहरण है। पेपर लीक गैंग, बोर्ड के अंदर के लोग और स्कैनिंग कंपनियों के कर्मी मिलकर सिस्टम में सेंध लगाते पाए गए हैं।
अच्छी बात यह है कि SOG की कार्रवाई लगातार जारी है — अब तक 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इससे यह संदेश साफ जाता है कि फर्जीवाड़ा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि भविष्य की भर्तियों में ऐसी सेंध न लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: सुपरवाइजर भर्ती 2018 का पेपर लीक मामला क्या है?
उत्तर: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा 2018 के परिणाम में OMR शीट से छेड़छाड़ और पेपर लीक का मामला सामने आया था। जांच SOG कर रही है और अब तक 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
प्रश्न 2: मनीष गिला कौन है और उस पर क्या आरोप है?
उत्तर: मनीष गिला नागौर का रहने वाला है। आरोप है कि उसने पेपर लीक गैंग से परीक्षा का पेपर खरीदकर अपनी रिश्तेदार मंजू कुमारी बिश्नोई को दिलवाया। SOG ने उसे 10 अक्टूबर को गिरफ्तार किया।
प्रश्न 3: OMR शीट में अंक 35.85 से 183.85 कैसे हो गए?
उत्तर: जांच के अनुसार अभ्यर्थी कमोद मीना की मूल OMR में 35.85 अंक थे। स्कैनिंग कंपनी और बोर्ड के कार्मिकों की मिलीभगत से OMR में कूटरचना कर अंक 183.85 कर दिए गए, जिससे वह चयन सूची में आ गई।
प्रश्न 4: इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
उत्तर: मनीष गिला की गिरफ्तारी के बाद कुल 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इनमें बोर्ड के तत्कालीन अधिकारी, स्कैनिंग कंपनी के कर्मी, अभ्यर्थी और उनके सहयोगी शामिल हैं।
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