डीडवाना कुचामन जल संकट: 7 कस्बों और 785 गांवों में 8-10 दिन में एक बार आ रहा पानी, नोखा दैय्या डैम में सिर्फ 7 दिन का स्टॉक बचा

सात कस्बे, 785 गांव — और नल में पानी सिर्फ 8 से 10 दिन में एक बार, वो भी महज एक घंटे के लिए। डीडवाना कुचामन जल संकट इस हद तक गहरा गया है कि अब पीने के पानी के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। जलदाय विभाग की टंकियां सूखी पड़ी हैं, और लोग मजबूरी में महंगे टैंकर मंगाने को मजबूर हैं।

सबसे चिंताजनक आंकड़ा बीकानेर के नोखा दैय्या डैम से आया है, जिससे जिले के बड़े हिस्से को पानी मिलता है। आमतौर पर इस डैम में 28 दिन का पानी रिजर्व रहता था, लेकिन अब सिर्फ 7 दिन का स्टॉक बचा है। रोजाना 300 से 400 एमएलडी मिलने वाली सप्लाई घटकर 200 एमएलडी रह गई है।

785 गांव और 7 कस्बे प्रभावित: डीडवाना कुचामन जल संकट के ताजा आंकड़े

जलदाय विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पानी की सप्लाई में कटौती का असर पूरे डीडवाना-कुचामन जिले पर पड़ा है। पहले जहां डीडवाना शहर में हर 4-5 दिन में पानी मिलता था, अब अंतराल 8 से 10 दिन का हो गया है। ग्रामीण इलाकों में हालत और भी खराब है — 785 गांव और 7 कस्बे इस संकट की सीधी चपेट में हैं।

इलाके के लोग अब विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को घंटों तक टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है। जिन इलाकों में टंकियां नहीं भर पा रहीं, वहां जलदाय विभाग से नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो अगले कुछ दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

तथ्य स्थिति
प्रभावित कस्बे 7
प्रभावित गांव 785
पानी की सप्लाई का अंतराल 8 से 10 दिन में एक बार
एक बार में सप्लाई की अवधि सिर्फ 1 घंटा
नोखा दैय्या डैम में बचा पानी 7 दिन का (सामान्यत: 28 दिन का रिजर्व)
रोजाना पानी की आवक (पहले) 300-400 एमएलडी
रोजाना पानी की आवक (अब) 200 एमएलडी

क्यों गहराया डीडवाना कुचामन जल संकट: इंदिरा गांधी नहर में पानी की कमी

इस संकट की जड़ इंदिरा गांधी नहर में पानी की भारी कमी है। डीडवाना-कुचामन जिले की अधिकांश पेयजल योजनाएं इसी नहर पर निर्भर हैं। नहर में पानी कम आने से जलदाय विभाग की टंकियां नहीं भर पा रहीं, और पूरी पेयजल व्यवस्था चरमरा गई है।

इसके पीछे दो बड़ी वजहें सामने आई हैं। पहली — पंजाब में रबी फसल की बुवाई शुरू होने के बाद पंजाब सरकार ने राजस्थान को मिलने वाले नहरी पानी में कटौती कर दी है। दूसरी — हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में किसानों के धरने के चलते नहर में पानी की आवक आधी रह गई है। इन दोनों कारणों के मिले-जुले असर से नोखा दैय्या डैम तक पानी पहुंचना बेहद कम हो गया है।

अधिशाषी अभियंता अजीत सिंह के मुताबिक, सामान्य दिनों में डैम में 28 दिन का पानी रिजर्व रखा जाता है ताकि किसी आपात स्थिति में भी सप्लाई न रुके। लेकिन कटौती के बाद यह बफर घटकर सिर्फ 7 दिन रह गया है। अगर अगले कुछ दिनों में नहर में पानी की आवक नहीं बढ़ी तो डीडवाना-कुचामन के कई इलाकों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ सकती है।

सियासत भी गरमाई: कांग्रेस ने सरकार को घेरा, विधायक ने सीएम को लिखा पत्र

पानी के संकट ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता चौधरी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार को आमजन की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है, सरकार सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित है।

वहीं, विधायक हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पश्चिमी राजस्थान के जल संकट पर तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि नहर में राजस्थान के हिस्से का पानी सुनिश्चित कराने के लिए पंजाब सरकार से बातचीत तेज की जाए और प्रभावित जिलों में टैंकरों से वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था की जाए।

दूसरी ओर, नहर विभाग के अधिकारी उच्च अधिकारियों से संपर्क कर सप्लाई रिस्टोर कराने में जुटे हैं। विभाग ने लोगों से पानी का उपयोग मितव्ययता से करने और विभाग का सहयोग करने की अपील की है।

पश्चिमी राजस्थान के अन्य इलाकों में भी हालात चिंताजनक

डीडवाना-कुचामन अकेला जिला नहीं है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, जैसलमेर, बाड़मेर और बालोतरा के 851 गांवों में भी जल संकट गहरा गया है। पश्चिमी राजस्थान में भूमिगत जल का स्तर लगातार गिर रहा है और नहरी पानी पर निर्भरता बढ़ रही है, जिससे ऐसी स्थिति बार-बार बनने का खतरा है। डीडवाना कुचामन जल संकट एक बार फिर दिखाता है कि एक ही स्रोत पर निर्भर व्यवस्था कितनी नाजुक होती है।

आम लोगों के लिए जरूरी बातें: पानी की कमी में क्या करें

  • पानी की बचत करें: कपड़े धोने, बर्तन मांजने और फर्श धोने में पानी का दोहरा उपयोग करें। आरओ का रिजेक्ट पानी बागवानी या सफाई में इस्तेमाल करें।
  • टैंकर मंगवाते समय सतर्क रहें: टैंकर का पानी स्टोर करने से पहले उसकी साफ-सफाई की जांच कर लें। लंबे समय से खड़े टैंकर का पानी सीधे न पिएं।
  • शिकायत कहां करें: अपने इलाके के जलदाय विभाग के सहायक अभियंता कार्यालय या राजस्थान संपर्क पोर्टल पर पेयजल समस्या दर्ज कराएं।
  • बीमारियों से बचाव: गंदा या संदिग्ध पानी पीने से बचना चाहिए। पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

डीडवाना-कुचामन में पानी कितने दिन में एक बार आ रहा है? — फिलहाल जिले में 8 से 10 दिन में एक बार पानी की सप्लाई हो रही है, और वो भी सिर्फ करीब 1 घंटे के लिए।

जल संकट की सबसे बड़ी वजह क्या है? — इंदिरा गांधी नहर में पानी की भारी कमी। पंजाब सरकार की कटौती और हनुमानगढ़-गंगानगर में धरने के कारण नहर में पानी की आवक आधी रह गई है, जिससे नोखा दैय्या डैम में सिर्फ 7 दिन का पानी बचा है।

नोखा दैय्या डैम में कितना पानी बचा है? — सिर्फ 7 दिन का। सामान्य दिनों में इस डैम में 28 दिन का पानी रिजर्व रहता है।

कितने गांव और कस्बे प्रभावित हैं? — डीडवाना-कुचामन जिले के 7 कस्बे और 785 गांव इस जल संकट की चपेट में हैं।

सरकार क्या कर रही है? — नहर विभाग के अधिकारी सप्लाई रिस्टोर कराने के लिए उच्च अधिकारियों से संपर्क में हैं। विधायक हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है, और विभाग ने लोगों से पानी बचाने की अपील की है।

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स्रोत: ETV Bharat

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