रबी सीजन से पहले राजस्थान के किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर सामने आई है। चंबल जल बंटवारा बैठक में फैसला हुआ है कि 18 अक्टूबर से चंबल की नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि प्रदेश के करीब 2.7 लाख हेक्टेयर खेतों तक इस रबी सीजन में सिंचाई का पानी पहुंचेगा — ठीक उसी समय जब गेहूं, सरसों और चने की बुवाई की तैयारियां जोरों पर हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार गांधी सागर डैम सिर्फ 75 प्रतिशत ही भरा है। फिर भी चंबल जल बंटवारा बैठक में शामिल अधिकारियों ने साफ कहा कि रबी सीजन में किसानों को पानी की कोई दिक्कत नहीं आएगी — कमजोर मानसून के बावजूद सिंचाई का इंतजाम पूरा कर लिया गया है।
चंबल जल बंटवारा: फैसले के मुख्य आंकड़े एक नजर में
इस बार की चंबल जल बंटवारा बैठक में सामने आए मुख्य आंकड़े:
| विषय | आंकड़ा |
|---|---|
| नहरों में पानी शुरू | 18 अक्टूबर 2026 |
| राजस्थान में सिंचित क्षेत्र | 2.7 लाख हेक्टेयर |
| मध्य प्रदेश में सिंचित क्षेत्र | लगभग 2.7 लाख हेक्टेयर |
| दाईं मुख्य नहर में शुरुआती पानी | 2000 क्यूसेक |
| दाईं नहर की अधिकतम क्षमता | 6500 क्यूसेक |
| बाईं नहर की अधिकतम क्षमता | 1500 क्यूसेक |
| गांधी सागर का वर्तमान स्तर | 1302 फीट (सामान्य 1312 फीट) |
| गांधी सागर में पानी | 75 प्रतिशत |
| राणा प्रताप सागर का रखरखाव स्तर | 1145 से 1150 फीट |
चंबल जल बंटवारा बैठक में क्या-क्या तय हुआ
बुधवार को हुई यह ऑनलाइन बैठक चंबल नदी की नहरों के रबी सीजन में जल बंटवारे को लेकर थी। इसमें जयपुर और भोपाल के साथ-साथ कोटा और मंदसौर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े। दोनों राज्यों के शीर्ष जल प्रबंधन की सहमति से फैसला लिया गया है।
बैठक में तय हुआ कि 18 अक्टूबर से चंबल की दाईं और बाईं — दोनों मुख्य नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा। शुरुआत में मध्य प्रदेश की ओर जाने वाली दाईं मुख्य नहर में 2000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा, और उसके बाद डिमांड के अनुसार मात्रा बढ़ाई जाएगी। चंबल कमांड एरिया के अधीक्षण अभियंता संजय कुमार सिंह ने बताया कि दाईं नहर से राजस्थान में 2.7 लाख हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में भी लगभग इतना ही क्षेत्र सिंचित होगा।
गांधी सागर में सिर्फ 75 प्रतिशत पानी, फिर भी रबी की गारंटी कैसे
सबसे बड़ा सवाल यही है — जब डैम में पानी कम है तो रबी सीजन में दिक्कत क्यों नहीं होगी? इसका जवाब चंबल नदी की डैम श्रृंखला की व्यवस्था में है।
गांधी सागर डैम का सामान्य स्तर 1312 फीट रहता है, लेकिन इस बार बारिश कम होने से स्तर 1302 फीट के आसपास ही है। बीते कई सालों से यह डैम लगातार फुल हो जाता था और ओवरफ्लो के बाद अतिरिक्त पानी छोड़ा भी जाता था — इस साल ऐसा नहीं हुआ। फिर भी अधीक्षण अभियंता संजय कुमार सिंह का कहना है कि रबी सीजन में कोई दिक्कत नहीं आएगी और पूरा पानी किसानों को दिया जाएगा।
नहरों को पानी सीधे गांधी सागर से नहीं मिलता — सबसे ऊपर गांधी सागर, फिर राणा प्रताप सागर, उसके बाद जवाहर सागर और सबसे नीचे कोटा बैराज से नहरें निकलती हैं। इसलिए राणा प्रताप सागर का स्तर ही निर्णायक है: चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा स्थित इस बांध का स्तर 1145-1150 फीट पर मेंटेन होगा (पूर्ण क्षमता 1157 फीट)। गांधी सागर करीब 100 किलोमीटर ऊपर है, इसलिए वहां से नहरों का स्तर मेंटेन नहीं हो सकता। जल संसाधन से जुड़ी पिछली बड़ी खबर के बाद यह इस साल की दूसरी बड़ी पानी-संबंधी घोषणा है।
एक चेतावनी भी अधिकारियों ने दी है — अगर साल 2027 में मानसून फिर कमजोर रहता है, तो अगले साल के खरीफ सीजन में पानी की दिक्कत आ सकती है। लेकिन मौजूदा रबी सीजन के लिए किसान पूरी तरह निश्चिंत रह सकते हैं।
डैम से खेत तक: पानी पहुंचने का रास्ता और किसानों के लिए मतलब
पहले राणा प्रताप सागर बांध का स्तर 1150 फीट तक मेंटेन किया जाता है। वहां से पानी जवाहर सागर डैम में आता है, फिर कोटा बैराज तक पहुंचता है। कोटा बैराज से ही दाईं और बाईं मुख्य नहरें निकलती हैं — दाईं नहर में 6500 क्यूसेक और बाईं नहर में 1500 क्यूसेक तक पानी छोड़ा जा सकता है। चंबल कमांड क्षेत्र के कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ जैसे जिलों के किसान इस चंबल जल बंटवारा का सबसे बड़ा लाभ उठाएंगे।
इस फैसले का सबसे सीधा असर रबी फसलों की बुवाई पर पड़ेगा। गेहूं, सरसों, चना और जौ की बुवाई अक्टूबर के आखिर और नवंबर की शुरुआत में होती है, और पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद चाहिए होती है। 18 अक्टूबर से नहरें चालू होने का मतलब है कि बुवाई के समय खेतों में नमी का इंतजाम रहेगा। जिन किसानों ने कम बारिश की वजह से बुवाई को लेकर हिचक दिखाई थी, उनके लिए यह फैसला हरी झंडी जैसा है।
नहर कमांड क्षेत्र के किसान अपने नजदीकी सिंचाई विभाग से पानी का रोटेशन शेड्यूल जरूर पता कर लें। खरीफ सीजन में फसलों की सरकारी खरीद के बाद अब रबी की तैयारी में पानी की गारंटी किसानों का भरोसा बढ़ाएगी, और मंडी भावों की ताजा स्थिति को देखते हुए सरसों-गेहूं में अच्छी आमदनी की उम्मीद है।
ईस्टर्न राजस्थान कैनाल परियोजना (ERCP) में 5195 एमसीएम पानी का राजस्थान-मध्य प्रदेश बंटवारा पहले ही तय है (राजस्थान 65%, मध्य प्रदेश 35%)। यह चंबल जल बंटवारा उसी बड़ी जल-योजना का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: चंबल की नहरों में पानी कब से छोड़ा जाएगा?
उत्तर: 18 अक्टूबर 2026 से चंबल की दाईं और बाईं दोनों मुख्य नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। शुरुआत में दाईं नहर में 2000 क्यूसेक पानी, जिसे डिमांड के हिसाब से बढ़ाया जाएगा।
प्रश्न 2: राजस्थान के कितने क्षेत्र में सिंचाई होगी?
उत्तर: दाईं मुख्य नहर से राजस्थान में करीब 2.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा। इतना ही क्षेत्र मध्य प्रदेश में भी इस नहर से सिंचाई के दायरे में आएगा।
प्रश्न 3: गांधी सागर डैम में पानी कम है तो रबी में दिक्कत क्यों नहीं होगी?
उत्तर: नहरों को पानी सीधे गांधी सागर से नहीं, बल्कि राणा प्रताप सागर बांध के जरिए कोटा बैराज से मिलता है। राणा प्रताप सागर का स्तर 1145-1150 फीट पर मेंटेन किया जाएगा — चंबल जल बंटवारा की पूरी तकनीकी व्यवस्था इसी पर टिकी है, इसलिए गांधी सागर में 75 प्रतिशत पानी होने के बावजूद रबी सिंचाई पर असर नहीं पड़ेगा।
प्रश्न 4: किसान अपने खेत के लिए पानी का शेड्यूल कैसे जानें?
उत्तर: नहर कमांड क्षेत्र के किसान अपने नजदीकी सिंचाई विभाग के कार्यालय से पानी के रोटेशन शेड्यूल की जानकारी ले सकते हैं।