दीपावली से पहले पकड़ा गया डीग मिलावटी पनीर का खेल
दीपावली पर जब हर घर में पनीर की मांग बढ़ जाती है, डीग जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जो हर खरीदार को चौकन्ना कर देगी। डीग मिलावटी पनीर के मामले में पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने कैथवाड़ा थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी करके करीब 1800 किलोग्राम मिलावटी पनीर को मौके पर ही नष्ट करा दिया। यह पनीर दूध से नहीं, बल्कि सोयाबीन तेल, पामोलीन तेल और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसे सस्ते पदार्थों से तैयार किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि इस नकली पनीर की खपत राजस्थान के साथ-साथ हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक हो रही थी। यानी अगर यह कार्रवाई कुछ दिन और टल जाती, तो दीपावली के पकवानों में यही मिलावटी पनीर परोसा जा सकता था।
दोनों प्लांट गांवों और जंगल के सुनसान ठिकानों में चलाए जा रहे थे। तैयार पनीर हर दो-तीन दिन में दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। मौके से एक पिकअप वाहन भी जब्त किया गया है। कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य संचालक समेत कई आरोपी फरार हैं।
सेहत के लिए क्यों खतरनाक था यह पनीर
असली पनीर दूध को फाड़कर बनाया जाता है और उसमें प्रोटीन व कैल्शियम होता है। पुलिस के अनुसार, यहां सोयाबीन ऑयल, रिफाइंड पामोलीन ऑयल और एसएमपी पाउडर को मिलाकर पनीर जैसी चीज तैयार की जा रही थी। मौके से महाराजा वेस्ट मशीन क्लीन पाउडर के कट्टे भी मिले हैं, जो आमतौर पर मशीनों की सफाई में इस्तेमाल होता है। ऐसे पदार्थों से बना पनीर दिखने में असली जैसा लग सकता है, लेकिन वह पेट, लिवर और पाचन तंत्र के लिए नुकसानदेह हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी जोखिम भरा होता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जब्त पनीर मौके पर ही नष्ट कराया और नमूने जांच के लिए लिए।
असली और नकली पनीर में फर्क कैसे पहचानें
नकली पनीर को पूरी तरह पहचानना सिर्फ लैब जांच से ही संभव है, लेकिन कुछ सामान्य सावधानियां खरीदार को बचा सकती हैं। असली पनीर दबाने पर हल्का नरम होता है और टूटने पर दानेदार दिखता है, जबकि मिलावटी पनीर अक्सर ज्यादा चिकना, रबड़ जैसा या जरूरत से ज्यादा सख्त लगता है। पनीर को गर्म करने पर अगर उसमें से असामान्य मात्रा में तेल छूटे या अजीब सी गंध आए, तो सतर्क हो जाना चाहिए। हमेशा दुकान का खाद्य सुरक्षा लाइसेंस और पनीर की पैकिंग पर दी गई जानकारी देखें। खुले में, बिना ढके या गंदगी वाली जगह पर रखा पनीर कभी न खरीदें। संदिग्ध पनीर की शिकायत जिला खाद्य सुरक्षा विभाग को की जा सकती है।
जब्ती का पूरा हिसाब
जब्ती के आंकड़े ही इस धंधे का आकार दिखाते हैं।
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल नष्ट मिलावटी पनीर | 1800 किलोग्राम |
| जाजमका में मिला पनीर | 1600 किलोग्राम |
| मांची के जंगल में मिला पनीर | 200 किलोग्राम |
| जब्त एसएमपी पाउडर | 18 कट्टे |
| रिफाइंड पामोलीन ऑयल | 11 पीपे |
| सोयाबीन ऑयल | 2 पीपे |
| मशीन क्लीन पाउडर | 3 कट्टे |
| जब्त पिकअप वाहन | आरजे 05 जीसी 1551 |
| गिरफ्तार आरोपी | 2 |
मुखबिर की सूचना से लेकर दोहरी छापेमारी तक
पुलिस को मेवात क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिलावटी पनीर बनाए जाने की सूचना मिली थी। पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ के निर्देशन में कैथवाड़ा पुलिस, जिला विशेष टीम और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम बनाई गई। थाना अधिकारी हीरालाल मीणा, डीएसटी उपनिरीक्षक अमर सिंह और खाद्य सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र सिंह कार्रवाई में शामिल रहे।
पहली छापेमारी जाजमका गांव में एक मकान में चल रही डेयरी पर हुई, जो शरीफ के मकान में मसूद की बताई जा रही है। टीम को देखते ही लोग भागने लगे, लेकिन घेराबंदी करके पुलिस ने साहिल को पकड़ लिया। मौके से एसएमपी पाउडर और रिफाइंड तेल के पीपे भी बरामद हुए। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में 1600 किलोग्राम मिलावटी पनीर वहीं नष्ट कराया गया। दूसरी छापेमारी मांची के जंगल में ग्राम धर्मशाला के पास हुई, जहां ओलन्दा निवासी अयूब की डेयरी चल रही थी। इस प्लांट का संचालन अयूब और मुहीद के हाथ में बताया जा रहा है। यहां से पुलिस ने अल्ली उर्फ अलीजान (40) को गिरफ्तार किया और 200 किलोग्राम पनीर नष्ट कराया। दोनों मामलों में कैथवाड़ा थाने में भारतीय न्याय संहिता और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ है।
मेवात से दिल्ली-हरियाणा तक फैला नेटवर्क
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसका फैलाव है। पुलिस के अनुसार, आरोपी दो-तीन दिन के अंतराल पर तैयार मिलावटी पनीर को हरियाणा और दिल्ली भेजते थे। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस नकली पनीर की आपूर्ति उत्तर प्रदेश तक भी हो रही थी। फरार आरोपियों में घासेड़ा निवासी मसूद के अलावा नाटोली (हरियाणा) निवासी अफजल और अलीम तथा उटावड़ (हरियाणा) निवासी जावेद के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े व्यापारियों की भी जांच कर रही है।
आगे क्या होगा और खरीदार क्या करें
दीपावली से पहले दूध, मावा, घी, मिठाई और खाद्य तेल की मांग कई गुना बढ़ जाती है और इसी मौसम में मिलावटखोर सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं। इसलिए खाद्य सुरक्षा विभाग इन दिनों औचक निरीक्षण कर रहा है। डीग की यह कार्रवाई भी उसी अभियान की कड़ी है। इससे पहले जयपुर में भी नकली पनीर के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है और पाली में मिलावटी घी की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। आगे जब्त पनीर के नमूनों की लैब रिपोर्ट अहम होगी। मिलावट की पुष्टि होने पर आरोपियों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी। फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं।
खरीदारों के लिए सलाह साफ है: हमेशा भरोसेमंद और लाइसेंस वाली दुकान से ही पनीर खरीदें। बहुत सस्ते पनीर पर शक करें, क्योंकि असली पनीर एक सीमा से सस्ता नहीं हो सकता। नकली पनीर बेचने वाली दुकान की सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को दें — आपकी एक शिकायत कई परिवारों की सेहत बचा सकती है। दीपावली की तैयारियों में शुद्ध मिठाई और खाद्य सामग्री चुनना ही समझदारी है।
डीग मिलावटी पनीर पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डीग में कितना मिलावटी पनीर नष्ट किया गया?
कुल 1800 किलोग्राम — जाजमका से 1600 और मांची के जंगल वाले प्लांट से 200 किलोग्राम।
इस मामले में कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं — जाजमका से साहिल और मांची से अल्ली उर्फ अलीजान। मुख्य संचालक मसूद समेत कई आरोपी फरार हैं।
नकली पनीर कैसे बनाया जा रहा था?
पुलिस के अनुसार, पनीर दूध से नहीं बल्कि सोयाबीन ऑयल, पामोलीन ऑयल और एसएमपी पाउडर मिलाकर बनाया जा रहा था।
नकली पनीर कहां-कहां बेचा जा रहा था?
तैयार पनीर हर दो-तीन दिन में हरियाणा और दिल्ली भेजा जाता था, और रिपोर्टों के अनुसार आपूर्ति उत्तर प्रदेश तक भी हो रही थी।
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