राजस्थान निवेश रोजगार: 6 महीने में 31,892 मंजूरियां, जयपुर नंबर-1

राजस्थान निवेश रोजगार की सबसे बड़ी खबर: छह महीने में ही पिछले पूरे साल का रिकॉर्ड टूटा

राजस्थान निवेश रोजगार के मोर्चे पर इस साल एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जो पिछले कई सालों की रफ्तार से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाता है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच, यानी सिर्फ छह महीने में, राजनिवेश की एकल खिड़की व्यवस्था पर 31,892 आवेदनों को मंजूरी मिल गई। हैरानी की बात यह है कि यह संख्या पिछले पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में दी गई कुल 29,536 स्वीकृतियों से भी ज्यादा है। यानी आधे साल में ही पिछले पूरे साल का रिकॉर्ड टूट गया।

यह जानकारी मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने ‘डिरेगुलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन फेज-1’ की सितंबर 2026 की मासिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट के निष्कर्ष साझा करते हुए दी। अकेले सितंबर में ही राजनिवेश पर 11,739.27 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दर्ज हुए। यह रफ्तार बताती है कि राज्य में कारोबार शुरू करने और विस्तार करने की प्रक्रिया अब पहले से कहीं तेज हो रही है।

छह महीने का हिसाब: आवेदन, मंजूरी और रफ्तार में कितना बदलाव

राजनिवेश की एकल खिड़की व्यवस्था पर इस समय 190 सेवाएं उपलब्ध हैं। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान इस पर कुल 60,229 आवेदन आए, जबकि पिछले पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में सिर्फ 34,704 आवेदन आए थे — यानी आवेदन आने की रफ्तार लगभग दोगुनी हो गई है। सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली 10 सेवाओं के लिए ही 51,548 आवेदन आए, जो कुल आवेदनों का करीब 86 प्रतिशत है।

निस्तारण दर में भी सुधार दिखा है — अगस्त में 47 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 52 प्रतिशत। यानी मंजूरियों की रफ्तार हर महीने बढ़ रही है, हालांकि अभी भी लगभग आधे आवेदन प्रक्रिया में हैं।

किस जिले में कितनी मंजूरी: जयपुर सबसे आगे, जोधपुर दूसरे नंबर पर

राजस्थान निवेश रोजगार के जिलावार आंकड़ों में जयपुर 5,501 स्वीकृतियों के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद जोधपुर में 2,577, अजमेर में 1,808, कोटा में 1,452 और हनुमानगढ़ में 1,238 स्वीकृतियां दी गईं। डीडवाना-कुचामन, सीकर, भीलवाड़ा, अलवर और उदयपुर भी अग्रणी जिलों में शामिल रहे।

जिला स्वीकृतियां (अप्रैल-सितंबर 2026)
जयपुर 5,501
जोधपुर 2,577
अजमेर 1,808
कोटा 1,452
हनुमानगढ़ 1,238

रिपोर्ट में जिलावार आंकड़ों के आधार पर बाधाओं की पहचान कर सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि धीमी गति वाले जिलों की अड़चनें अलग से दूर की जा सकें।

सितंबर में कहां आया सबसे ज्यादा निवेश: रक्षा और पर्यटन सबसे आगे

सितंबर 2026 में दर्ज हुए 11,739.27 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में चार क्षेत्रों की हिस्सेदारी लगभग 82 प्रतिशत रही। रक्षा क्षेत्र में 4,840 करोड़ रुपये, पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में 3,058 करोड़ रुपये, सौर उपकरण निर्माण में 1,000 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति क्षेत्र में 744 करोड़ रुपये के प्रस्ताव दर्ज हुए।

रक्षा क्षेत्र में निवेश से कुशल और अर्ध-कुशल, दोनों तरह के रोजगार बनते हैं। पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में निवेश का फायदा सीधे स्थानीय युवाओं और छोटे कारोबारियों को मिलता है, जबकि सौर उपकरण निर्माण राज्य की अक्षय ऊर्जा वाली पहचान को मजबूत करता है।

इसके अलावा, रीको के भूमि आवंटन से जुड़ी परियोजनाओं में 1,080 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिनसे लगभग 2,100 रोजगार अवसर बनने की संभावना है।

कारोबार आसान करने के लिए क्या-क्या बदला: 90 दिन का काम अब 45 दिन में

इस रफ्तार के पीछे सबसे बड़ा कारण नियमों को सरल करना, यानी डिरेगुलेशन है। प्रथम चरण के सभी 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में सुधार पूरे हो गए हैं, जिनका मकसद प्रक्रियाएं सरल बनाना, अनुपालन का बोझ कम करना और सेवाएं समय पर देना है।

सबसे ठोस बदलाव समयसीमाओं में दिखा है। भूमि रूपांतरण की समयसीमा 90 दिन से घटाकर 45 दिन कर दी गई है। जयपुर विद्युत वितरण निगम में स्थायी बिजली कनेक्शन के आवेदनों का निस्तारण समय 10 दिन से घटकर 4 दिन हो गया है। विधिक मापविज्ञान से जुड़े आवेदनों का समय 12 दिन से घटकर 6 दिन रह गया है। ये छोटे-छोटे बदलाव किसी भी नए कारोबार के लिए महीनों का समय बचाते हैं।

पर्यावरण से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। श्वेत श्रेणी में शामिल गतिविधियों की संख्या 104 से बढ़ाकर 877 कर दी गई है। इसका मतलब है कि अब ज्यादा गतिविधियों को पर्यावरणीय मंजूरी की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। साथ ही, समयबद्ध मंजूरी, स्वप्रमाणन, जोखिम के आधार पर निरीक्षण, श्रम संबंधी लचीले प्रावधान और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था जैसी पहलों का भी रिपोर्ट में उल्लेख है।

डिरेगुलेशन प्रकोष्ठ ने अलवर के रीको औद्योगिक क्षेत्रों की चुनिंदा इकाइयों का दौरा भी किया, जहां स्वच्छ ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, पुनर्चक्रण और कर्मचारी प्रशिक्षण जैसी पहलों का अध्ययन किया गया।

राजस्थान निवेश रोजगार: युवाओं और उद्यमियों के लिए इसका मतलब क्या है

आंकड़ों से परे, इस रिपोर्ट का असली मतलब यह है कि राजस्थान में कारोबार शुरू करना अब पहले से आसान और तेज हो गया है। अपना स्टार्टअप या छोटा उद्योग शुरू करने वाले युवाओं के लिए एकल खिड़की व्यवस्था का मतलब है अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे — 190 सेवाएं एक जगह मिलने से समय और खर्च, दोनों बचते हैं।

नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए रीको परियोजनाओं से बनने वाले करीब 2,100 रोजगार अवसर और रक्षा, पर्यटन व सौर उपकरण निर्माण में आने वाला निवेश नई संभावनाएं खोलता है। हालांकि, प्रस्ताव दर्ज होना और फैक्ट्री या होटल का धरातल पर शुरू होना दो अलग बातें हैं — इसलिए आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि कितनी परियोजनाएं वास्तव में जमीन पर उतरती हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: राजनिवेश पर छह महीने में कितने आवेदन मंजूर हुए?
उत्तर: अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 31,892 आवेदनों को स्वीकृति मिली, जो पिछले पूरे वित्त वर्ष की 29,536 स्वीकृतियों से ज्यादा है।

प्रश्न: सबसे ज्यादा मंजूरियां किस जिले में मिलीं?
उत्तर: जयपुर 5,501 स्वीकृतियों के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद जोधपुर (2,577), अजमेर (1,808), कोटा (1,452) और हनुमानगढ़ (1,238) का नंबर आता है।

प्रश्न: सितंबर 2026 में कितने करोड़ का निवेश प्रस्ताव दर्ज हुआ?
उत्तर: सितंबर 2026 में राजनिवेश पर 11,739.27 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दर्ज हुए, जिनमें रक्षा (4,840 करोड़) और पर्यटन (3,058 करोड़) सबसे आगे रहे।

प्रश्न: डिरेगुलेशन से कारोबारियों को क्या फायदा हुआ?
उत्तर: भूमि रूपांतरण 90 से 45 दिन, बिजली कनेक्शन 10 से 4 दिन और विधिक मापविज्ञान के आवेदन 12 से 6 दिन में निपटने लगे हैं।

यह रफ्तार अगर बनी रही, तो राज्य में कारोबार और रोजगार, दोनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगली मासिक रिपोर्ट बताएगी कि मंजूरियों की दर 52 प्रतिशत से और ऊपर जाती है या नहीं।

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