पाली मिलावटी घी: 8303 लीटर जब्त, CID की बड़ी कार्रवाई

दीपावली से ठीक पहले घी, मिठाई और दूध के उत्पादों की मांग बाजार में अपने चरम पर पहुंच जाती है। इस सीजन में हर घर में पकवान बनते हैं और घी की खपत कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में पाली मिलावटी घी कांड ने पूरे प्रदेश के उपभोक्ताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है — सीआईडी क्राइम ब्रांच ने पाली के फालना स्थित एक फैक्ट्री से 8303 लीटर संदिग्ध मिलावटी घी सीज किया है।

ये कोई छोटी-मोटी कार्रवाई नहीं है। आठ हजार लीटर से ज्यादा घी का मतलब है टैंकरों भर सामान, जो अगर बाजार में पहुंच जाता तो हजारों घरों के खाने-पीने में शामिल हो जाता।

पाली मिलावटी घी: इतनी बड़ी मात्रा क्यों मायने रखती है

दीपावली के समय राजस्थान में घी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। मिठाई दुकानों से लेकर घरेलू पकवान तक, हर जगह घी का इस्तेमाल होता है।

मिलावटखोर इसी मांग का फायदा उठाते हैं — असली घी में वनस्पति तेल या सस्ते रासायनिक पदार्थ मिलाकर लागत घटाते हैं और सस्ते दाम पर बेचकर बाजार में अपनी जगह बनाते हैं।

पाली के फालना में जब्त किया गया घी ‘श्री किसान’ मार्का के नाम से बेचा जा रहा था। 8303 लीटर की यह मात्रा बताती है कि यह कोई घरेलू या छोटा कारोबार नहीं था, बल्कि एक संगठित फैक्ट्री स्तर का उत्पादन था।

मुखबिर की सूचना पर ‘शुद्ध आहार-मिलावट पर वार’ अभियान की बड़ी सफलता

यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। त्योहारी सीजन में आम जनता को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिलें, इसके लिए सीआईडी क्राइम ब्रांच ने मिलावटखोरों के खिलाफ कमर कस ली है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध शाखा) बिपिन कुमार पाण्डेय के निर्देशन में चल रहे इस अभियान का नाम है — ‘शुद्ध आहार-मिलावट पर वार’।

इस विशेष कार्रवाई में महानिरीक्षक पुलिस के.बी. वन्दना और उप महानिरीक्षक राशि डोगरा डूडी के मार्गदर्शन में उपनिरीक्षक शैलेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था। टीम में सहायक उपनिरीक्षक शंकर दयाल, हेड कांस्टेबल रविन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल रामसिंह और कांस्टेबल नरेश कुमार शामिल थे।

टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि फालना के जादरी रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्थित किसान डेयरी एंड फूड प्राइवेट लिमिटेड में अमानक रासायनिक सामग्री से मिलावटी घी तैयार किया जा रहा था। सूचना का सत्यापन करने के बाद सीआईडी की टीम ने खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई की।

पाली मिलावटी घी फैक्ट्री में क्या मिला, अब आगे क्या होगा

छापे के दौरान फैक्ट्री परिसर से श्री किसान मार्का का कुल 8303 लीटर संदिग्ध मिलावटी घी बरामद हुआ, जिसे खाद्य मानकों पर खरा न उतरने के कारण मौके पर ही सीज कर दिया गया। घी के अलावा पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले रैपर, उपकरण और मिलावट में काम आने वाली सामग्री भी मिली है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने घी के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही घी में मिलावट की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। इस बीच फैक्ट्री के मालिक खेताराम माली (निवासी मोडिया बेरा, रणकपुर रोड, सादड़ी, जिला पाली) से पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि इसी तरह की कार्रवाइयां प्रदेश में लगातार हो रही हैं। हाल ही में जयपुर में 520 किलो संदिग्ध पनीर नष्ट किया गया था और मुहाना मंडी स्थित अचार फैक्ट्री से 85 हजार किलो अचार और कच्चा माल सीज हुआ था।

मिलावट पकड़ी गई तो कितनी सजा मिल सकती है

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाना, बेचना या भंडारण करना गंभीर अपराध है। घी जैसी रोजमर्रा की चीज में मिलावट के मामले में मिलने वाली सजाओं का ब्योरा इस तालिका में देखिए:

अपराध की श्रेणी संभावित सजा जुर्माना
असुरक्षित/हानिकारक मिलावट (सेहत को खतरा) 6 महीने से आजीवन कारावास तक 1 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक
घटिया या अमानक खाद्य पदार्थ 6 महीने तक कारावास 5 लाख रुपये तक
गलत ब्रांड या नकली लेबल 6 महीने तक कारावास 5 लाख रुपये तक
लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन 6 महीने तक कारावास 5 लाख रुपये तक

लैब रिपोर्ट में अगर घी में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थ पाए जाते हैं, तो फैक्ट्री मालिक के खिलाफ सबसे कठोर धाराओं में मुकदमा चल सकता है और फूड लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।

असली और नकली घी में फर्क: घर बैठे 5 आसान जांच

महंगाई के दौर में हर कोई सस्ता घी तलाशता है, लेकिन सस्ते के चक्कर में नकली घी घर लाना सेहत के साथ खिलवाड़ है। कुछ सरल घरेलू जांचों से आप असली घी की पहचान कर सकते हैं:

  • 1. हथेली वाली जांच: थोड़ा सा घी हथेली पर रखकर रगड़ें। असली घी शरीर की गर्मी से तुरंत पिघल जाता है, जबकि नकली घी में वक्त लगता है।
  • 2. गर्म तवे वाली जांच: एक चम्मच घी गर्म तवे पर डालें। शुद्ध घी तुरंत पिघलकर सुनहरा-भूरा हो जाता है, नकली घी से ज्यादा झाग या अजीब गंध आती है।
  • 3. आयोडीन टेस्ट: पिघले घी में आयोडीन की 2-3 बूंद डालें। अगर रंग नीला या बैंगनी हो जाए, तो उसमें स्टार्च की मिलावट है।
  • 4. चीनी वाली जांच: एक चम्मच घी में चुटकी भर चीनी डालकर गर्म करें। शुद्ध घी में चीनी घुलकर लाल रंग की परत बनाती है।
  • 5. डिब्बे और लेबल की जांच: FSSAI लाइसेंस नंबर, बैच नंबर और निर्माण तिथि डिब्बे पर स्पष्ट होनी चाहिए। धुंधला प्रिंट या अधूरी जानकारी वाला पैक न खरीदें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: पाली में कितना मिलावटी घी जब्त हुआ है?
उत्तर: सीआईडी क्राइम ब्रांच और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त कार्रवाई में फालना स्थित फैक्ट्री से 8303 लीटर संदिग्ध मिलावटी घी सीज किया गया है।

प्रश्न: कार्रवाई किस अभियान के तहत हुई?
उत्तर: यह कार्रवाई ‘शुद्ध आहार-मिलावट पर वार’ अभियान के तहत की गई है, जो पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर त्योहारी सीजन में चलाया जा रहा है।

प्रश्न: फैक्ट्री मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
उत्तर: घी के नमूने लैब जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मालिक खेताराम माली से पूछताछ चल रही है।

प्रश्न: नकली घी खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं?
उत्तर: मिलावटी घी में रासायनिक पदार्थ या सस्ते तेल मिले हो सकते हैं। इससे पाचन तंत्र की बीमारियां, हृदय रोग और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

Leave a Comment