राजस्थान खेल प्रतिभा असेसमेंट: 41 जिलों के 70.6 लाख विद्यार्थियों की जांच, 13000 खिलाड़ियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

जयपुर। खेल की दुनिया में राजस्थान अब अपनी प्रतिभाओं को किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ना चाहता। राजस्थान स्टेट स्पोर्ट्स काउन्सिल ने एक ऐसी पहल का ऐलान किया है, जिसका पैमाना पूरे देश में अपनी तरह का अनूठा माना जा रहा है — प्रदेश के 70.6 लाख विद्यार्थियों की खेल प्रतिभा का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। अंतिम लक्ष्य है: 2036 के ओलम्पिक समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए 13000 उभरते खिलाड़ियों को तैयार करना।

यह राजस्थान खेल प्रतिभा असेसमेंट काउन्सिल की अब तक की सबसे बड़ी पहल है। 41 जिलों में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, और दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत दो लाख विद्यार्थियों का परीक्षण पहले ही पूरा हो चुका है। 5 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की हेल्थ और फिजिकल असेसमेंट का यह सिलसिला अब सालाना तौर पर चलेगा, यानी खिलाड़ियों की फिटनेस का नियमित रिकॉर्ड रखा जाएगा।

70.6 लाख विद्यार्थियों का आकलन: पैमाना क्यों है खास

खेल विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिभा की पहचान में सबसे बड़ी चुनौती “छूट जाना” होती है। गांव-कस्बों में ऐसे दर्जनों बच्चे होते हैं जिनमें खेल की जबरदस्त क्षमता है, लेकिन उन्हें सही समय पर न जांच मिली, न मार्गदर्शन। स्पोर्ट्स काउन्सिल के सचिव राजकेश मीणा का कहना है कि इस योजना का मकसद शुरुआती उम्र में ही प्रतिभाशाली बच्चों को पहचानना और उन्हें खेलों में आगे बढ़ने का अवसर देना है।

आकलन में बेहतर क्षमता वाले खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें काउन्सिल की अकादमियों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। गौरतलब है कि यह घोषणा खेल नीति-2026 पर व्यापक चर्चा के बाद आई है — हाल ही में खिलाड़ियों और खेल संघों से सुझाव लेकर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के लिए खेल निदेशालय बनाने पर भी विचार हुआ था। राजस्थान TOPS योजना के तहत ओलम्पिक पोडियम तक पहुंचेंगे 50 खिलाड़ी। नई असेसमेंट योजना उसी दिशा का अगला बड़ा कदम है: जहां TOPS तैयार प्रतिभाओं को तराशती है, वहीं यह असेसमेंट प्रतिभा की खोज ही गहराई से करेगा।

कौन-कौन शामिल होगा और किन क्षेत्रों पर रहेगा जोर

इस राजस्थान खेल प्रतिभा असेसमेंट की सबसे अच्छी बात इसका समावेशी चरित्र है। काउन्सिल ने साफ किया है कि:

  • राज्य के प्रत्येक विद्यालय और प्रत्येक क्षेत्र में छिपी खेल प्रतिभाओं की वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष पहचान की जाएगी
  • ग्रामीण, दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों की प्रतिभाओं को समान अवसर और मंच उपलब्ध कराया जाएगा
  • बालक-बालिकाएं, दोनों वर्ग के 5 से 15 वर्ष के बच्चे इस आकलन में शामिल होंगे
  • प्रतिभावान खिलाड़ियों को उनकी क्षमता और उपयुक्त खेल के अनुरूप प्रशिक्षण और विकास के अवसर मिलेंगे

यानी जैसलमेर के सीमावर्ती गांव का बच्चा हो या जयपुर के किसी स्कूल की बच्ची — दोनों को एक जैसे वैज्ञानिक टेस्ट के जरिए परखा जाएगा। प्रतिभा की पहचान से लेकर उच्च प्रदर्शन तक का दीर्घकालिक खिलाड़ी विकास पथ तैयार किया जा रहा है।

राजस्थान खेल प्रतिभा असेसमेंट: तीन चरणों में मूल्यांकन प्रक्रिया

राजकेश मीणा ने बताया कि असेसमेंट की प्रक्रिया त्रिस्तरीय होगी, और हर चरण में परीक्षण और भी सटीक होते जाएंगे:

चरणस्तरमुख्य परीक्षण
पहलाविद्यालय स्तर30 मीटर दौड़, स्टैंडिंग ब्रॉड जंप, फॉरवर्ड बेंड, स्टैंडिंग वर्टिकल जंप, शटल रन, ऊंचाई-वजन का वैज्ञानिक माप (विद्यालय शिक्षा विभाग की देखरेख में)
दूसराजिला स्तरपहले चरण के परीक्षणों के साथ 800 मीटर दौड़ और मेडिसिन बॉल थ्रो — सहनशक्ति की जांच (जिला क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षण समिति के नेतृत्व में)
तीसराराज्य स्तरप्लेट टैपिंग और पार्शियल कर्ल-अप जैसे आधुनिक परीक्षण; इसी आधार पर अंतिम 13,000 खिलाड़ियों की सूची तैयार

सचिव राजकेश मीणा के अनुसार, इस प्रक्रिया से खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता, फिटनेस और खेल के प्रति दक्षता का आकलन किया जाएगा। पहले चरण में प्राथमिक मूल्यांकन, दूसरे में सहनशक्ति की परख और तीसरे में आधुनिक टेस्ट के जरिए अंतिम चयन होगा।

राजस्थान खेल प्रतिभा असेसमेंट: खेलमित्र पोर्टल और फिटनेस रिकॉर्ड

यह योजना एक बार के आयोजन की तरह नहीं सोची गई है — खिलाड़ियों की फिटनेस और शारीरिक क्षमता का नियमित रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि पता चल सके कि किस खिलाड़ी को किस तरह के प्रशिक्षण की जरूरत है और किस खेल में उसकी क्षमता बेहतर है।

सबसे आधुनिक पहल है खेलमित्र पोर्टल के जरिए राज्यव्यापी डिजिटल एथलीट डेटाबेस तैयार करना। चयनित प्रत्येक खिलाड़ी को एक विशिष्ट प्रतिभा ID दी जाएगी। इस डेटाबेस में खिलाड़ियों के प्रदर्शन, फिटनेस, प्रगति और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का दीर्घकालिक मूल्यांकन किया जा सकेगा — एक बच्चे का पूरा खेल सफर डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज रहेगा।

क्यों मायने रखता है यह फैसला

आज जिन देशों का ओलम्पिक में दबदबा है, उन्होंने प्रतिभा-पहचान को वैज्ञानिक प्रणाली में बदल दिया है। 2036 के ओलम्पिक की मेजबानी की उम्मीदों के बीच राज्यों की भूमिका बढ़ी है, और राजस्थान के लिए यह दांव इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रदेश में एथलेटिक्स, कुश्ती, तीरंदाजी, शूटिंग और साइक्लिंग जैसे खेलों में कच्ची प्रतिभा की कमी कभी नहीं रही — कमी रही तो सिस्टम की। पायलट में दो लाख बच्चों का परीक्षण पूरा होना बताता है कि यह योजना कागज पर नहीं, जमीन पर उतर चुकी है। जयपुर के यशवीर सिंह का एशियन गेम्स में रजत पदक।

कुल मिलाकर, यह राजस्थान खेल प्रतिभा असेसमेंट खेल प्रतिभा प्रबंधन को एक नए युग में ले जाता है — जहां किस्मत नहीं, विज्ञान प्रतिभा चुनेगा। 70.6 लाख विद्यार्थियों में से 13000 सितारों की तलाश शुरू हो चुकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: इस खेल प्रतिभा असेसमेंट में कौन भाग ले सकता है?

उत्तर: इस राजस्थान खेल प्रतिभा असेसमेंट में 5 से 15 वर्ष के सभी स्कूली बच्चे शामिल होंगे — गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक यह अभियान पहुंचेगा।

प्रश्न 2: असेसमेंट के कितने चरण होंगे?

उत्तर: तीन चरण — विद्यालय स्तर पर प्राथमिक मूल्यांकन, जिला स्तर पर सहनशक्ति परीक्षण और राज्य स्तर पर आधुनिक परीक्षणों के साथ अंतिम चयन।

प्रश्न 3: चयनित खिलाड़ियों को क्या मिलेगा?

उत्तर: अंतिम सूची के 13,000 खिलाड़ियों को काउन्सिल की अकादमियों में विशेष प्रशिक्षण, विशिष्ट प्रतिभा ID और खेलमित्र पोर्टल पर डिजिटल रिकॉर्ड मिलेगा।

प्रश्न 4: क्या यह असेसमेंट हर साल होगा?

उत्तर: हां, काउन्सिल ने इसे वार्षिक व्यवस्था के रूप में डिजाइन किया है ताकि खिलाड़ियों की फिटनेस और प्रगति का नियमित रिकॉर्ड बना रहे।

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