जोजरी नदी पर सुप्रीम कोर्ट की CBI चेतावनी: अवैध खनन पट्टे नियमित करने पर राजस्थान सरकार को फटकार, 20 लाख लोगों का सवाल

जोजरी नदी सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी का मतलब क्या है

जोधपुर, पाली और बालोतरा के लाखों लोगों के लिए जोजरी नदी पीने के पानी, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा सवाल है। 26 अक्टूबर की सुनवाई में जोजरी नदी सुप्रीम कोर्ट के सामने एक बार फिर उसी सवाल के साथ पहुंची — क्या राज्य सरकार नदियों को बचाने के लिए वाकई गंभीर है, या कागजों पर की गई कार्रवाई के पीछे जमीनी हकीकत कुछ और है। इस बार अदालत का लहजा पहले से भी सख्त था, क्योंकि बात सिर्फ प्रदूषण तक सीमित नहीं रही, बल्कि अवैध खनन वाले पट्टों तक पहुंच गई।

सबसे बड़ा संदेश यह था कि अगर सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला, तो अदालत सीबीआई जांच का आदेश देने से पीछे नहीं हटेगी। अदालत ने साफ कहा कि 20 लाख लोगों को नरक जैसी जिंदगी जीने के लिए मजबूर करना, कुछ हजार लोगों की आर्थिक सुविधा से तुलना करने लायक बात नहीं है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू से सीधे सवाल पूछे। अदालत ने पूछा कि नदियों में अवैध खनन के आंकड़े कहां हैं, और जब अवैध खनन पकड़ा गया था, तो अधिकारियों ने उन पट्टों को नियमित क्यों कर दिया। पीठ का सार यह था कि अधिकारी जिम्मेदारी से मुंह मोड़कर अवैध गतिविधि को समर्थन दे रहे हैं। सरकार ने केस दर्ज होने की बात कही, लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

पट्टे नियमित करने पर अदालत ने क्यों उठाए सवाल

इस सुनवाई का सबसे तीखा हिस्सा पट्टों से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि जब किसी इलाके में अवैध खनन पकड़ा गया, तो वहां पट्टा देना अधिकारियों की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जस्टिस मेहता ने पूछा कि जब अवैध गतिविधि सामने आ चुकी थी, तो लगातार पट्टे कैसे दिए गए, और इससे नदी का बहाव कैसे बचा रहेगा। नदी किनारे खनन बहाव, तल और आसपास की जमीन को प्रभावित करता है। अदालत ने कहा कि बहाली का पूरा बोझ सिर्फ उद्योगों या नगर निकायों पर नहीं डाला जा सकता। प्रदूषक भुगतान का सिद्धांत राज्य पर भी उतना ही लागू होगा।

लूणी नदी की चौड़ाई पर 8 मीटर बनाम 1782 मीटर का विवाद

सुनवाई में एक ऐसा आंकड़ा भी सामने आया, जिसने अदालत को सबसे ज्यादा हैरान किया। रिकॉर्ड में बालोतरा के पास लूणी नदी की बहाव चौड़ाई करीब 8 मीटर बताई गई थी, जबकि वहां बना पुल करीब 1782 मीटर लंबा है। जस्टिस मेहता ने इसे बेतुकापन कहा, और जस्टिस नाथ ने कहा कि अधिकारी अदालत को गुमराह कर रहे हैं। नदी की चौड़ाई से ही तय होता है कि किनारे कितनी जमीन सुरक्षित रखी जाएगी और कहां निर्माण-खनन रोका जाएगा। अदालत ने निर्देश दिया कि राजस्व और जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड में से चौड़ी सीमा को ही नदी गलियारे की सीमा माना जाए।

जोजरी नदी सुप्रीम कोर्ट के आदेश: CETP और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत

अदालत ने सरकार से कहा है कि वह साझा उपचार संयंत्रों के लिए ठोस वित्तीय प्रस्ताव पेश करे। इन संयंत्रों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक होनी चाहिए, ताकि उपचार के बाद भी गंदा पानी नदी में न जाए। उपचारित पानी को पाइपलाइनों के जरिए औद्योगिक इकाइयों तक वापस पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रस्ताव में शामिल होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि राज्य को शुरुआती बोझ उठाना होगा, क्योंकि उसके अधिकारियों ने नियामक जिम्मेदारी नहीं निभाई है। पहले के आदेशों में अवैध निकासी बिंदुओं को सील करके तोड़ने, और किनारे 100 मीटर में निर्माण तथा बाढ़ रेखा के दोनों ओर 500 मीटर में खतरनाक उद्योगों पर पाबंदी के निर्देश भी दिए जा चुके हैं।

जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र: कहां से कहां तक फैला है असर

जोजरी नदी जोधपुर से होकर बहती है, बांडी नदी पाली से गुजरती है और लूणी नदी बालोतरा से होकर बहती है। बालोतरा शहर के पास बांडी और जोजरी, लूणी में मिल जाती हैं। इसी वजह से एक जगह का प्रदूषण पूरे नदी तंत्र में फैल जाता है। इसका असर खेतों, भूजल और लोगों की सेहत पर पड़ता है। सांगानेर में बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र चल रही इकाइयों का जिक्र भी सुनवाई में आया।

विषय विवरण
सुनवाई की तारीख 26 अक्टूबर 2026, सोमवार
पीठ जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता
मामला स्वतः संज्ञान, जोजरी नदी में प्रदूषण
नदी तंत्र जोजरी (जोधपुर), बांडी (पाली), लूणी (बालोतरा)
प्रभावित लोग करीब 20 लाख
अदालत की चेतावनी रवैया न बदला तो CBI जांच का आदेश संभव
विवादित आंकड़ा लूणी की चौड़ाई 8 मीटर बनाम पुल 1782 मीटर
सरकार को देना है CETP और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज का वित्तीय प्रस्ताव
अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026

1 अक्टूबर की CRPF चेतावनी से 26 अक्टूबर तक क्या बदला

यह पहली बार नहीं है, जब जोजरी नदी का मामला सुप्रीम कोर्ट में तीखे अंदाज में उठा हो। 1 अक्टूबर को प्रकाशित हमारी पिछली खबर में भी यही मामला सामने आया था, जब अदालत ने कहा था कि अगर अधिकारी प्रदूषित पानी नहीं रोक पा रहे हैं, तो 50 किलोमीटर के इलाके को सीआरपीएफ के हवाले कर दिया जाएगा। उस समय अदालत ने करीब 800 उद्योगों के बंद होने के बाद भी गंदा पानी बहने पर सवाल उठाया था, और अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को तय की थी। जोजरी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती भी पढ़ें। 26 अक्टूबर की सुनवाई उसी कड़ी की अगली कड़ी है, लेकिन मुद्दे बदल गए हैं — पट्टों की नियमितता, नदी की चौड़ाई का रिकॉर्ड और वित्तीय प्रस्ताव।

अब आगे क्या: 27 नवंबर की सुनवाई में क्या देखना होगा

अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। उस दिन सबसे पहले यह देखा जाएगा कि सरकार ने CETP और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के लिए कैसा वित्तीय प्रस्ताव रखा है। दूसरा, नदी गलियारों की चौड़ाई को लेकर चौड़ी सीमा को लागू करने पर क्या कदम उठाए गए हैं। तीसरा, अवैध खनन के आंकड़े और पट्टों की नियमितता पर सरकार का जवाब क्या है। इन तीनों बिंदुओं पर सरकार का जवाब ही अदालत का अगला रुख तय करेगा। ठोस जवाब हुआ तो बहाली आगे बढ़ेगी, वरना CBI जांच की चेतावनी अगले चरण में बदल सकती है। आधिकारिक जानकारी के लिए The Hindu की मूल खबर पढ़ें। संबंधित खबरें राजस्थान प्रदूषण समाचार और जोधपुर समाचार पर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: जोजरी नदी सुप्रीम कोर्ट मामले में 26 अक्टूबर को क्या हुआ?
जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को अवैध खनन पट्टों को नियमित करने पर फटकार लगाई और कहा कि रवैया न बदला तो CBI जांच का आदेश दिया जा सकता है। अदालत ने नदी गलियारों की सुरक्षा और CETP प्रस्ताव पर भी निर्देश दिए।

सवाल: जोजरी, बांडी और लूणी नदियां कहां बहती हैं?
जवाब: जोजरी जोधपुर से, बांडी पाली से और लूणी बालोतरा से होकर बहती है। बालोतरा के पास बांडी और जोजरी, लूणी में मिल जाती हैं, इसलिए एक जगह का प्रदूषण पूरे तंत्र को प्रभावित करता है।

सवाल: लूणी नदी की चौड़ाई को लेकर क्या विवाद हुआ?
जवाब: रिकॉर्ड में बालोतरा के पास लूणी की चौड़ाई करीब 8 मीटर बताई गई, जबकि वहां का पुल करीब 1782 मीटर लंबा है। अदालत ने इसे बेतुकापन कहा और चौड़ी सीमा को ही नदी गलियारे की सीमा मानने का निर्देश दिया।

सवाल: अगली सुनवाई कब है और सरकार को क्या देना होगा?
जवाब: अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को है। सरकार को CETP और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक के लिए ठोस वित्तीय प्रस्ताव, नदी गलियारों की सुरक्षा पर कदम और अवैध खनन के आंकड़े रिकॉर्ड पर रखने होंगे।

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