प्रस्तावना
जोधपुर की जोजरी नदी में फैक्ट्रियों का गंदा पानी कब रुकेगा — यह सवाल अब देश की सबसे बड़ी अदालत में सबसे तीखे अंदाज में गूंज रहा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और यहां तक कह दिया कि अगर अधिकारी प्रदूषित पानी नहीं रोक पा रहे हैं, तो पूरे 50 किलोमीटर के इलाके को सीआरपीएफ के हवाले कर दिया जाएगा। अदालत की यह टिप्पणी उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सालों से इस नदी के जहरीले पानी के साथ जीने को मजबूर हैं। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को तय की गई है, और तब तक सरकार को आंकड़ों के साथ जवाब देना होगा।
सुनवाई में क्या हुआ: ‘800 उद्योग बंद, फिर गंदा पानी क्यों बह रहा है?’
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ के सामने जब यह मामला आया, तो अदालत का रुख शुरू से ही सख्त रहा। जस्टिस संदीप मेहता ने सरकार के वकील से सीधा सवाल किया कि प्रदूषित पानी अब तक क्यों आ रहा है और यह सिलसिला बिना रुके क्यों चल रहा है। अदालत ने कहा कि वह इस मामले को लेकर बहुत गंभीर है, क्योंकि यह 20 मिलियन यानी करीब दो करोड़ लोगों के जीवन का सवाल है।
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने बताया कि निगरानी के लिए एक टास्क फोर्स बनाई गई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि समिति द्वारा उद्योग बंद किए जाने के बाद भी कई अवैध फैक्ट्रियां दोबारा शुरू हो गई हैं। इसी बात पर अदालत और सख्त हो गई। पीठ ने पूछा कि आंकड़े बताए जाएं — कितनी मशीनरी हटाई गई, कितनी इकाइयां सील की गईं और बंद फैक्ट्रियां अवैध रूप से दोबारा क्यों खुल रही हैं। साफ है कि अदालत अब आश्वासनों से नहीं, ठोस आंकड़ों और जमीनी कार्रवाई से संतुष्ट होगी।
जोजरी का दर्द: बंजर होती जमीन और बेबस किसान
जोजरी नदी जोधपुर इलाके की जीवनरेखा मानी जाती रही है, लेकिन औद्योगिक कचरे और रसायनयुक्त पानी ने इसके किनारे बसे गांवों की जिंदगी बदल दी है। प्रदूषित पानी से खेतों की उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर होती गई है और भूजल पर भी इसका असर पड़ा है। इलाके में काम कर रहे श्रवण राम पटेल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फैक्ट्रियां बंद होने से लोगों को कुछ राहत मिली है और वे अब सांस ले पा रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रदूषण ने उनकी जमीनों को बंजर कर दिया था, लेकिन अदालत लगातार हालात सुधारने के निर्देश दे रही है। बुधवार की सुनवाई में अदालत ने साफ किया है कि अगर सरकारी अधिकारी प्रदूषण नहीं रोक पाए, तो निगरानी के लिए सीआरपीएफ को लगाया जाएगा। यह बयान अपने आप में बताता है कि अदालत जमीनी अमल को लेकर कितनी चिंतित है।
7 अगस्त का ऐतिहासिक फैसला: रिवर कमीशन का निर्देश
यह मामला अचानक सुर्खियों में नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को जोजरी नदी के औद्योगिक प्रदूषण और राज्य के नदी तंत्र की बदहाली पर एक ऐतिहासिक फैसला दिया था। उसी पीठ ने राज्य सरकार को कई बड़े निर्देश दिए थे। अदालत ने जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र के संरक्षण के लिए एक इंटीग्रेटेड कोऑर्डिनेशन ग्रुप बनाने को कहा था। साथ ही राजस्थान के लिए स्वतंत्र और पर्याप्त अधिकारों वाली रिवर कमीशन या रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी गठित करने का निर्देश भी दिया गया था। अदालत ने तब भी स्पष्ट किया था कि नदियों और पर्यावरण से खिलवाड़ करने वाले उद्योगों, लापरवाह अधिकारियों और सांठगांठ करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। उसी आदेश के तहत यह नियमित सुनवाई चल रही है। इससे पहले प्रदूषित पानी छोड़ने के आरोप में उद्यमियों की गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं, जिनकी संख्या नौ तक पहुंच चुकी है।
मामले के प्रमुख तथ्य एक नजर में
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सुनवाई करने वाली पीठ | जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता |
| अदालत की मुख्य टिप्पणी | पानी नहीं रुका तो 50 किमी क्षेत्र CRPF को सौंपा जाएगा |
| प्रभावित आबादी का जिक्र | करीब 20 मिलियन (2 करोड़) लोग |
| बंद बताए गए उद्योग | करीब 800, फिर भी गंदा पानी बहने पर सवाल |
| अगली सुनवाई | 26 अक्टूबर 2026 |
| पहले का बड़ा आदेश | 7 अगस्त — रिवर कमीशन और कोऑर्डिनेशन ग्रुप का निर्देश |
| जुड़ा नदी तंत्र | जोजरी-बांडी-लूणी |
अब आगे क्या: 26 अक्टूबर को सरकार को देने होंगे जवाब
अब सबकी नजर 26 अक्टूबर की सुनवाई पर है। अदालत ने सरकार से मशीनरी हटाने, सीलिंग और दोबारा खुली फैक्ट्रियों को लेकर आंकड़े मांगे हैं। टास्क फोर्स की निगरानी रिपोर्ट भी उस दिन अहम होगी। जोजरी किनारे रहने वाले लोगों के लिए यह लड़ाई सिर्फ एक नदी की नहीं है — यह उनके खेत, उनके पानी और उनकी सेहत की लड़ाई है। अगर आने वाले हफ्तों में अवैध फैक्ट्रियों पर असरदार कार्रवाई दिखती है, तो अदालत की सख्ती रंग लाएगी। वरना सीआरपीएफ तैनाती जैसी अभूतपूर्व स्थिति भी बन सकती है, जिसका संकेत अदालत खुद दे चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: जोजरी नदी कहां है और यह विवाद क्यों है?
जवाब: जोजरी नदी राजस्थान के जोधपुर क्षेत्र से बहती है और बांडी-लूणी नदी तंत्र से जुड़ी है। इलाके के औद्योगिक इकाइयों द्वारा रसायनयुक्त गंदा पानी नदी में छोड़े जाने से पानी और आसपास की जमीन प्रदूषित हो गई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है।
सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने CRPF को लेकर क्या कहा?
जवाब: बुधवार की सुनवाई में जस्टिस संदीप मेहता ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अगर सरकारी अधिकारी प्रदूषित पानी नहीं रोक पा रहे हैं, तो पूरे 50 किलोमीटर के क्षेत्र को सीआरपीएफ के हवाले कर दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि यह करीब दो करोड़ लोगों के जीवन का सवाल है।
सवाल: अगली सुनवाई कब है और सरकार को क्या बताना होगा?
जवाब: मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को तय है। सरकार को बताना होगा कि कितनी मशीनरी हटाई गई, कितनी फैक्ट्रियां सील हुईं और बंद इकाइयां दोबारा क्यों खुल गईं।
सवाल: 7 अगस्त के फैसले में अदालत ने क्या निर्देश दिए थे?
जवाब: अदालत ने जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र के संरक्षण के लिए इंटीग्रेटेड कोऑर्डिनेशन ग्रुप बनाने और राजस्थान के लिए स्वतंत्र रिवर कमीशन या रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी गठित करने का निर्देश दिया था।