राजस्थान के सरकारी स्कूलों में इस दीपावली कुछ अलग होने वाला है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी राजकीय विद्यालयों और कार्यालयों के लिए “विद्यालय सौंदर्यीकरण एवं दीपोत्सव 2026” अभियान के निर्देश जारी कर दिए हैं — 3 नवंबर तक पूरी सफाई और मरम्मत, और 6 नवंबर से दीपोत्सव तक रोशनी की चमक। लेकिन इस घोषणा के पीछे एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है: सजावट का पैसा कहां से आएगा? निर्देशों में अलग बजट का कोई जिक्र नहीं है। आइए, स्कूल दीपोत्सव अभियान की पूरी तस्वीर समझते हैं।
निर्देश तो आ गए, पर पैसे कहां से आएंगे?
स्कूल दीपोत्सव अभियान की सबसे बड़ी चर्चा बजट को लेकर हो रही है। निदेशालय ने सफाई, सौंदर्यीकरण और रोशनी के निर्देश तो जारी कर दिए, मगर रंग-रोगन, मरम्मत और सजावट के लिए अलग से कोई राशि नहीं दी। इसके बजाय स्कूल फैसिलिटी ग्रांट (एसएफजी) के उपयोग की बात कही गई है — और यहीं पेंच है। नियमों के अनुसार इस ग्रांट से भवन की बड़ी मरम्मत, पुताई, उत्सव और सजावट पर खर्च नहीं किया जा सकता। यह राशि शिक्षण सामग्री, पेयजल व्यवस्था, पंखे-ट्यूबलाइट की मरम्मत, बिजली बिल, खेल गतिविधियों और छोटी-मोटी मरम्मत जैसे तय कामों के लिए होती है।
राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने इस पर खुलकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सौंदर्यीकरण की अवधारणा अच्छी है, लेकिन सरकार को समय पर उचित बजट भी जारी करना चाहिए। चौहान के अनुसार खासकर आदिवासी क्षेत्रों में जनसहयोग के भरोसे ऐसे कार्य कराना व्यावहारिक नहीं है। शौचालयों की मरम्मत जैसे जरूरी कामों के लिए भी स्कूल पुरानी कंपोजिट ग्रांट पर निर्भर हैं — ऐसे में बिना पैसे के स्कूल दीपोत्सव अभियान कितना टिकेगा, यह बड़ा सवाल है।
क्या है विद्यालय सौंदर्यीकरण एवं दीपोत्सव 2026?
स्कूल दीपोत्सव अभियान के तहत दीपावली पर घरों की सफाई-सजावट की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में स्वच्छता और सुंदरता का विशेष अभियान चलाया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार के निर्देशानुसार यह अभियान प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों और कार्यालयों पर लागू होगा। खास बात यह है कि अभियान सिर्फ भवनों की सफाई तक सीमित नहीं रहेगा — स्कूलों को स्वच्छ, सुंदर और प्रेरणादायी बनाने के लिए छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
विभाग का मानना है कि साफ-सुथरे और आकर्षक परिसर से विद्यार्थियों में अपने स्कूल के प्रति गौरव और अपनत्व की भावना बढ़ेगी। आदेशों में जिला स्तर पर संबंधित अधिकारियों के समन्वय से अभियान पूरा कराने और निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है।
डेडलाइन: कब क्या करना है
स्कूल दीपोत्सव अभियान की सबसे खास बात इसकी साफ-सुथरी डेडलाइन है। विभाग ने हर काम के लिए तारीख तय कर दी है:
| काम | अंतिम तारीख |
|---|---|
| स्कूलों और कार्यालयों की पूरी साफ-सफाई, कचरा हटाना | 3 नवंबर 2026 |
| मरम्मत, रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण कार्य | 3 नवंबर 2026 तक |
| कबाड़ फर्नीचर का निस्तारण/नीलामी | अभियान अवधि में |
| दीपों और लाइटिंग से सजावट, रोशनी व्यवस्था | 6 नवंबर से दीपोत्सव तक |
| जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा समन्वय और पालना | निरंतर |
गौर करने वाली बात यह है कि 6 नवंबर से दीपोत्सव तक स्कूलों में लाइट व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि दीपावली पर हर स्कूल परिसर रोशनी से नहाया दिखे। संस्था प्रधानों के सामने अब दोहरी चुनौती है — तय समय में स्कूल सजाना भी है, और इसके लिए संसाधन भी जुटाने हैं।
कबाड़ से निकलेगा काम का पैसा
अभियान की एक दिलचस्प पहल “कबाड़ हटाओ, श्रमदान लाओ” है। स्कूलों में रखे कबाड़ फर्नीचर और अनुपयोगी दरी-पट्टी का नियमानुसार निस्तारण या नीलामी कराई जाएगी, ताकि खाली जगह का बेहतर इस्तेमाल हो सके। जिन स्कूलों में मरम्मत की जरूरत है, वहां मरम्मत और रंग-रोगन भी कराया जाएगा।
विभाग ने स्कूलों में शौचालयों की स्थिति सुधारने पर विशेष जोर दिया है। जरूरत होने पर समसा की कंपोजिट ग्रांट से नियमानुसार मरम्मत कराई जा सकेगी, और स्कूल परिसर के साथ आसपास के क्षेत्रों की भी सफाई होगी। गौरतलब है कि हाल ही में सरकारी स्कूलों में बजट की किल्लत पर खबर आई थी — 53 हजार स्कूलों में पुराने बर्तनों में खाना परोसा जा रहा है — ऐसे में कंपोजिट ग्रांट पर बढ़ता दबाव समझा जा सकता है।
जनभागीदारी: गांव-शहर सब मिलकर सजाएंगे स्कूल
सफाई, मरम्मत और लाइटिंग के कामों में शिक्षक, छात्र, अभिभावक, ग्रामवासी, स्काउट-गाइड, एनएसएस, एनसीसी और स्थानीय सामाजिक संगठन सहयोग कर सकेंगे। विभाग का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी से स्कूलों के प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा।
लेकिन यहीं एक व्यावहारिक चुनौती भी है। शहरी क्षेत्रों में सामाजिक संस्थाओं और दानदाताओं का सहयोग मिलना संभव है, लेकिन आदिवासी और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में यही मॉडल लागू करना आसान नहीं — वहां संसाधनों की उपलब्धता और जनसहयोग की क्षमता अलग-अलग होती है। शिक्षा विभाग के हालिया आदेशों की कड़ी में यह अभियान एक और बड़ा कदम है — इससे पहले स्कूलों के समय में बदलाव का आदेश भी चर्चा में रहा था। अब देखना है कि आदेशों की यह रफ्तार जमीन पर कितनी उतरती है।
स्कूल दीपोत्सव अभियान: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: स्कूल दीपोत्सव अभियान कब तक चलेगा? उत्तर: माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देशों के अनुसार 3 नवंबर 2026 तक स्कूलों की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण का काम पूरा करना है, जबकि 6 नवंबर से दीपोत्सव तक स्कूलों में दीयों और लाइटिंग की सजावट रहेगी।
प्रश्न 2: क्या स्कूलों को सजावट के लिए अलग से बजट मिलेगा? उत्तर: फिलहाल निर्देशों में अलग बजट का कोई जिक्र नहीं है। एसएफजी ग्रांट के नियम पुताई और सजावट पर खर्च की इजाजत नहीं देते। शिक्षक संघ ने सरकार से समय पर उचित बजट जारी करने की मांग की है।
प्रश्न 3: इस अभियान में आम लोग कैसे जुड़ सकते हैं? उत्तर: अभियान जनभागीदारी पर आधारित है। अभिभावक, ग्रामवासी और सामाजिक संगठन श्रमदान से जुड़ सकते हैं, जबकि छात्र स्काउट-गाइड, एनएसएस और एनसीसी के माध्यम से भाग ले सकते हैं।
प्रश्न 4: स्कूलों के कबाड़ फर्नीचर का क्या होगा? उत्तर: “कबाड़ हटाओ, श्रमदान लाओ” पहल के तहत टूटे-फूटे फर्नीचर और अनुपयोगी सामान की नियमानुसार नीलामी या निस्तारण किया जाएगा।
निष्कर्ष
स्कूल दीपोत्सव अभियान निस्संदेह एक सकारात्मक पहल है — साफ-सुथरे और रोशन स्कूल बच्चों के सीखने के माहौल को बेहतर बनाते हैं। लेकिन आदेशों से तस्वीर तभी बदलेगी जब उसके साथ संसाधन भी आएं। बजट का सवाल, ग्रांट के नियमों की बंदिश और ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्रों की चुनौतियां — ये तीनों मोर्चे इस अभियान की असली परीक्षा होंगे।
स्रोत: माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के आदेश पर ईटीवी भारत की रिपोर्ट
1 thought on “स्कूल दीपोत्सव अभियान: दीपावली से पहले चमकेंगे राजस्थान के सरकारी स्कूल — 3 नवंबर तक सफाई, 6 नवंबर से रोशनी के निर्देश”