एक दिन, एक अभियान, और 92 लाख 83 हजार बच्चों की सुरक्षा — राजस्थान में पल्स पोलियो अभियान 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं। आगामी 22 नवंबर (रविवार) को प्रदेश के 32 जिलों में एक साथ उप राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा, जिसमें जन्म से पांच वर्ष तक की आयु के करीब 93 लाख बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस बार बूथ-स्तर से लेकर जिला-स्तर तक हर जिम्मेदारी पहले से तय कर दी गई है, ताकि एक भी बच्चा खुराक से न छूटे।
पल्स पोलियो अभियान 2026: एक दिन में 92.83 लाख बच्चों का खाका
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत आयोजित होने वाला पल्स पोलियो अभियान 2026 प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य अभियानों में से एक है। तय योजना के मुताबिक 22 नवंबर को सुबह से ही गांवों-ढाणियों से लेकर शहरों के मोहल्लों तक पोलियो बूथ सक्रिय रहेंगे।
अभियान के लिए निर्धारित मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- अभियान की तारीख: 22 नवंबर 2026 (रविवार)
- कवर होने वाले जिले: 32 जिले (भीलवाड़ा सहित)
- लक्षित बच्चे: 92 लाख 83 हजार (जन्म से पांच वर्ष तक)
- बैठक: स्टेट टास्क फोर्स, स्वास्थ्य भवन, जयपुर
- अध्यक्षता: मिशन निदेशक (एनएचएम) डॉ. जोगाराम
अधिकारियों का कहना है कि हर बूथ पर खुराक, कोल्ड चेन और रिकॉर्ड की पूरी व्यवस्था पहले से रहेगी।
शुक्रवार की बैठक में क्या-क्या तय हुआ?
अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए शुक्रवार को जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में स्टेट टास्क फोर्स की बैठक आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता मिशन निदेशक (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) डॉ. जोगाराम ने की। बैठक में संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय रहते सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में तय हुआ कि प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए, टीकाकरण कर्मियों का समय पर प्रशिक्षण हो और जिला स्तरीय समितियों की बैठकें कर सारी व्यवस्थाएं पहले से पूरी कर ली जाएं।
बैठक में निदेशक (आरसीएच) डॉ. मधु रतेश्वर और परियोजना निदेशक (टीकाकरण) डॉ. रघुराज सिंह भी मौजूद रहे। महिला एवं बाल विकास, सूचना एवं जनसंपर्क और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभागों के प्रतिनिधियों के साथ डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ जैसी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इतने विभागों की मौजूदगी बताती है कि पल्स पोलियो अभियान 2026 को इस बार सामूहिक जिम्मेदारी के तौर पर चलाया जाएगा। इस अभियान से जुड़ी केंद्रीय जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पर भी उपलब्ध है।
पल्स पोलियो अभियान 2026: इन 32 जिलों में लगेंगे बूथ
उप राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान प्रदेश के इन 32 जिलों में आयोजित किया जाएगा:
| क्रम | जिले |
|---|---|
| 1–8 | अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी |
| 9–16 | चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर |
| 17–24 | जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झुंझुनूं, जोधपुर, कोटा, कोटपुतली-बहरोड़, नागौर |
| 25–32 | पाली, राजसमंद, सवाईमाधोपुर, सलूंबर, सीकर, सिरोही, टोंक, उदयपुर |
पिछले साल नवंबर 2025 के अभियान में 1 करोड़ 8 लाख से अधिक बच्चों का लक्ष्य था, जिसके लिए करीब 58,800 पोलियो बूथ और 6,700 ट्रांजिट टीमें तैनात की गई थीं। इस बार भी ऐसा ही जाल बिछाया जा रहा है।
एचपीवी टीकाकरण की धीमी रफ्तार पर भी चिंता
स्टेट टास्क फोर्स की बैठक सिर्फ पोलियो तक सीमित नहीं रही। इसमें एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मिशन निदेशक ने जिन जिलों में एचपीवी टीकाकरण की उपलब्धि 75 प्रतिशत से कम है, वहां विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।
एचपीवी टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर से बचाव का उपाय है। तय हुआ कि स्कूलों-कॉलेजों में जागरूकता सत्र होंगे और पंचायती राज व शिक्षा विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर पात्र लाभार्थियों तक पहुंच बनाई जाएगी।
हर बार की ये दो बूंद क्यों इतनी जरूरी हैं?
पोलियो यानी बच्चों को अपाहिज बना देने वाली वह बीमारी, जिससे भारत ने लंबी लड़ाई के बाद मुक्ति पाई है। भारत को 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था और देश में आखिरी पोलियो केस 2011 में पश्चिम बंगाल में दर्ज हुआ था। तब से भारत में एक भी नया पोलियो केस सामने नहीं आया है।
फिर भी पल्स पोलियो अभियान 2026 जैसे अभियान बार-बार क्यों चलते हैं? सीधा कारण है — पड़ोसी देशों में पोलियो संक्रमण के मामले अभी भी सामने आते हैं। जब तक दुनिया भर से पोलियो का सफाया नहीं होता, तब तक हर बच्चे को नियमित खुराक देना ही सुरक्षा की सबसे मजबूत दीवार है। एक छोटी सी लापरवाही भी इस बीमारी को लौटने का मौका दे सकती है।
अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारी
अगर आपके घर में पांच वर्ष तक का बच्चा है, तो पल्स पोलियो अभियान 2026 की इन बातों का ध्यान रखें:
- तारीख याद रखें: 22 नवंबर (रविवार) को अपने नजदीकी पोलियो बूथ पर जरूर पहुंचें।
- बूथ की जानकारी: अभियान से संबंधित स्थानीय केंद्रों और समय की जानकारी अपने क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र या आशा कार्यकर्ता से पहले से ले लें।
- पहले खुराक ले चुके बच्चे: जिन बच्चों ने पहले खुराक ली है, उन्हें भी इस बार दोबारा खुराक दिलानी है — हर अभियान की खुराक जरूरी है।
- बीमार बच्चे: हल्की सर्दी-खांसी में भी खुराक दी जा सकती है, लेकिन तेज बुखार या गंभीर बीमारी होने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता से सलाह जरूर लें।
- घर से दूर हैं तो: रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर ट्रांजिट टीमें भी खुराक देंगी।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि पांच वर्ष तक के बच्चों को निर्धारित तिथि पर पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं, क्योंकि “दो बूंद जिंदगी के नाम” हर बार उतनी ही जरूरी हैं जितनी पहली बार थीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: पल्स पोलियो अभियान 2026 राजस्थान में कब है?
उत्तर: उप राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान 22 नवंबर 2026 (रविवार) को राजस्थान के 32 जिलों में आयोजित होगा। इसमें जन्म से पांच वर्ष तक के 92.83 लाख बच्चों को खुराक पिलाने का लक्ष्य है।
प्रश्न 2: क्या पहले खुराक ले चुके बच्चे को फिर खुराक दिलानी होगी?
उत्तर: हां, बिल्कुल। हर अभियान की खुराक अतिरिक्त सुरक्षा देती है। बच्चा पहले कितनी भी बार खुराक ले चुका हो, इस बार भी उसे बूथ पर लेकर जाएं।
प्रश्न 3: पोलियो बूथ कहां लगेंगे?
उत्तर: आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों पर बूथ लगेंगे। रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर ट्रांजिट टीमें तथा घर-घर के लिए मोबाइल टीमें भी रहेंगी।
प्रश्न 4: खुराक के बाद हल्का बुखार आना क्या सामान्य है?
उत्तर: ओरल पोलियो वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और आमतौर पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। बहुत हल्का बुखार कभी-कभार हो सकता है, जो अपने आप ठीक हो जाता है। फिर भी किसी भी चिंता पर नजदीकी स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करें।