जयपुर से इस वक्त की बड़ी खबर ने सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ आम लोगों की परेशानी भी बढ़ा दी है। राजस्थान पुलिस वेबसाइट हैक के दावों के बीच पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट खुल नहीं रही है, और पिछले तीन दिन से प्रदेश का सरकारी ईमेल सिस्टम भी बंद पड़ा है। rajasthan.gov.in डोमेन के करीब 59 हजार ईमेल अकाउंट प्रभावित हुए हैं, कलेक्टर और एसपी सहित अधिकारियों का विभागीय संवाद ठप है।
सबसे अहम बात यह है कि अब तक यह साबित नहीं हुआ है कि सच में कोई सेंध लगी है या नहीं। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में हैक होने के सबूत नहीं मिले हैं, फिर भी दावों की गंभीरता को देखते हुए FIR दर्ज कर ली गई है और दिल्ली से कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT) जयपुर पहुंचकर सर्वर की जांच कर रही है।
राजस्थान पुलिस वेबसाइट हैक से जनता पर सीधा असर
आम आदमी के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि पुलिस की वेबसाइट बंद होने से कई रोजमर्रा के काम अटक गए हैं। नौकरों, किराएदारों और ड्राइवरों के पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हुई है, और गुमशुदगी की रिपोर्ट व ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाने में भी लोगों को परेशानी हो रही है।
हालांकि एक राहत की बात भी है — राजकॉम्प सिटीजन ऐप से जुड़ी सेवाएं सुचारू रूप से चालू हैं। लेकिन वेबसाइट पर निर्भर सेवाओं के लिए अभी इंतजार करना होगा, क्योंकि सर्वर की जांच और मेंटेनेंस का काम पूरा होने तक साइट बंद रखी गई है। सरकारी कामकाज भी nic.in सर्वर पर शिफ्ट कर दिया गया है, ताकि विभागीय संवाद पूरी तरह ठप न हो।
FIR दर्ज, दिल्ली से CERT टीम जयपुर में जांच में जुटी
मामले में अब कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) के उप निदेशक मुकेश गडोदिया की ओर से साइबर थाने में आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करवाया गया है, जिसका आधार हैकर्स के वे दावे हैं जो डार्क वेब पर सामने आए थे।
जांच के लिए दिल्ली से कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम जयपुर पहुंची है। यह टीम DoIT और राजस्थान पुलिस की साइबर सेल के साथ मिलकर सर्वर की जांच कर रही है — सच में कोई सेंध लगी है, या डार्क वेब पर फैलाए गए दावे भ्रामक हैं। साथ ही सरकारी ईमेल व्यवस्था का सुरक्षा ऑडिट भी करवाया जा रहा है, जो हाल ही में एसबीआई डेटा लीक मामले के बाद और अहम हो गया है।
राजस्थान पुलिस वेबसाइट हैक पर पुलिस का पक्ष: अभी सबूत नहीं मिले
इस पूरे मामले में पुलिस का रुख संतुलित है। साइबर क्राइम विंग के डीआईजी शांतनु कुमार सिंह का कहना है कि शुरुआती जांच में वेबसाइट हैक होने के सबूत नहीं मिले हैं, और एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह के मुताबिक दावों की जांच सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग कर रहा है।
दूसरी ओर, हैकर ग्रुप ‘स्कारलेट’ ने डार्क वेब पर दावा किया था कि उसने पुलिस और आम जनता से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल कर ली है — 5,926 मेलबॉक्स, 86.3 लाख ईमेल, 78.3 लाख से ज्यादा विशिष्ट ईमेल पते, 70,301 पहचान रिकॉर्ड और 59,460 मोबाइल नंबर। लेकिन पुलिस ने साफ किया है कि इन दावों की पुष्टि अभी नहीं हुई है, और दस्तावेजों की सत्यता और स्रोत की जांच जारी है।
यह फर्क समझना बहुत जरूरी है — दावा करना और साबित होना, दोनों अलग बातें हैं। साइबर दुनिया में कई बार पुराने या किसी और स्रोत से जुटाए गए डेटा को भी बड़ी सेंध बताकर बेचने की कोशिश की जाती है।
पृष्ठभूमि: यह दावा पहली बार कब सामने आया?
यह विवाद नया नहीं है। करीब एक हफ्ते पहले ही हैकर ग्रुप स्कारलेटग्रुप ने दावा किया था कि उसने राजस्थान पुलिस के केंद्रीय डेटाबेस में सेंध लगाई है। उस वक्त भी पुलिस ने कहा था कि सेंध की पुष्टि नहीं हो पाई है। इस दावे की विस्तृत जानकारी हमने पहले भी प्रकाशित की थी — पढ़ें: राजस्थान पुलिस डेटा लीक का दावा: 70,000 रिकॉर्ड डार्कनेट पर बेचने की पेशकश।
उस दावे में DoIT से जुड़े डेटा का भी जिक्र था — 1,065 मेलबॉक्स, 69 लॉगिन क्रेडेंशियल्स, 21 वीपीएन लॉगिन और वरिष्ठ अधिकारियों के 64 वीपीएन प्रमाणपत्र। आज की ताजा स्थिति यह है कि उसी दावे की कड़ी में अब वेबसाइट बंद है, FIR दर्ज हुई है और CERT टीम मैदान में है।
दावा vs हकीकत: अब तक की स्थिति एक नजर में
| बिंदु | हैकर्स का दावा | आधिकारिक स्थिति |
|---|---|---|
| मेलबॉक्स | 5,926 मेलबॉक्स में सेंध | पुष्टि नहीं हुई, जांच जारी |
| ईमेल | 86.3 लाख ईमेल हासिल | सत्यता की जांच चल रही है |
| पहचान रिकॉर्ड | 70,301 रिकॉर्ड | स्रोत अपुष्ट, दस्तावेज जांचे जा रहे हैं |
| मोबाइल नंबर | 59,460 नंबर | पुष्टि नहीं हुई है |
| वेबसाइट | हैक करके डेटा चुराया | साइट सर्वर जांच और मेंटेनेंस के चलते बंद |
| सरकारी ईमेल | डोमेन प्रभावित | 59 हजार अकाउंट प्रभावित, 3 दिन से बंद |
| कानूनी कार्रवाई | — | आईटी एक्ट के तहत FIR दर्ज |
| जांच एजेंसी | — | दिल्ली से CERT टीम + DoIT + साइबर सेल |
आम नागरिक क्या करें: सुरक्षित रहने के उपाय
ऐसे मामलों में आम लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा अफवाह और फर्जी लिंक होते हैं। अगर कोई मैसेज, ईमेल या कॉल आए जिसमें कहा जाए कि आपका डेटा लीक हो गया है और तुरंत किसी लिंक पर क्लिक करें या ओटीपी बताएं, तो उसे नजरअंदाज करें — पुलिस या सरकारी विभाग कभी फोन पर ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगता। इस तरह की ठगी से बचने के लिए हमारी पहले की एडवाइजरी भी पढ़ें: राजस्थान पुलिस का साइबर अलर्ट: शादी के कार्ड के नाम पर APK फाइल से हो रही ठगी।
पुलिस से जुड़े कामों के लिए फिलहाल राजकॉम्प सिटीजन ऐप का इस्तेमाल करें, जो चालू है। सरकारी ईमेल इस्तेमाल करने वाले अधिकारी अनजान लिंक और अटैचमेंट से बचें, और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर सेल को दें। ईमेल इस्तेमाल पर हाल ही में जारी सख्त आदेश भी पढ़ें: राजस्थान पुलिस का सख्त आदेश: सरकारी ईमेल से अब अमेजन-फ्लिपकार्ट पर अकाउंट नहीं। साइबर सुरक्षा अलर्ट के लिए भारत सरकार की टीम की वेबसाइट भी देखी जा सकती है: CERT-In।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सच में राजस्थान पुलिस की वेबसाइट हैक हो गई है?
जवाब: अभी पुष्टि नहीं हुई है। हैकर ग्रुप ने डार्क वेब पर सेंधमारी का दावा किया है, लेकिन पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में हैक के सबूत नहीं मिले हैं। CERT टीम और साइबर सेल की जांच जारी है।
पुलिस की वेबसाइट क्यों नहीं खुल रही है?
जवाब: सर्वर की जांच और मेंटेनेंस के चलते वेबसाइट बंद रखी गई है। जांच पूरी होने तक साइट डाउन रहेगी।
सरकारी ईमेल कब तक चालू होगा?
जवाब: प्रदेश में सरकारी ईमेल सिस्टम तीन दिन से बंद है और करीब 59 हजार अकाउंट प्रभावित हैं। फिलहाल कामकाज nic.in सर्वर पर शिफ्ट किया गया है। बहाली की तारीख जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।
आम आदमी को अभी क्या करना चाहिए?
जवाब: पुलिस से जुड़े कामों के लिए राजकॉम्प सिटीजन ऐप का इस्तेमाल करें। अनजान लिंक, ओटीपी मांगने वाले कॉल या डेटा लीक के नाम पर आए मैसेज से बचें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना साइबर सेल को दें।
1 thought on “राजस्थान पुलिस वेबसाइट हैक का दावा: साइट डाउन, FIR दर्ज, दिल्ली से CERT टीम जयपुर में जांच में जुटी”