आसाराम जोधपुर जेल सरेंडर को लेकर 27 अक्टूबर की शाम सबसे बड़ा मोड़ आ गया। पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद शाम 5 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करने की डेडलाइन बीत गई, लेकिन आसाराम जेल प्रशासन के सामने पेश नहीं हुए। जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह ने बताया कि आसाराम की ओर से एयर एंबुलेंस से पहुंचने की सूचना दी गई है, मगर तय समय तक सरेंडर दर्ज नहीं हुआ।
इसी दिन सुप्रीम कोर्ट में आसाराम से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई भी हुई। अदालत ने साफ कर दिया कि सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई तभी होगी, जब आसाराम पैरोल खत्म करके जेल में सरेंडर कर चुके होंगे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को तय कर दी है।
आसाराम जोधपुर जेल सरेंडर: 27 अक्टूबर की शाम क्या-क्या हुआ
27 अक्टूबर, मंगलवार को घटनाएं तेजी से बदलीं। सुबह से ही यह साफ था कि 20 दिन की पैरोल का आखिरी दिन है, और सुप्रीम कोर्ट ने शाम 5 बजे तक सरेंडर का निर्देश दिया हुआ है। लेकिन शाम ढलते-ढलते खबर आई कि तय समय तक आसाराम जोधपुर जेल नहीं पहुंचे।
| समय / तारीख | घटना |
|---|---|
| 6 अक्टूबर 2026 | राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी |
| 27 अक्टूबर 2026, दोपहर | सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल बढ़ाने की याचिका खारिज की, शाम 5 बजे तक सरेंडर का निर्देश |
| 27 अक्टूबर 2026, शाम 5 बजे | सरेंडर की डेडलाइन बीती — आसाराम जोधपुर जेल में पेश नहीं हुए |
| 27 अक्टूबर 2026, शाम | जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह ने एयर एंबुलेंस से पहुंचने की सूचना मिलने की बात कही |
| 6 नवंबर 2026 | सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई तय |
सुप्रीम कोर्ट में दिनभर क्या हुआ: दो मामलों पर एक साथ सुनवाई
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग मामलों पर सुनवाई हुई — पहला, गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका, जिसमें 20 दिन की पैरोल की अर्जी खारिज हुई थी; दूसरा, सजा के खिलाफ अपील, जिस पर जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनवाई की।
पैरोल बढ़ाने की मांग के पीछे यह दलील दी गई थी कि आसाराम की तबीयत ठीक नहीं है और उज्जैन स्थित गवर्नमेंट धन्वंतरि आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है। अदालत ने इस गुहार को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने पैरोल बढ़ाने से इनकार करते हुए राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि जेल के भीतर आसाराम के स्वास्थ्य का समुचित ध्यान रखा जाए और जरूरत के हिसाब से चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अपील वाले मामले में अदालत का रुख स्पष्ट था — सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई आसाराम के सरेंडर करने के बाद ही होगी। राजस्थान पुलिस वेबसाइट हैक के दावे की जांच की तरह इस मामले में भी जांच और कानूनी प्रक्रिया एक साथ चल रही है।
एयर एंबुलेंस की सूचना और जेल अधीक्षक के बयान का मतलब
जोधपुर जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह का बयान इस घटनाक्रम की सबसे ठोस आधिकारिक जानकारी है। उनके मुताबिक आसाराम की ओर से एयर एंबुलेंस से पहुंचने की सूचना दी गई है — यानी जेल पहुंचने का इरादा तो जताया गया, लेकिन तय समय तक वह जेल परिसर में पेश नहीं हुए।
एयर एंबुलेंस की सूचना को दो तरह से समझा जा सकता है। एक, स्वास्थ्य कारणों से हवाई मार्ग से लाने की व्यवस्था में समय लग सकता है, और यही वजह हो सकती है कि डेडलाइन छूट गई। दो, सूचना देना और वास्तव में सरेंडर करना दो अलग बातें हैं — जेल के रिकॉर्ड में सरेंडर तभी दर्ज होता है, जब बंदी अधिकारियों के सामने खुद पेश हो जाए।
सरेंडर न करने पर जेल नियम क्या कहते हैं
जेल नियमों के अनुसार पैरोल अवधि के आखिरी दिन तक सरेंडर न करने पर जेल प्रशासन बंदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाता है। यह प्रक्रिया अपने आप शुरू होती है — इसके लिए किसी अलग शिकायत का इंतजार नहीं किया जाता।
अगर बंदी लंबे समय तक नहीं मिलता है, तो उसे भगौड़ा भी घोषित किया जा सकता है, जिसके बाद पुलिस की तलाश और गिरफ्तारी की प्रक्रिया और सख्त हो जाती है। हालांकि, आसाराम के मामले में अभी यह स्थिति नहीं आई है — फिलहाल सिर्फ यह तथ्य सामने है कि 27 अक्टूबर की शाम 5 बजे तक सरेंडर नहीं हुआ और एयर एंबुलेंस से पहुंचने की सूचना मिली है।
6 नवंबर की सुनवाई से पहले जेल प्रशासन का अगला कदम सबसे ज्यादा मायने रखेगा। अगर इस बीच सरेंडर हो जाता है, तो अपील पर सुनवाई का रास्ता खुल जाएगा; अगर नहीं होता है, तो अदालत 6 नवंबर को इस पहलू पर भी सख्त रुख अपना सकती है। राजस्थान नशा मुक्त अभियान में अब तक की कार्रवाई से यह साफ है कि राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में प्रशासनिक कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं।
आसाराम जोधपुर जेल सरेंडर से पहले का सफर और केस का इतिहास
आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से 6 अक्टूबर को 20 दिन की पैरोल मिली थी, जिसकी अवधि 27 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। पैरोल बढ़ाने के लिए जोधपुर हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई थी, लेकिन उस पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी।
जिस केस में आसाराम सजा काट रहे हैं, उसकी शुरुआत 2013 में हुई थी, जब उन्हें नाबालिग के साथ यौन शोषण के मामले में गिरफ्तार किया गया था। 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसके खिलाफ अपील अब सुप्रीम कोर्ट में है। श्रीगंगानगर ड्रोन हेरोइन मामले की कार्रवाई में भी अदालतों और प्रशासन के बीच तालमेल का यही पैटर्न दिखा था।
आगे क्या होगा: 6 नवंबर तक के तीन संभावित रास्ते
पहला रास्ता: आसाराम 6 नवंबर से पहले जोधपुर जेल में सरेंडर कर दें, तो अपील पर सुनवाई का रास्ता खुल जाएगा और जेल प्रशासन को मुकदमा दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दूसरा रास्ता: सरेंडर में और देरी हो, तो जेल प्रशासन नियमों के तहत मुकदमा दर्ज करवा सकता है, और लंबे समय तक अनुपस्थिति पर भगौड़ा घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
तीसरा रास्ता: 6 नवंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि सरेंडर हुआ है या नहीं, और उसी के आधार पर अपील की सुनवाई आगे बढ़ेगी या कोई और आदेश आएगा। तीनों रास्तों में एक बात तय है — 27 अक्टूबर की शाम 5 बजे की डेडलाइन अब इस केस की नई टाइमलाइन का शुरुआती बिंदु बन गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आसाराम ने जोधपुर जेल में सरेंडर क्यों नहीं किया?
आसाराम जोधपुर जेल सरेंडर के लिए 27 अक्टूबर की शाम 5 बजे तक जोधपुर जेल में पेश नहीं हुए। जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह के मुताबिक आसाराम की ओर से एयर एंबुलेंस से पहुंचने की सूचना दी गई है, लेकिन तय समय तक सरेंडर दर्ज नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल बढ़ाने की याचिका क्यों खारिज की?
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर पैरोल बढ़ाने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जेल के भीतर भी आसाराम के स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सकता है। अदालत ने राजस्थान सरकार को जेल में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
आसाराम की अपील पर सुनवाई कब होगी?
सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई 6 नवंबर 2026 को तय की गई है। अदालत ने साफ कहा है कि अपील पर सुनवाई आसाराम जोधपुर जेल सरेंडर के बाद ही होगी।
सरेंडर न करने पर जेल प्रशासन क्या कर सकता है?
जेल नियमों के अनुसार पैरोल अवधि के आखिरी दिन तक सरेंडर न करने पर जेल प्रशासन बंदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाता है। लंबे समय तक न मिलने पर बंदी को भगौड़ा भी घोषित किया जा सकता है।
स्रोत: ईटीवी भारत की 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर आधारित अन्य रिपोर्टें। जेल प्रशासन या अदालत के नए आदेश आते ही यह खबर अपडेट की जाएगी।