अगर आप राजस्थान पुलिस में सेवारत हैं और अपनी सरकारी ई-मेल आईडी से अमेजन, फ्लिपकार्ट या जोमैटो जैसी साइटों पर खाता खोल रखा है, तो ये खबर सीधे आपके लिए है। राजस्थान पुलिस सरकारी ईमेल को लेकर अब तक का सबसे सख्त फैसला आया है — पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी कर दिया है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपनी सरकारी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल निजी या ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर अकाउंट बनाने के लिए नहीं कर सकेगा। यानी पहले से जिन कर्मचारियों ने अपने खातों में सरकारी ईमेल जोड़ रखा है, उन्हें वह हटाना होगा। ये रोक कोई सामान्य सलाह नहीं, बल्कि पुलिस मुख्यालय का पूर्ण प्रतिबंध है — और इसका पालन हर महीने होने वाले सुरक्षा ऑडिट में जांचा जाएगा।
राजस्थान पुलिस सरकारी ईमेल पर पूरी रोक: आदेश में क्या-क्या है
पुलिस मुख्यालय के आदेश के मुताबिक अब सरकारी ई-मेल आईडी सिर्फ आधिकारिक काम के लिए ही इस्तेमाल होगी। अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो जैसी ई-कॉमर्स साइटों के अलावा सोशल मीडिया, कैब बुकिंग और गेमिंग जैसे निजी प्लेटफॉर्मों पर भी सरकारी ईमेल से खाता बनाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों ने पहले से ही अपनी सरकारी ई-मेल आईडी इन प्लेटफॉर्मों से लिंक कर रखी है, वे तुरंत उसे अपने अकाउंट से हटाएं।
कर्मचारी अपनी निजी ई-मेल से पहले की तरह खरीदारी कर सकते हैं — प्रतिबंध सिर्फ सरकारी ई-मेल पर है। पालन की समीक्षा हर महीने के सुरक्षा ऑडिट में होगी।
एफआईआर और केस डायरी जैसे संवेदनशील दस्तावेजों पर भी सख्ती
आदेश का दूसरा बड़ा हिस्सा अपराध संबंधी संवेदनशील रिकॉर्ड की सुरक्षा से जुड़ा है। राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) में दर्ज गोपनीय जानकारी के लिए भी नए नियम लागू कर दिए हैं।
एफआईआर, केस डायरी, गवाहों के बयान, बैंक विवरण और जांच रिपोर्ट जैसे दस्तावेजों तक अब केवल अधिकृत पुलिसकर्मियों की ही पहुंच होगी। इन दस्तावेजों को बिना अनुमति डाउनलोड करना, निजी ई-मेल पर भेजना या किसी सार्वजनिक क्लाउड प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा, क्योंकि डेटा लीक होने से चल रही जांच और गवाहों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
राजस्थान पुलिस सरकारी ईमेल: हर महीने सुरक्षा ऑडिट और VPN खातों की सफाई
नई व्यवस्था के तहत राजस्थान पुलिस हर महीने के दूसरे सोमवार या मंगलवार को सुरक्षा ऑडिट करेगी, जिसमें वर्क फ्रॉम होम या रिमोट एक्सेस के वीपीएन खातों की समीक्षा होगी और लंबे समय से इस्तेमाल न हो रहे खातों को तुरंत बंद कर दिया जाएगा। तबादले या सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रिय रह जाने वाले पुराने खाते हैकर्स के लिए सबसे आसान रास्ता बन जाते हैं। राजस्थान पुलिस सरकारी ईमेल के दुरुपयोग को रोकने के लिए ही ये सख्ती कर रही है — कमजोर पासवर्ड और बंद न किए गए खाते अब बच नहीं पाएंगे।
साइबर क्राइम के डीजी संजय अग्रवाल ने निर्देश दिए हैं कि कंप्यूटर, लैपटॉप और सर्वर में गैर-जरूरी पोर्ट्स और सेवाओं को तुरंत बंद किया जाए, एंटीवायरस हमेशा अपडेट रखे जाएं, और किसी हमले या संदिग्ध गतिविधि पर प्रभावित सिस्टम को तुरंत नेटवर्क से अलग कर दिया जाए। सभी संबंधित अधिकारियों को 26 अक्टूबर तक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजनी होगी।
आखिर क्यों आया इतना सख्त फैसला?
पीछे की वजह है साइबर हमलों का बदला हुआ स्वरूप — हैकर्स सरकारी ई-मेल सिस्टम और नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए अब एआई-आधारित टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। फिशिंग से लॉगिन क्रेडेंशियल चुराना पहले से कहीं आसान और तेज हो गया है।
सरकारी ई-मेल आईडी सिर्फ मेल का जरिया नहीं है — इसी से राजस्थान एसएसओ, SecLAN और RajSWAN जैसे सरकारी डिजिटल संसाधनों तक पहुंच मिलती है। अगर कर्मचारी वही पासवर्ड किसी ई-कॉमर्स साइट पर भी रखता है, तो उस साइट के डेटा लीक होने पर सरकारी खाता भी खतरे में पड़ जाता है। डार्क वेब पर सरकारी ई-मेल के लॉगिन विवरण बिकने और लीक होने के मामले भी मिल चुके हैं।
पृष्ठभूमि में 14 अक्टूबर की वो एडवाइजरी भी है, जो पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर शाखा R4C ने जारी की थी। अब एक हफ्ते के भीतर उसी सलाह को आदेश का रूप देकर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। राजस्थान में साइबर अपराध का दायरा भी इसे जरूरी बनाता है — जनवरी से सितंबर 2026 के बीच प्रदेश में ठगों ने 1.48 लाख लोगों से 574 करोड़ रुपये ठग लिए थे (पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें)।
आदेश के 8 मुख्य बिंदु एक नजर में
- अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो समेत निजी और ई-कॉमर्स साइटों पर सरकारी ई-मेल से अकाउंट बनाने पर पूर्ण रोक
- पहले से लिंक किए गए खातों से सरकारी ई-मेल आईडी तुरंत हटाने के निर्देश
- सीसीटीएनएस के संवेदनशील दस्तावेजों (एफआईआर, केस डायरी, गवाहों के बयान, बैंक विवरण) की पहुंच सिर्फ अधिकृत कर्मियों तक
- इन दस्तावेजों को निजी ई-मेल पर भेजने या पब्लिक क्लाउड पर अपलोड करने पर रोक
- हर महीने दूसरे सोमवार/मंगलवार को सुरक्षा ऑडिट
- लंबे समय से निष्क्रिय वीपीएन खातों को तुरंत बंद करना
- सभी सिस्टमों में गैर-जरूरी पोर्ट्स बंद और एंटीवायरस अपडेट रखना
- 26 अक्टूबर तक सभी अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजनी होगी
कर्मचारियों को अब क्या करना चाहिए?
पहला और सबसे जरूरी काम — अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो और अन्य निजी प्लेटफॉर्मों के अकाउंट से सरकारी ई-मेल हटाकर निजी ई-मेल लगाएं। दूसरा, सरकारी ई-मेल के लिए 12 से 14 अक्षरों का मजबूत और पूरी तरह अलग पासवर्ड रखें, और उस पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर चालू करें।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें — बिना अनुरोध के OTP मिलना, ‘Sent’ फोल्डर में ऐसे संदेश जो आपने नहीं भेजे, खाते से अपने आप लॉगआउट या पासवर्ड बदल जाना। इनमें से कुछ भी दिखे तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारी और साइबर शाखा को सूचित करें।
राजस्थान पुलिस ने इससे पहले भी साइबर सुरक्षा को लेकर समय-समय पर चेतावनियां जारी की हैं — पुलिस की साइबर अलर्ट पर ये रिपोर्ट भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: क्या राजस्थान पुलिस कर्मचारियों पर ऑनलाइन खरीदारी करने पर रोक लग गई है?
उत्तर: नहीं। निजी ई-मेल आईडी से खरीदारी पहले की तरह जारी रहेगी — रोक सिर्फ सरकारी ई-मेल आईडी के इस्तेमाल पर है।
प्रश्न: पुराने अकाउंट से सरकारी ईमेल कैसे हटाएं?
उत्तर: संबंधित साइट या ऐप की सेटिंग्स में ई-मेल पता बदलने का विकल्प चुनें और अपनी निजी ई-मेल आईडी दर्ज करें।
प्रश्न: आदेश कब से लागू है और रिपोर्ट कब भेजनी है?
उत्तर: आदेश तुरंत प्रभाव से लागू है, और सभी अधिकारियों को 26 अक्टूबर तक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजनी होगी।
प्रश्न: आदेश का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
उत्तर: हर महीने होने वाले सुरक्षा ऑडिट में इसकी समीक्षा होगी। संवेदनशील दस्तावेजों के मामले में लापरवाही गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकती है।