गौ अधिकार हुंकार महासभा में रखी गई 8 बड़ी मांगें
महासभा में गौसेवकों ने सरकार के सामने अपनी मांगों का एक स्पष्ट चार्टर रखा। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- 12 माह का अनुदान: गौशालाओं को अभी सिर्फ 9 महीने की सहायता मिलती है। इसे बढ़ाकर पूरे 12 महीने किया जाए।
- प्रतिदिन अनुदान राशि तय हो: तीन साल से छोटे गौवंश के लिए 50 रुपये और बड़े गौवंश के लिए 100 रुपये प्रतिदिन अनुदान मिले।
- समय पर भुगतान: अनुदान की राशि हर महीने समय पर मिले, ताकि चारे-पानी की व्यवस्था में रुकावट न आए।
- ECS की परेशानी खत्म हो: अनुदान के भुगतान में ECS से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों का स्थायी समाधान निकाला जाए।
- ऑडिट रिकवरी निरस्त हो: AG की ओर से प्रस्तावित ऑडिट रिकवरी को रद्द किया जाए।
- टैगिंग का भार गौशालाओं पर न डाला जाए: 12 अंकीय टैग लगाने, ऑनलाइन डेटा और मैपिंग में होने वाली त्रुटियों की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग की है — इसका खामियाजा गौशालाएं न भुगतें।
- पशु शिविर और चारा डिपो: अकाल जैसे हालात को देखते हुए गौवंश को बचाने के लिए पशु शिविर खोले जाएं और चारा डिपो शुरू किए जाएं।
- मनमानी रिकवरी बंद हो: गौशालाओं से मनमाने ढंग से की जा रही रिकवरी को अनुचित बताते हुए इसे तुरंत रोका जाए।
गौशालाओं की असल दिक्कत: 9 माह की मदद, 12 माह का खर्च
मांगों के केंद्र में एक सीधा गणित है। गौशाला में गाय साल के 12 महीने खाती है — चारा, पानी, दवा और देखभाल का खर्च हर दिन होता है। लेकिन सरकारी अनुदान सिर्फ 9 महीने का मिलता है। बाकी तीन महीने का बोझ गौशाला संचालकों, दानदाताओं और स्थानीय समाज पर पड़ता है।
महासभा में वक्ताओं ने कहा कि चारे की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और मानसून की बेरुखी के बाद पश्चिमी राजस्थान में सूखे जैसे हालात हैं। ऐसे में 9 महीने की मदद से सालभर की जिम्मेदारी निभाना संभव नहीं है — यही वजह है कि 12 माह के अनुदान की मांग सबसे ऊपर रखी गई है।
अनुदान के भुगतान में देरी भी बड़ी समस्या है। समिति का कहना है कि बार-बार पत्राचार और बैठकों के बावजूद समाधान नहीं निकला, इसलिए अब प्रदेशभर के गौ भक्त एक मंच पर आए हैं।
मांगों का पूरा हिसाब: एक नजर में
| मांग | वर्तमान स्थिति | गौसेवकों की मांग |
|---|---|---|
| अनुदान की अवधि | 9 माह | पूरे 12 माह |
| छोटे गौवंश (3 वर्ष से कम) का अनुदान | स्पष्ट दर तय नहीं | 50 रुपये प्रतिदिन |
| बड़े गौवंश का अनुदान | स्पष्ट दर तय नहीं | 100 रुपये प्रतिदिन |
| अनुदान का भुगतान | देरी और ECS की दिक्कतें | समय पर, बिना तकनीकी अड़चन |
| AG ऑडिट रिकवरी | प्रस्तावित | निरस्त हो |
| 12 अंकीय टैगिंग | गौशालाओं से रिकवरी | जिम्मेदारी पशुपालन विभाग की |
| अकाल राहत | सीमित | पशु शिविर और चारा डिपो |
अकाल के हालात ने बढ़ाई चिंता
गौसेवकों की चिंता का एक बड़ा कारण मौजूदा मौसम भी है। पश्चिमी राजस्थान में इस बार मानसून कमजोर रहा और कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं। चारा महंगा और दुर्लभ हुआ है। महासभा में कहा गया कि गौवंश को बचाने के लिए सरकार को तुरंत पशु शिविर खोलने और चारा डिपो की व्यवस्था करनी चाहिए।
गौरतलब है कि इसी सप्ताह पश्चिमी राजस्थान के गोवंश संकट पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी सरकार से मांग कर चुके हैं, और बाड़मेर में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने 10 अक्टूबर तक पशु शिविर न खुलने पर कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी दी थी। यानी गौवंश और अकाल का मुद्दा इस वक्त प्रदेश में कई मोर्चों पर एक साथ गरम है।
गौ अधिकार हुंकार महासभा के बाद आगे क्या होगा?
महासभा में लिए गए संकल्प के मुताबिक, अगर सरकार ने मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो गौ भक्तों का आंदोलन सड़कों तक पहुंचेगा। गौसेवकों का कहना है कि वे टकराव नहीं, समाधान चाहते हैं — लेकिन लंबे इंतजार के बाद अब धैर्य जवाब दे रहा है।
गौशाला अनुदान की व्यवस्था राजस्थान के पशुपालन विभाग के माध्यम से चलती है। अधिक जानकारी के लिए पशुपालन विभाग, राजस्थान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर योजनाओं का विवरण देखा जा सकता है।
गौशाला संचालकों के लिए जरूरी बातें
अगर आप गौशाला चलाते हैं या गौसेवा से जुड़े हैं, तो महासभा के बाद इन बातों पर ध्यान दें:
- अपने गौवंश का रिकॉर्ड दुरुस्त रखें: टैगिंग, ऑनलाइन डेटा और मैपिंग में गलती पर रिकवरी का खतरा है — रिकॉर्ड साफ रखें।
- अनुदान के कागजात तैयार रखें: भुगतान में देरी या ECS की दिक्कत हो तो संबंधित कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं।
- चारे का स्टॉक पहले से सोचें: अकाल जैसे हालात में चारा महंगा हो सकता है — समय रहते व्यवस्था करें।
- समिति से जुड़े रहें: गौ अधिकार हुंकार महासभा के बाद सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की सूचना के लिए राजस्थान गौ सेवा समिति के संपर्क में रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: गौ अधिकार हुंकार महासभा कहां और कब हुई?
जवाब: 9 अक्टूबर 2026 को जयपुर की सांगानेर स्थित पिंजरा पोल गौशाला में इसका आयोजन राजस्थान गौ सेवा समिति ने किया था।
सवाल: महासभा में गौसेवकों की सबसे बड़ी मांग क्या थी?
जवाब: सबसे बड़ी मांग गौशालाओं को मिलने वाले अनुदान को 9 माह से बढ़ाकर पूरे 12 माह करने की थी। साथ ही छोटे गौवंश के लिए 50 रुपये और बड़े गौवंश के लिए 100 रुपये प्रतिदिन अनुदान की मांग रखी गई।
सवाल: गौसेवकों ने सरकार को क्या अल्टीमेटम दिया है?
जवाब: महासभा में कहा गया कि अगर मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो गौ भक्त सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
सवाल: गौशालाओं को अभी कितने महीने का अनुदान मिलता है?
जवाब: वर्तमान में गौशालाओं को 9 महीने का अनुदान मिलता है, जबकि गायों का खर्च साल के 12 महीने होता है। गौसेवक इसी अंतर को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।